मेरा गुप्त जीवन- 172

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जसबीर ने ही आगे बढ़ कर दरवाज़ा खोला तो यह देख कर हम सब डर के मारे सकते में आ गए क्योंकि वहाँ रोबदार बिमला मौसी जी खड़ी हम सब को घूर रही थी। मौसी जसबीर को धकेलते हुए अंदर आई और बड़ी खूंखार नज़रों से हम सबको देख रही थी, फिर शेर के दहाड़ने जैसी आवाज़ में पूछने लगी- यहाँ क्या हो रहा है लड़कियो?

जसबीर हकलाते हुए बोली- हम सोमू जी को अपना कमरा दिखाने के लिए लाये थे बस और कुछ नहीं?

मौसी और भी रोबदार आवाज़ में बोली- जानती हो तुम ने कितनी बड़ी गलती की है जस्सी? अगर किसी को पता चल जाता तो लड़के वालों और लड़की वालों पर क्या असर पड़ता? क्योंकि तुम सोमू को यहाँ लाई हो तो तुम ही बदनाम होती और सब तुमको खूब कोसते। चलो अच्छा हुआ मैं टाइम पर आ गई कुछ भी नहीं बिगड़ा अभी तक। चलो सब यहाँ से और फ़ौरन शादी की रस्मों में शामिल हो जाओ। जैसे ही शादी समाप्त होगी तब देखेंगे कैसे हालात बनते हैं।

मैं भी अपनी साथी लड़कियों के साथ बाहर जाने लगा लेकिन रोबीली मौसी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझको रोक लिया।

जब सब लड़कियाँ बाहर जा चुकी तो मौसी मेरी तरफ देख कर मुस्कराई और आगे बढ़ कर मुझको अपने गले से लगा लिया और मेरे लबों पर चुम्बनों की बौछार लगा दी और अपन हाथ मेरे लण्ड के ऊपर रख दिया और उसको धीरे धीरे मसलने लगी। दूसरे हाथ से उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी साड़ी के ऊपर से ही अपनी चूत पर रख दिया और खुद ही मेरे हाथ को चूत पर रगड़ने लगी।

मेरा लण्ड तो एकदम से खड़ा था, मौसी उसकी सख्ती महसूस कर रही थी और उसकी लम्बाई और मोटाई नाप रही थी। फिर वो मेरे कान में बोली- हथियार तो कातिलाना लगता है लेकिन देखना यह है कि कितनी देर तक मस्त रह सकता है।

मैंने भी उसी तरह मौसी के कान में कहा- मौसी जी, यह तो मस्त हाथी है जब तक आपकी कोमल चूत नहीं हार मानेगी यह तो वहाँ से निकलने का नाम नहीं लेगा। यह सोमू ठाकुर की गारंटी है।

मौसी ने अपनी मस्त आँखों में शराब घोलते हुए कहा- ऐसा है क्या? फिर तो इस लम्बे और मोटे केले को चखना ही पड़ेगा। चलो बाहर, फिर प्रोग्राम बनाती हूँ तुम्हारे जैसे मासूम लड़के का गौना कैसे किया जाए? यह कह कर मौसी मुझ को ले कर बाहर आ गई जहाँ वो चार हसीन और कोमल कलियाँ हमारा इंतज़ार कर रही थी।

उन चारों के चेहरे पर मौसी के रोब की छाया अभी भी कायम थी लेकिन मैं तो मौसी की आँखों में लण्ड की प्यास देख चुका था और उनके मन में एक मासूम अनजान और हैंडसम लड़के को चोदने का मौका व्यर्थ ना जाने देने की तीव्र इच्छा को महसूस कर चुका था।

यह इच्छा एक अधेड़ आदमी के मन में एक कमसिन से कामकला का खेल खेलने की इच्छा के समान ही थी जो अक्सर पुरुषों में देखी जा सकती है।

हम सब चल रहे थे लेकिन मौसी का एक हाथ मेरे चूतड़ों पर ही फिसल रहा था और मेरा भी एक हाथ जसबीर के गोल गदाज चूतड़ों पर धीरे से चल रहा था। यह छेड़ा छाड़ी सिर्फ अँधेरे गलियारे में हो रही थी लेकिन जैसे ही थोड़े प्रकाश वाले स्थान पर पहुँचते तो सब के हाथ अपनी मस्ती छोड़ देते।

