मेरा कामुक बदन और अतृप्त यौवन- 3

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दोस्तो, मैं सोनाली आप सब पाठकों का अन्तर्वासना पर स्वागत करती हूँ। मेरी कामुकता से भरी हुई कहानियों को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।

मेरी सेक्स कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा की कैसे मैं और मेरी सहेली मनीषा की नज़दीकियाँ बढ़ी और फिर हम दोनों ने लेस्बियन सेक्स किया।

अब आगे-

जब मैं रूम में पहुँची तो मैंने देखा की रोहन मेरी पैंटी को अपने हाथ में लेकर उसे सूंघ रहा था और उसका एक हाथ उसके पैंट के ऊपर था। वो पैंट के ऊपर से ही अपने लण्ड को सहला रहा था।

उसकी यह हरकत देखकर मैं उसके पास गई और उससे बोली- क्या बात है? आज मेरा राजा बेटा बहुत ही गर्म हो रहा है? रोहन- हाँ मम्मी, आज सुबह से ही मैं बहुत गर्म हो रहा हूँ और आपकी पैंटी देखकर तो मेरा आपा ही खो जाता है।

फिर रोहन बोला- मम्मी आपकी इस पैंटी पर तो बहुत दाग लगे हुए है लगता है कल रात को पापा ने कुछ ज्यादा ही बार आपकी चुदाई की थी।

मैं बोली- हाँ, की तो थी! और यह पैंटी मैंने तेरे लिए ही रखी थी क्योंकि मेरे राजा बेटा को मेरी पैंटी सूंघना बहुत पसंद है ना!

मेरी बात सुनकर रोहन खुश हो गया, उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया, थोड़ी देर बाद वो मुझसे अलग हुआ और बोला- मम्मी बहुत दिनों से मैंने आपकी चुदाई नहीं की है। आज मैं आपको जी भर के चोदना चाहता हूँ।

हालांकि मनीषा के साथ मस्ती करने के बाद मैं थक चुकी थी पर रोहन की बेबसी और उसकी उत्तेजना को देखते हुए मैंने उसे कुछ नहीं बोला।

रोहन ने मुझे चूमना शुरू कर दिया वो मेरे होंठों को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा। फिर उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मैं भी उसकी जीभ को चाटने लगी।

थोड़ी देर किस करने के बाद उसने मेरे शर्ट को उतार दिया और फिर मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया जिससे वो मेरी टांगों के बीच से ही नीचे गिर पड़ा फिर रोहन ने भी अपने कपड़े उतार दिए और अब वो सिर्फ चड्डी पहने हुए मेरे सामने था।

अब मैं रोहन के सामने सिर्फ काली ब्रा और पैंटी में ही थी, काली होने के कारण वो मेरे गोरे बदन पर अलग ही चमक रही थी जिससे रोहन काफी आकर्षित हो रहा था। उसने मुझसे पूछा- मम्मी पहले तो कभी आपको इस ब्रा और पैंटी में नहीं देखा?

तो मैं बोली- मैंने कल ही मार्केट से इन्हें खरीदा है।

रोहन ब्रा के ऊपर से ही मेरे मम्मों को दबाने लगा और फिर उसने अपने हाथ को पीछे ले जाकर ब्रा के हुक को खोल दिया। अब मेरे स्तन बिलकुल नंगे थे और रोहन उन्हें चूम और दबा रहा था।

अब रोहन ने मुझे ले जाकर बेड पर लेटा दिया और आकर मेरे ऊपर से ही अपने दोनों हाथों का जोर मेरे मम्मों पर लगाकर उन्हें दबाने लगा। वो कभी मेरे होंठों पर किस करता तो कभी मेरी गर्दन और गालों पर किस करता।

मेरे दोनों हाथ रोहन की पीठ पर थे।

रोहन अब मेरे मम्मों को चूमता हुआ मेरी कमर पर आ गया और मेरी नाभि को चाटने लगा। फिर उसने मेरी टांगों के बीच आकर मेरी पैंटी को मेरी कमर से निकाल दिया और फिर धीरे धीरे से उसे टांगों के बीच से खींचकर बाहर निकाल दिया।

