प्यासी भाभी के साथ जोश भरे सेक्स का मजा- 3

एक भाभी ने गंदा सेक्स किया मेरे साथ. मेरे लंड को दर्द देकर सुजा दिया. उसने अपनी बी डी एस एम फंतासी मेरे साथ खेल कर पूरी कैसे की?

नमस्कार दोस्तो, मैं आरुष एक बार फिर से आपकी खिदमत में हाजिर हूँ. आप लोगों से निवेदन करना चाहूंगा कि कृपया करके मुझसे मेरी क्लाइंट की डिटेल ना पूछें, मैं वो सब आपको नहीं दे पाऊंगा.

अभी तक जिसने भी मेरी सेक्स कहानी को पढ़ा है, मैं उन लोगों का धन्यवाद करना चाहूंगा. पिछले भाग गर्म भाबी ने लिया चूत चटवा कर पूरा मजा में अब तक आपे पढ़ा था कि भाभी मुझसे सिर्फ ओरल सेक्स का मजा लेना चाह रही थीं. जबकि मैं उनको चोदना चाह रहा था.

बार बार भाभी मुझसे अपनी चुत चटवातीं और खल्लास होकर शराब पीती और मुझे भी पिलातीं. मगर चोदने की बात के लिए कह देतीं कि अभी नहीं, बाद में चुदूंगी.

ये उनकी एक फैंटेसी थी जिस वजह से वो ऐसा कर रही थीं.

इस बार जब हम दोनों सो कर उठे तो भाभी जी व्हिस्की की एक और बोतल ले आई थीं, जिसे देख कर मैं थोड़ा हैरान था कि भाभी कितनी बड़ी पियक्कड़ हैं.

अब आगे गंदा सेक्स:

मैंने शराब की बोतल देखते हुए कहा- भाभी जी इसकी क्या जरूरत है … हम दोनों पहले ही इतनी ज्यादा पी चुके हैं … प्लीज अब और नहीं! भाभी जी- डोन्ट वरी … इसमें ज्यादा नशा नहीं होता. ये बहुत अच्छे किस्म की व्हिस्की है.

मैं- ओके भाभी जी, पर अब आप इसमें गोली तो नहीं डालोगी न! भाभी जी- नहीं, अब गोली नहीं लेकिन अब जो दर्द तुम्हें मिलेगा, इसके लिए तुम्हें इसकी जरूरत पड़ेगी. मैं- ठीक है भाभी जी.

भाभी जी ने वापस से पैग बनाए. अपने लिए लाइट और मेरे लिए हार्ड. वो अपने लिए पानी और सोडे से पैग बना रही थी और मेरे लिए चुतामृत और बर्फ से.

पहला पैग पिया, तो मुझे भी कुछ ताजगी सी महसूस होने लगी थी.

भाभी की तरफ देखा मैंने … तो उनके होंठों पर एक अजीब सी मस्ती दिखी. मैंने भाभी की आंखों में देखा. तो भाभी बोलीं- ऐसे क्या देख रहे हो … क्या मैं कुछ ज्यादा हॉट लग रही हूँ!

मैंने कहा- भाभी आप हॉट लग नहीं रही हो … आप हॉट हो. मैंने आज तक बहुत सी महिलाओं के साथ सेक्स किया है लेकिन आपमें मुझे जो बात नजर आ रही है … वो अब तक किसी में देखने को नहीं मिली.

भाभी हंसने लगीं और बोलीं- जैसे क्या ख़ास लगा? मैंने कहा- आप पूरी की पूरी ख़ास हो. भाभी ने कहा- चलो इसी बात पर तुमको एक मजा देती हूँ.



मैंने उनकी तरफ देखा तो भाभी ने अपनी आंखों से मुझे उनके दूध चूसने का इशारा किया. मैं झट से उनके करीब हो गया और मैंने उनके एक मम्मे के निप्पल पर अपने होंठ लगा दिए.

मैंने निप्पल चूसना शुरू किया तो भाभी ने अपने पैग कि शराब अपने निप्पल पर गिरानी शुरू कर दी.

मैं भाभी के निप्पल से आती हुई शराब को अपने अन्दर जज्ब करने लगा. कुछ देर बाद भाभी ने मेरे सर को सहलाया और अपने दूसरे निप्पल की तरफ किया. मैंने भाभी के दूसरे मम्मे को चूसना शुरू कर दिया.

भाभी ने इस निप्पल पर भी दारू टपकानी शुरू कर दी.

मैंने इशारा किया कि कुछ चखना चाहिए, तो उन्होंने अपनी चुत में उंगली डाली और चुत रस से उंगली को भिगो कर मेरे मुँह में डाल दी. उनकी चुत के नमकीन रस से मैंने शराब की कड़वाहट को खत्म किया और उनके निप्पल पर फिर से मुँह लगा दिया.

भाभी फिर से शराब को बूंद बूंद करती हुई अपनी चूची को भिगोने लगीं और मैं गिरती हुई शराब को चुसकने लगा. इस बार मैंने खुद ही भाभी की चुत में उंगली डाल दी.