उधर बरातियों के लिए भोजन परोसा जा रहा था, मैं, ऊषा और शशि एक टेबल पर बैठ गए और साथ ही सामने की तरफ जस्सी और उसकी सहेली बैठ गई। मौसी भी कुछ अधेड़ उम्र की औरतों के साथ बैठ गई थी लेकिन उनकी नज़र हर वक्त मेरे ऊपर ही थी। तकरीबन सब जवान लड़के और लड़कियों का तबका मेरे ऊपर ही नज़र टिकाये हुए था।

खाने के दौरान मेरे सामने जस्सी बैठी थी और उसकी बगल में दो बड़ी सुंदर लड़कियाँ बैठी हुई थी, वो मुझको हर मौके पर घूरने की कोशिश करती थी और साथ ही हल्के से मुस्कराती भी थी। मैंने कुछ ख़ास ध्यान नहीं दिया लेकिन थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि किसी का पाँव मेरी टांग से छू रहा था।

थोड़ी देर बाद ऐसा लगा कि वही पाँव अब मेरे लण्ड को पैंट के बाहर से छू रहा है। मैंने भी एक हाथ टेबल पर पड़े कपड़े के नीचे करके उस पाँव को छूना शुरू कर दिया और उसकी मालिकन से आँखें मिलाने की कोशिश करने लगा लेकिन बहुत प्रयत्न करने के बाद भी मैं समझ नहीं पाया कि वो पाँव किसका है।

खाना खत्म होने के बाद हमको लेकर जस्सी और उसकी सहेली दूल्हा दुल्हन से मिलवाने ले गई जहाँ ताऊ जी और ताई जी बैठे हुए थे। मैंने उनको भैया की शादी की मुबारकबाद दी और मम्मी जी के दिये हुए शगुन के पैसे ताई जी को दे दिए।

दोनों ही बड़े खुश हुए और ताऊ जी बोले- सोमू अब काफी बड़ा हो गया है। बड़ा अच्छा होता अगर तुम्हारे पापा भी आ जाते लेकिन मैं उनकी मजबूरी समझता हूँ। तब ताई जी बोली- देखो लड़कियो, सोमू का रात का सोने का इंतज़ाम करने के लिए मौसी जी को कह दिया है, वो इसका ख्याल रखेंगी। तुम इनको मौसी जी के पास ले जाओ।

जसबीर और उसकी मोटी सहेली मुझको मौसी जी के पास ले गए, मुझको देखते ही उनकी बांछें खिल गई और वो झट से मुझको और लड़कियों को लेकर पिछवाड़े के एक बहुत ही अच्छे सुसज्जित कमरे में ले गई।

वहाँ मौसी जी ने जसबीर और उसकी सहेली को विदा कर दिया और मुझको लेकर वो उस कमरे में विराजमान हो गई। थोड़ी देर बाद उन्होंने वो कमरा अंदर से बंद कर लिया और मेरे पास आकर एक बहुत ही कसी जफ्फी में बाँध लिया।

मौसी के बारे में बता दूँ: वो बहुत ही सुंदर और सुघड़ औरत नज़र आ रही थी। लाल साड़ी और उसी रंग के ब्लाउज में उनका थोड़ा मोटा शरीर बड़ा ही सेक्सी लग रहा था और मैंने उनके लबों को चूमते हुए उनको यह कह दिया। मौसी बेहद खुश हुई और जल्दी से मुझसे लिपटना और चूमना शुरू कर दिया, फिर जल्दी ही उन्होंने मेरे कपड़े भी उतार दिए और मैंने भी साथ ही साथ उनके साडी ब्लाउज और पेटीकोट को उतार दिया।

मौसी को नग्न अवस्था में देखकर मुझको बड़ा ही जोश आया और मेरा लौड़ा टन से खड़ा हो गया था और हवा में लहराने लगा। मौसी ने लपक कर उसको अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और मैंने भी उनकी बालों से भरी चूत से खेलना शुरू कर दिया। उनकी चूत पानी से बुरी तरह से तरबतर हो रही थी और मेरे लौड़े के अंदर प्रवेश का ही इंतज़ार कर रही थी।