मुझे पूरी नंगी करने के बाद उसने मेरी दोनों टांगों को अपनी कंधों पर रखा और मेरी चूत को चाटने लगा। मैं सिसकारियाँ भरने लगी। मैं रोहन के मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी।

थोड़ी देर पहले मनीषा के साथ करने के बाद मैंने अपने चूत को साफ नहीं किया था जिस वजह से मेरी चूत से मादक सी गंध आ रही थी जिसे रोहन ने सूंघ लिया और वो बोला- मम्मी ये आपकी चूत से पानी की खुशबू क्यों आ रही है क्या आपने अभी थोड़ी देर पहले… कुछ किया था?

मैं कुछ नहीं बोली।

फिर रोहन आगे बढ़ा और उसने अपनी जीभ मेरी चूत में घुसेड़ दी। उसकी नुकीली जीभ मेरी चूत में हलचल मचा रही थी। बीच बीच में वो मेरी चूत के दाने को भी जीभ से सहला रहा था।

मैं उसकी हर हरकत पर सिसकारियों से उसका हौंसला बढ़ा रही थी- ओह.. हाआ.. रोहन… और चाटो.. बहुत मज़ा आ रहा है.. ऊहह.. और ज़ोर से चाटो.. अपनी जीभ मेरी चूत में घुसेड़ दो.. बहुत मज़ा आ रहा है.. ऑहह… रोहन… मेरी चूत अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

फिर रोहन उठा और बोला- मम्मी, आपकी चूत तो गीली हो गई, अब आपकी बारी है मेरा लण्ड चूसने की। रोहन के इतना बोलते ही मैं उठी और उसको लेटा कर उसके ऊपर आ गई।

मैंने रोहन की चड्डी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे के ऊपर थे। रोहन का लण्ड पूरी तरह से खड़ा था पर आज उसका लण्ड और दिनों की अपेक्षा बड़ा लग रहा था और उसके लण्ड से पानी भी निकल रहा था।

मैं रोहन के लण्ड को हाथ में लेकर सहलाने लगी और फिर उसे मुँह में लेकर चूसने लगी।

रोहन भी मेरे बालों को पकड़ कर मेरे मुँह को अपने लण्ड पर दबा रहा था जिससे रोहन का लण्ड मेरे गले तक जाने लगा। थोड़ी देर बाद मेरी साँस फूलने लगी तो मैंने लण्ड को मुँह से बाहर निकाल दिया।

रोहन का लण्ड गीला हो चुका था और अब वो मेरी चूत में जाने के लिए बिल्कुल तैयार था।

रोहन उठा और उसने अपनी पॉकेट से कोई गोली निकाली और उसे खाकर वापस बेड पर आ गया, मेरी टांगों के बीच आकर बैठ गया। मैंने उससे पूछा- रोहन यह किस चीज की टेबलेट खाई है तूने? तेरी तबियत तो ठीक है ना?

मेरी बात सुनकर रोहन बोला- नहीं मम्मी, मुझे कुछ नहीं हुआ… यह टेबलेट तो चुदाई का समय बढ़ाने के लिए है। मैंने रोहन को कुछ नहीं बोला।

फिर रोहन ने मेरी टांगों को फैलाया और अपने लण्ड को मेरी चूत पर लगा दिया, पहले धक्के में ही उसने अपना आधा लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ दिया और फिर लगातार दूसरे धक्के में रोहन का पूरा लण्ड मेरी चूत के अंदर था। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

फिर उसने लगातार झटकों से मुझे चोदना शुरू कर दिया और मैं भी मस्त होकर सिसकारियों के साथ चुदाई का मजा लेने लगी।

