चाची की चुत तक का सुहाना सफ़र-1

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हाय दोस्तो.. मैं अतुल चौधरी अपनी पहली चुदाई की कहानी आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूँ। ये मेरी सेक्स लाइफ की शुरूआत की कहानी है। पहले मैं थोड़ा अपने बारे में बता दूँ, मैं एक 24 साल का लड़का हूँ, राजस्थान का रहने वाला हूँ। अभी एक साल पहले ही मैंने अपनी बी.टेक. जयपुर से पूरी की है। अभी मैं गवर्नमेंट जॉब की तैयारी कर रहा हूँ। मैं दिखने में ज्यादा स्मार्ट तो नहीं, पर ठीक-ठीक हूँ।

यह कहानी तब की है जब मैं स्कूल में था. मैं शुरू में अपने ननिहाल में रहता था और 7 वीं क्लास तक वहीं पढ़ा था। जब मैं छोटा था तो मेरे सबसे छोटे मामा की शादी थी। मेरी मामी बहुत खूबसूरत हैं, मैं बचपन से ही उन्हें पसंद करने लगा था।

ननिहाल में मैं ही एक छोटा बच्चा था क्योंकि मेरे बड़े वाले दोनों मामा बाहर ही रहते थे.. अपनी फैमिली के साथ तो मुझे मामा-मामी दोनों ही बहुत प्यार से रखते थे।

मुझमें सेक्स के प्रति रूचि शुरू से ही थी जब मामी मेरे को नहलाती थीं, तो मैं उनके मोटे-मोटे चूचों पर पानी डाल देता था.. वो ‘हट शैतान..’ बोल कर मेरे गालों पे चुम्मी कर लेतीं और खुद से चिपका लेती थीं। मुझे ये सब बहुत अच्छा लगता और मैं उनसे चिपकने का कोई मौका नहीं छोड़ता था।

रात में मैं उन्हीं के कमरे में सोता था, मामी मेरे साथ ही सोतीं पर रात को उठ कर मामा की चारपाई पर चली जातीं और फिर उनके बीच में जो होता, वो मेरे समझ कर बाहर था लेकिन मुझे इस बात की ख़ुशी होती थी कि मामी वापस आके मेरे को प्यार से अपने साथ चिपका के सो जातीं।

इसी तरह दिन निकलते गए और मैं आगे की कक्षा में पहुँच गया। तब तक मामा के भी एक लड़की हो गई थी तो मुझे दूसरे कमरे में सोना पड़ता था। पर मैं रात को दरवाजे से उन्हें एक-दूसरे के शरीर में समाये हुए सेक्स का आनन्द लेते हुए देख लेता था।

अब एग्जाम के बाद मुझे मम्मी-पापा अपने साथ ले गए, वो दोनों ही टीचर हैं तो बाहर ही रहते थे।

अब मेरे जीवन का एक नया पाठ शुरू हो रहा था जहाँ से मेरे सेक्स की शुरुआत हुई थी।

मैं मम्मी-पापा के स्कूल में ही जाने लगा। गाँव में जहाँ मम्मी-पापा रहते थे, उनके पास वाले घर में एक और फैमिली रहती थी, उसमें एक को मैं चाचा बुलाता था। एक उनका भांजा भी उनके साथ रहता था। चाचा का भांजा जिसका नाम रवि था मेरे से एक क्लास पीछे था, पर हम में अच्छी दोस्ती हो गई थी और मैं उसके साथ ही खेलता था।

चाचा वाली चाची का नाम सुनीता था। चाची ज्यादा सुन्दर तो नहीं थीं.. उनका रंग सांवला था, नैन नक्श बिल्कुल तीखे थे और चूचे भी मोटे मोटे थे। चाची की कमर बिल्कुल पतली और गांड ऊपर की ओर उठी हुई थी।