उंगली मुँह में लेकर मैं नमकीन चुतरस टेस्ट करते हुए चखना का स्वाद लेने लगा.

जब तक भाभी का गिलास खाली न हो गया, तब तक मैं उनकी चुचियों को बारी बारी से चूसता रहा.

इसके बाद ही मुझे नशा होने लगा और भाभी जी ने अपना तीसरा पैग, जो कि नीट बनाया था, उसे पी गईं और अगला पैग बनाने लगीं.

इस बार भाभी ने हम दोनों के लिए एक एक हार्ड पैग बनाया. खुद के लिए फिर से नीट और मेरे लिए चुतामृत के साथ.

हम दोनों ने जैसे तैसे पैग खत्म किए.

फिर वो मेरे लिए फ्राइड चिकन ले आईं. हम दोनों ने साथ में खाया और मैं खड़े होकर बेड पर जाकर बैठ गया.

भाभी जी भी मेरे साथ नशे में टुन्न होकर आकर बैठ गईं.

भाभी जी- क्या तुम तैयार हो आरुष! मैं- जी भाभी जी, मैं तैयार हूं.

भाभी जी- मैं तुम्हारे साथ जो करने वाली हूँ … वो बहुत ज्यादा दर्द देने वाला होगा. ये कहते कहते भाभी जी की आंखें नम होने लगीं.

भाभी जी- आरुष, मर्द सेक्स के लिए औरत के साथ कुछ भी कर देता है. केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए वो ये भी नहीं सोचता कि औरत को दर्द हो रहा है … या मजा आ रहा है. मैं भी ये देखना चाहती हूँ कि आखिर एक मर्द सेक्स के लिए कितना दर्द सह सकता है. मैं ये बात तुम्हें इसलिए बता रही हूँ क्योंकि तुम पिछले सात घंटों से मेरे साथ हो और हम बिल्कुल नंगे एक दूसरे के साथ हैं.
लेकिन तुमने अभी तक सिर्फ वही किया है, जो मैंने तुम्हें कहा है. तुमने मुझे सेक्स के लिए फ़ोर्स नहीं किया. तुम्हारी ये बात मुझे बहुत पसंद आई कि तुमने बिना सेक्स किए भी मुझे तीन बार ऑर्गेज्म करवाया है. बस मेरी एक ही ख्वाहिश है, उसे भी पूरी कर दो. फिर कभी तुम जहां बोलोगे, जैसे बोलोगे … मैं तुमसे चुद जाऊंगी. अगर तुम चाहोगे तो मैं तुमसे बीच सड़क पर भी नंगी होकर चुदवा लूंगी.

ये कह कर भाभी की आंखों में आंसू आने लगे.

मैं- भाभी जी, आज और कल पूरा दिन मैं आपका गुलाम हूँ. आप मेरे साथ कुछ भी कर सकती हो. मैं हर दर्द सहने को तैयार हूं.

मैं बिना ये सोचे बोल गया कि आगे मेरे साथ क्या होने वाला है. मैंने सिर्फ और सिर्फ भावनाओं में बहकर ये कह दिया था.

भाभी जी- आर यू श्योर … क्या तुम्हारा इरादा पक्का है? मैं- जी भाभी जी. भाभी जी- शाबाश मेरे शेर.

फिर भाभी जी ने मेरे दोनों हाथों को पीछे हथकड़ी से बांध दिया. मेरी आंखों पर काली पट्टी बांध दी और मेरे मुँह पर भी टेप चिपका कर खामोश कर दिया. मैं समझ गया कि अब जो भी होने वाला है, वो बहुत ज्यादा खतरनाक और दर्द देने वाला होगा. लेकिन मैंने भी खुद को इस अग्नि परीक्षा के लिए तैयार कर लिया था.

फिर भाभी जी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझ अंधे बने आरूष को कहीं लेकर गईं.

शायद भाभी ने मुझे हॉल में ले जाकर किसी पिलर के सहारे खड़ा करके मुझे रस्सियों से टाइट बांध दिया.

फिर कुछ देर बाद मुझे कुछ गीले रुमाल की पोटली जैसा मेरे लंड के ऊपर महसूस हुआ. रुमाल से निकलते पानी से लंड पर ठंडा ठंडा एहसास हुआ.

लेकिन शायद ये तूफान से पहले आने वाली शांति थी. क्योंकि उस रुमाल के अन्दर मुझे अचानक से कुछ झनझनाने की सी आवाज आई. मेरी अन्दर के अन्दर ही गांड फट गई कि पता नहीं क्या सनसना रहा है.

भाभी जी- आरुष, डरना मत … मैं एक सेक्स स्पेशलिस्ट डॉक्टर हूँ. मेरे पास पेन किलर इंजेक्शन हैं, तुम्हें बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा.

मैं तो कुछ बोल भी नहीं सकता था … क्योंकि मुँह तो मेरा पहले से ही पैक था. फिर मैंने सोचा कि चलो जो हो रहा है, होने दो. आज ये अनुभव भी करके देखते हैं.