मौसी लौड़े को चूसने के बाद मेरे अंडकोष के साथ भी खेली और वो मुझको धकेलती हुई पलंग पर ले गई, खुद टांगें चौड़ी करके लेट गई और मुझको खींच कर अपनी खुली टांगों में बिठा लिया। लेटते ही मौसी ज़रा भारी आवाज़ में बोली- सोमू राजा, चोद दे मुझको आज जी भर के। मैं तो लण्ड के लिए तड़प रही हूँ ना जाने कब से।

‘उफ्फ!’ ना जाने क्या हुआ मेरा लोहे के समान अकड़ा हुआ लण्ड एकदम से ढीला पड़ गया और फिर बैठ सा गया। मौसी लण्ड को पकड़ने की कोशिश कर रही थी लेकिन वो तो पूरी तरह से बैठा हुआ था।

मौसी तो पहले हैरान हुई क्यूँ कि उन्होंने मेरे खड़े लण्ड को हवा में झूलते हुए देखा था लेकिन अब जब हाथ लगाया तो वो एकदम ढीला और मुरझाया हुआ था। मौसी भी हैरान और मैं भी परेशान क्योंकि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था।

फिर मौसी ने लेटे हुए ही मेरे लण्ड को मुंह में ले कर फिर चूसना किया और उसके ऐसा करते ही वो फिर से अकड़ गया और मौसी के हाथ में हिलोरें मारने लगा। मौसी बोली- जल्दी कर सोमू डाल दे ससुर को चूत में… कहीं फिर ना बैठ जाए।

जैसे ही मैं लौड़े को लेकर उनकी चूत के मुंह पर रखने लगा तो वो फिर सिकुड कर छोटा हो गया। इससे पहले कि मौसी कुछ बोलती, मैं उनकी जांघों में बैठ कर उसकी चूत का रसपान करने लगा और अपनी जीभ और मुंह के जलवे उनको दिखाने लगा।

मैं मौसी की चूत को चूस तो रहा था लेकिन मेरा ध्यान मेरे लण्ड पर केंद्रित था जो अब फिर धीरे धीरे से खड़ा होना शुरू हो गया था।

मौसी की चूत की मुंह की चुसाई से एक बार बड़ा ही तीव्र स्खलन करने के बाद मैं फिर उनकी रसीली चूत में लण्ड डालने लगा कि मौसी फिर बोल पड़ी- जल्दी कर सोमू राजा, अब और ना तरसा, लण्ड का खेल दिखा ना?

अब फिर वही हुआ, मेरा अच्छा खासा खड़ा लण्ड फिर से मुरझा गया।

मैं एकदम परेशान हो गया क्योंकि ऐसा मेरे साथ कभी नहीं हुआ था, मैं हैरत में पड़ गया था और समझ नहीं पा रहा था कि यह सब कैसे और क्यों हो रहा था।

अब तो मैं मायूस हो कर पर पलंग पर मुंह लटका कर बैठ गया। मेरी दशा बड़ी ही दयनीय हो गई थी और मेरी गुरु कम्मो भी मेरे साथ नहीं थी जिससे इस समस्या का हल ढूंढ लेता।

मौसी भी मुंह लटका कर बैठी थी और शायद यही सोच रही थी कि यह हैंडसम लौंडा तो फेल हो गया चुदाई के मैदान में। ‘उफ्फ अब क्या करूं?’ मैं बड़ी गहरी सोच में डूब गया था।

उधर मौसी भी काफी परेशान लग रही थी और बार बार मेरे लण्ड को हाथ में ले कर मुठी मार कर उस को खड़ा करने की बेकार कोशिश कर रही थी।

हम दोनों सोच में डूबे ही थे कि इतने में कमरे का दरवाज़ा खटका और जसबीर की आवाज़ आई- आंटी ज़रा दरवाज़ा खोलना प्लीज। मैं झट से अपने कपड़े पहनने लगा लेकिन मौसी ने इशारे से मुझ को रोक दिया और खुद अपना पेटीकोट अपने आगे रख कर दरवाज़ा खोल दिया। जसबीर एकदम अंदर आई और फिर झट से दरवाज़ा बंद कर दिया।