उस समय तो मेरे को ये सब नहीं पता था.. पर अब बताऊं तो उनका फिगर 34-30-36 का था। कुल मिला कर वो सेक्सी व आकर्षित करने वाली माल थीं। उनके एक 3 महीने का लड़का भी था।

जैसा मैंने बताया कि मैं रवि के साथ ही खेलता था.. हम अक्सर उनके घर पे ही खेलते थे। चाची को मैं बहुत अच्छा लगता था, वो मुझे बहुत प्यार से देखतीं और मुझे अपनी गोदी में उठा कर मेरी गाल पे चुम्मी कर लेतीं। इससे मेरे को भी वो अच्छी लगती थीं।

हमारे घर पर पापा टी.वी. के खिलाफ है तो वो रखते नहीं थे, तो मैं अक्सर उनके घर टी.वी. देखता था। बहुत अधिक न सही.. पर शक्तिमान और सन्डे को जो मूवी आती थी, वो तो देखता ही था।

चाची मेरे को पूरे टाइम अपनी गोदी में ही लिटा के रखती थीं। जब वो ऐसा करतीं, तो मुझे अपनी मामी की याद आ जाती, उनके मोटे-मोटे चूचे मेरे दिमाग में घूमने लगते। पर इस पूरे टाइम रवि हमारे साथ ही रहता था।

एक बार रवि सन्डे को अपने पेरेंट्स के पास गया हुआ था। उस दिन मैं और चाची दो ही घर पे थे, चाचा दिन के टाइम लगभग बाहर ही रहते थे। तो हम शक्तिमान देख रहे थे। तभी चाची का बच्चा उठ गया तो वो उसको दूध पिलाने लगीं। मैंने पहली बार उनके चूचों को नंगा देखा था. एकदम भूरे व गोरे थे और आगे से निप्पल काले थे।

उस वक्त मैं उनको ऐसे ही घूर के देखने लगा जैसे मुझे कोई मस्त माल दिख गया हो। देर तक देखने के बाद मेरा मन उनको छूने को होने लग गया। चाची ने मेरे को अभी तक ऐसे देखते हुए नहीं देखा था।

फिर मैंने धीरे से उनको छू लिया और दबा भी दिया, मेरे को वो थोड़े मुलायम से लगे। मेरा ऐसे करने पर उन्होंने चौंक कर मेरी तरफ देखा, फिर थोड़ा सा मुस्कराईं और बोलीं- छोटू को दूध पीने दे.. शरारत मत कर! मैं शर्मा गया और टी.वी. देखने लगा।

फिर उन्होंने छोटू को सुला दिया और मैं हमेशा की तरह उनकी गोद में लेट गया। पर आज मेरा मन बार-बार उनके उभरे हुए चूचों को छूने का कर रहा था तो मैंने अपना हाथ उन पर रख कर उनको दबा दिया।

इस बार चाची गुस्सा हो गईं और डांटते हुए बोलीं- ऐसा नहीं करते.. गलत होता है। मैं वहाँ से भाग आया।

फिर 2-3 दिन मैं उनके घर खेलने नहीं गया तो उन्होंने मुझे बुला कर प्यार करते हुए कहा- अपनी चाची से गुस्सा हो गया मेरा बेटा.. चल सॉरी बेटू.. अब कभी नहीं डाँटूंगी, तू खेलने आ जाया कर। यह बोल कर चाची ने मेरे गाल पर एक चुम्मी भी कर ली, मैं भी उनसे चिपट गया।

इसी तरह एक साल निकल गया, अब मैं कुछ बड़ा हो गया था। मेरे कई दोस्त भी बन गए थे।

फिर एक दिन चाचा को कहीं बाहर काम हो गया तो वो पापा से बोले कि आज अतुल को उसकी चाची के पास सुला देना, रवि और ये दोनों ही ऊपर अपनी चाची के पास सो जाएंगे। तो पापा ने भी हाँ बोल दी।

रात को मैं और रवि बेड पे सो गए और चाची पास में चारपाई पर लेट गईं। अचानक रात को मेरी नींद खुल गई, मैं अपनी मम्मी के साथ ही सोता था तो मुझे अकेले डर लगने लग गया और मैंने रोना शुरू कर दिया। चाची उठ गईं और बोलीं- क्या हुआ बेटा?