फिर उस बेरहम औरत ने मेरे लंड पर गीला गीला सा कुछ लगाना शुरू कर दिया. मैं समझ गया भाभी लंड पर शहद जैसा कुछ लगा रही हैं. भाभी ने अच्छे से मेरे पूरे लंड पर उसे लगा कर मेरी आंखों की पट्टी खोल दी.


जैसे ही मेरी पट्टी खुली … मैंने देखा के भाभी ने एक ब्लैक गाउन से अपने पूरे शरीर को कवर कर रखा था. हाथों में भी पॉलीथीन ग्लब्स … मतलब पूरी तरह से कवर.

फिर भाभी ने उस रुमाल की पोटली को एक पॉलीथिन में डाल कर उसे खोल दिया और उस पॉलीथिन के अन्दर जड़ तक मेरे लंड को डाल कर गांठ लगा दी ताकि कोई भी लीकेज पॉलीथिन से बाहर ना निकल पाए.

भाभी जी- आरुष ओनली फाइव मिनट्स … यू कैन डू दिस … बस पांच मिनट. घबराना मत, तुम्हें कुछ नहीं होगा. तुम सिर्फ मेरी तरफ देखो आरुष, नीचे मत देखना … तुम्हें कुछ नहीं होगा.

जब मुझे बर्दाश्त के बाहर हुआ तो मैंने चीखना चाहा लेकिन चाह कर भी चीख ना सका.

अभी दो मिनट ही हुए थे … तीन मिनट और निकालना मेरे लिए बहुत ही मुश्किल होने वाला था. लेकिन मैं फिर भी उस अजीब से तरल पदार्थ को बर्दाश्त कर रहा था.

मेरे दोनों पैर भी दोनों कोनों से बंधे हुए थे. मैं चाहते हुए भी झुक नहीं सकता था. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं … क्या नहीं. दर्द बर्दाश्त के बाहर था.

मैं ये तक सोचने लगा कि कहीं मैं कल शाम तक इस पागल औरत के साथ रहा, तो क्या पता नहीं कल तक मैं ज़िंदा रहूंगा या नहीं.

खैर … जैसे तैसे पांच मिनट निकले और भाभी ने पॉलीथिन निकाल दी और उसे बाहर कहीं रख आईं.

भाभी जी- बस आरुष हो गया, अब आंखें खोलो … तुम एकदम ठीक हो जाओगे … बस दो मिनट रुकना.

जब मैंने आंखें खोलीं, तो देखा कि मेरे लंड महाराज जी पूरी तरह लाल हो गए थे. मैं बहुत बुरी तरह से दर्द से तड़प रहा था.

दो मिनट बाद वो भाभी जी एक मेडिसिन बॉक्स लेकर आईं और उसमें से कोई क्रीम निकाल कर उन्होंने मेरे पूरे लंड पर लगा दी. फिर पांच मिनट बाद लंड को गर्म पानी से धो दिया.

जब जाकर लंड में मुझे कुछ ठंडा लगने लगा, लेकिन दर्द तो अभी भी था … जिसे मैं तो क्या किसी के लिए भी सहन कर पाना बहुत मुश्किल था.

भाभी ने मेरे हाथों की नसों में कोई दो से तीन अलग अलग इंजेक्शन लगाए. इससे थोड़ी देर बाद मुझे दर्द से थोड़ी राहत मिलने लगी.

लेकिन मेरा लंड पर सूजन के कारण और लंड भी ज्यादा लंबा और मोटा हो गया था. ये करीब 5 इंच मोटा तो हो ही गया था.

अब दर्द से राहत मिलने लगी थी. अब मेरी समझ में आया कि भाभी ने शायद मेरे लंड को सुजाने वाला कोई प्रयोग किया था.


भाभी जी- आरुष, तुम ठीक तो हो ना! दर्द तो नहीं हो रहा ना? मैंने ना में सर हिलाया तो उन्होंने मेरे मुँह पर से पैकिंग हटा दी.

भाभी जी- आरुष सॉरी … प्लीज मुझे माफ़ कर दो … मेरी वजह से तुमने इतना गंदा सेक्स सहन किया. नाउ यू आर फाइन … ओके! मैं- जी भाभी जी, मैंने आपकी खुशी के खातिर सब बर्दाश्त कर लिया. प्लीज अब मुझे छोड़ दीजिए … और जाने दीजिए.

भाभी जी- नहीं आरुष, अब से तो मैं तुम्हारी और भी ज़्यादा दीवानी हो गई हूं. अब तुम जो चाहो, वो मेरे साथ कर सकते हो. पहले थोड़ा आराम कर लो.

फिर भाभी जी ने मेरे शरीर और पैरों को पिलर से खोला और बेडरूम में लेकर आ गईं. मेरे हाथों में अभी भी पीछे से हथकड़ियां लगी हुई थीं.

सेक्स कहानी जारी रहेगी आपके सुझाव जरूर मेल करें. [email protected]

गंदा सेक्स कहानी जारी है.

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