मैं मस्ती में रोहन को और उत्तेजित करने लगी- हाँ… हाँ… बस ऐसे ही! ऐसे ही… मेरे लाल… शाबाश… चोद मुझे! चोद दे मेरी चूत को अपने इस मोटे लंड से! और ज़ोर से… और ज़ोर से! हाँ बेटा..ऐसे ही… बस ऐसे ही चोद मुझे! आहहहह… रोहन.. मेरे लाल… चोद डाल अपनी मम्मी को… आहह…

अब रोहन और तेजी के साथ मुझे चोदने लगा। रोहन ने अपने हाथों से मेरे मम्मों को फिर से दबाना शुरू कर दिया, उसके दोनों हाथ मेरे मम्मों को जकड़े हुए थे। उसके धक्के लगातार मेरी चूत को अंदर तक निचोड़ रहे थे।

मैं काफी उत्तेजित हो चुकी थी इसलिए मेरा बदन जल्दी ही अकड़ने लगा, मैंने रोहन को बोला- मैं झड़ने वाली हूँ!

तो उसने और तेज धक्के लगाना शुरू कर दिए और मैं चिल्लाते हुए झड़ने लगी- हाए मेरी चूत… उफफ्फ़… ओह्ह… माय्य… गॉडड… फ़क्क… मीईई… रोहन… आज तो लगता है मैं मज़े से मर ही जाऊँगी… मेरे लाल, तू मुझे चोद कर कितना मज़ा दे रहा है… उफ्फ़… अहह…

‘हाँ और चोद अपनी माँ की चूत… अंदर तक घुसेड़ दे रोहन.. अपने लण्ड को… उफफ फफफ्फ़… अहह… आह चोद डाल मादरचोद… चोद डाल अपनी माँ को… हे भगवान मेरा निकलने वाला है… मैं झड़ रही हूँ…’

और मैं झड़ गईम मेरा सारा पानी मेरी चूत से निकल कर बेड पर गिरने लगा।

मैं निढाल होकर बेड पर लेटी रही और रोहन लगातार अपने लण्ड को मेरी चूत में अंदर बाहर किये जा रहा था।

अब रोहन ने मुझे घोड़ी बना दिया और फिर मेरे पीछे आकर एक ही झटके के साथ अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में उतार दिया। मेरे मुख से ‘आआहहह’ की हल्की सी चीख निकल गई।

रोहन ने फिर अपने धक्कों से मेरी चुदाई शुरू कर दी उसका लण्ड मेरी चूत में अब हल्का हल्का सा दर्द पैदा कर रहा था पर मैं इस सब से बेफिक्र अपने बेटे की खुशी के लिए उससे चुद रही थी।

रोहन के हाथ मेरी गांड पर थे और वो अब मेरी गांड को सहला और दबा रहा था।

मनीषा ने आज दो उंगलियों से मेरी गांड को चोदा था जिस वजह से मेरी गांड का छेद थोड़ा खुल गया था और शायद रोहन ने यह भी नोटिस कर लिया था।

लगातार चुदाई करने के साथ साथ उसने मेरी गांड के छेद पर थूक दिया और अपनी दो उंगलियों को थूक से गीला कर मेरी गांड में डालने लगा और उन्हें अंदर बाहर करने लगा।

पहले तो मुझे हल्का सा दर्द हुआ पर फिर दोनों उंगलियाँ आराम से मेरी गांड के अंदर बाहर होने लगी। रोहन अब अपने लण्ड से मेरी चूत को चोद रहा था और उंगलियों से मेरी गांड को।

मैं अभी भी अपनी दोहरी चुदाई की मस्ती में चीख रही थी, मेरी चीखें रोहन को और उत्तेजित कर रही थी- ओह… ओह माँ… ओह माँ! आहह… हायय… चोद मुझे… चोद अपनी मम्मी को… ऐसे ही मेरे लाल… चोद चोद.. मेरी चूत! और ज़ोर से… और ज़ोर से… चोद अपनी माँ की चूत को रोहन…