तो मैं और जोर से रोने लगा कि मुझे डर लग रहा है। तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया और चुप कराने लगीं। साथ ही चाची ने खुद के बच्चे को बेड पे सुला के मुझे खुद के साथ चिपका के सुला लिया। अब मेरा मुँह उनके चूचों पे लग रहा था.. तो मैंने थोड़ी देर में हाथ भी रख दिया और दबा भी दिया।

इस बार उन्होंने थोड़ा सा आह किया और मुझे किस करके खुद से और ज्यादा जोर से चिपका लिया। मैं ऐसे ही पूरी रात उनके चूचों पे हाथ रखके सोता रहा.. मेरा लंड भी थोड़ा टाइट हो गया।

अब ऐसा बहुत बार होने लगा.. वो जब भी बच्चे को दूध पिलातीं, तो मैं उनके चूचों से खेलता रहता था। वो भी मुझे प्यार से खुद के चिपका लेती थीं। चाची कहती थीं- मेरा प्यारा बेटा बहुत सुन्दर है.. किसी की नजर ना लगे मेरे बेटे को।

ऐसे ही प्यार से खेलते-खेलते एक साल और चला गया और मैं पूरा जवान हो गया। उस साल मैं मेरे बहुत से दोस्त बने जो मेरे से उम्र में बड़े थे। उनमें से एक दोस्त था रमेश.. जो दो बार फेल हो चुका था। उससे मेरी बहुत ज्यादा दोस्ती हो गई थी। वो एक बिगड़े किस्म का लड़का था।

जब हम पेशाब करने जाते तो बोलता कि तू अपनी लुल्ली दिखा.. और वो खुद की भी दिखाता। वो कहता साले तेरा तो बड़ा है.. मेरा तो इतनी उम्र में छोटा सा था अब बड़ा हुआ है। तो मैंने पूछा- अब कैसे बढ़ा? बोला- मुठ मारने से। मैं उसकी मुँह की तरफ देखने लगा तो वो बोला- ऐसे क्या देख रहा है.. कभी मारी नहीं क्या? मैंने ‘ना’ बोला तो बोला- आज शाम को ग्राउंड में आना.. वहाँ मुठ मारना सिखाऊंगा।

अब मैं शाम को पहुंचा तो उसका एक दोस्त जो उसकी उम्र का ही था, वो भी वहीं था। वो दोनों मेरे को, एक तरफ कुआँ बना था और झाड़ियां भी थीं, वहाँ ले गए। वहाँ किसी को कोई नहीं दिखता था। उन्होंने उस दिन मुझे मुठ मारनी सिखाई। उनका तो 2-3 मिनट में काम हो गया और मेरा बहुत देर तक नहीं हुआ तो मैं डर गया। उसने कहा- कोई बात नहीं, पहली बार है इसलिए टाइम लगेगा।

फिर कोई 7-8 मिनट बाद मुझे सनसनाहट सी हुई और थोड़ा पानी सा निकला। फिर उन्होंने मुझे उसके बारे में सब बातें बताईं। अब ऐसा करना हमारा रोज़ का काम हो गया था।

दोस्तो, जवानी की इन बातों को मैंने अपनी इस सेक्स स्टोरी में पूरी तरह से सच्चाई पर आधरित लिखा है। चाची की चुत चुदाई का सुहाना सफ़र कैसे शुरू हुआ, ये रसभरी दास्तान आगे लिखूँगा। आप मेरी इस सेक्स स्टोरी पर अपने कमेंट्स कर सकते हैं।

[email protected] चाची की चुत की कहानी जारी है।

चाची की चुत तक का सुहाना सफ़र-2

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