रोहन भी अब मस्ती में पूरे जोश के साथ चोदते हुए बोला- आआहह हहहह… मम्मी… आपको तो मैं कभी चोदे बिना नहीं रह पाऊँगा… आहह… आप जैसी सेक्सी माँ जिसके पास हो वो बहुत ही खुशनसीब होगा।

‘मम्मी… उम्ममम्म… आहहहह… मेरे पूरे लण्ड को अपनी चूत में ले लो… आहह… आई… लव… यू… मेरी प्यारी मम्मी… आमुआहहह…’

इसी तरह थोड़ी देर चुदाई करने के बाद मेरा बदन फिर से अकड़ने लगा और मैंने अपने शरीर को टाइट कर लिया जिससे रोहन का लण्ड मेरी चूत के अंदर दबाव बनाने लगा और रोहन ने फिर जोरों से धक्के देना शुरु कर दिए। वो अभी भी अपनी उंगलियों से मेरी गांड को चोद रहा था।

मैं अब फिर से झड़ने वाली थी तो उत्तेजना और दर्द के कारण चिल्लाने लगी- रुकना मत… रोहन… आआहहह… उफफफ्फ़… उफफफ्फ़… और अंदर तक… और ज़ोर से… चोद… मुझे… चोद मेरी चूत… चोद अपनी माँ की चूत… हे भगवान… हाए… हाए… उफफ्फ़… चोद अपनी माँ को… चोद डाल..

“हाय… मैं मरी… हा… हा… उफफ्फ़… कितना मोटा लण्ड है मेरे लाल का… लगा दे पूरा ज़ोर… मेरे बेटे… ऐसे ही चोद… उफ़फ्फ… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ… रोहन..’ और फिर मेरे शरीर ने झटके देना शुरू कर दिए।

मैं झड़ने लगी! तभी रोहन ने अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरी चूत पर मुँह लगा दिया और मैं रोहन के मुंह में ही झड़ने लगी। रोहन ने मेरा सारा पानी चाट चाटकर साफ कर दिया।

रोहन अभी तक नहीं झड़ा था तो वो फिर से मेरी चूत में लण्ड डालने लगा। ज्यादा चुदाई के कारण मेरी चूत में दर्द होने लगा था और मैं थक भी गई थी तो मैंने रोहन से कहा- रोहन, अब नहीं मुझे दर्द हो रहा है प्लीज…

तो रोहन बोला- पर मम्मी, अभी तक मेरा हुआ नहीं है। मैंने बोला- मैं तेरे लण्ड को चूस कर झड़ा देती हूँ।

पर वो मना करने लगा और बोला- मम्मी, मैं आपकी गांड में लण्ड डाल दूं? रोहन के मुख से यह सुनकर मुझे आलोक के साथ मेरी गांड की चुदाई याद आ गई जब मैं दर्द से बिलबिला उठी थी और रोने लगी थी।

मैंने रोहन से बोला- नहीं, मुझे नहीं डलवाना तेरा लण्ड अपनी गांड में, बहुत दर्द होता है! तो रोहन बोला- मम्मी, अगर आपको जरा भी दर्द होगा तो मैं लण्ड बाहर निकाल लूंगा और फिर आप मेरे लण्ड को मुंह में लेकर झड़ा देना।

रोहन ने मुझे बहुत समझाया पर मैंने उसे साफ मना कर दिया। मेरे मना करने से वो नाराज़ हो गया तो मैंने उसे हाँ बोल दिया और उससे बोला अगर ज्यादा दर्द हुआ तो मैं गांड में लण्ड नहीं डलवाऊंगी।

रोहन ने मेरी बात मान ली और तैयार हो गया।

इससे आगे की कहानी अगले भाग में!

आपको मेरी चूत चुदाई की कहानी कैसी लगी, आप अपने विचार मुझे मेल के जरिये भेज सकते हैं। पर निवेदन है कि आप कहानी से ही सम्बंधित विचार भेजें। धन्यवाद… [email protected]

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