उसने हम दोनों को ध्यान से देखा और हमारे चेहरे पर साफ़ दिख रही उदासी को समझ गई। वो जल्दी से मेरे पास आई और मुझको होटों पर चूमने लगी। उसके ऐसा करते ही मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया और हिलौरें मारने लगा।

यह देख कर मौसी मेरी तरफ बढ़ने लगी ही थी कि जसबीर ने उन को रोक दिया और उनके कान में कुछ कहा और स्वयं अपने कपड़े उतारती हुई मेरे निकट आ गई।

जसबीर काफी सुंदर शरीर की मालकिन थी और उसके गोल शानदार मम्मे और एकदम गोरे गद्देदार चूतड़ों को देखते ही मन में काम वासना तीव्र हो गई। जसबीर के कामुक शरीर को देखते ही मेरा लण्ड मस्ती में आ गया और हवा में हिलहिलाते हुए लहलहाने लगा।

मैंने झट से आगे बढ़ कर जस्सी के लबों को चूमते हुए उसको पलंग के साथ खड़ा किया और पीछे से उसकी उभरी हुई चूत के मुंह पर लण्ड को टिका दिया और जस्सी से पूछा- क्यों जस्सी, इस ससुर को अंदर डालूँ क्या?

और फिर जस्सी की हाँ की इंतज़ार किये बिना ही मैंने अपने लण्ड को धीरे धीरे से जस्सी की बहुत टाइट चूत में डालना शुरू कर दिया।

मोटे और लम्बे लण्ड के अंदर जाते ही जसबीर एकदम ‘आह ओह्ह…’ करने लगी और खुद ही अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी।

मौसी भी अब हमारे पास आ कर खड़ी हो गई और मेरे लण्ड को जस्सी की चूत में अंदर बाहर होते हुए देखते रही, फिर हाथ लगा कर मेरे टनाटन लौड़े को महसूस करने लगी क्योंकि उसको यकीन नहीं हो रहा था कि जो लण्ड उस के सामने फेल हो गया था वो कैसे हुंकारें मार मार कर सख्त चुदाई कर रहा था।

मेरी तेज़ चुदाई के सामने जस्सी जल्दी ही ढेर हो गई और अब मैंने उसको अपने ऊपर बिठा कर उससे अपने आप को चुदवाया और जस्सी की चुदाई की भूख और उसकी चतुरता के कारण वो फिर एक बार काफी तीव्र स्खलन को प्राप्त हो गई।

मैंने जस्सी के कान में अपनी समस्या बताई, वो उसको झट समझ गई और मुझ से धैर्य रखने के लिए कहने लगी। अब मैं वहाँ से उठा तो मौसी एकदम सामने खड़ी थी और अपनी चूत में ऊँगली से भग को मसल रही थी और उनके दिल में उठ रही लण्ड की चाहत को मैंने अच्छी तरह से पहचान लिया।

जस्सी ने मौसी के पीछे खड़े होकर उनको चूमने और चाटने के लिए इशारा किया। मैंने अब मौसी को अपनी बलिष्ठ बाहों में बाँध लिया और उनको खूब जम कर उनके लबों पर चूमना और चाटना शुरू कर दिया।

मौसी को थोड़ी देर खूब चूमा चाटा और खासतौर से उनके गोल मोटे मम्मों को और उनकी चूचियों को मुंह में लेकर खूब चूसा।

मौसी अब मेरे खड़े लौड़े को अपने सारे जिस्म पर महसूस कर रही थी और जब मैंने देखा कि मौसी की चूत में फिर से उबाल आ गया है तो मैंने मौसी को घोड़ी बना कर उनके चेहरे को आगे की तरफ करके मैंने अपने खूब कड़क लौड़े के साथ उस की चूत पर हमला कर दिया।

मौसी की चूत बेहद पनिया रही थी और मेरे लोहे की सलाख के समान सख्त और तपते हुए लण्ड को धीरे से अंदर जाते हुए उसने महसूस किया और काफी समय से काम वासना से ग्रसित मौसी एकदम से जोश में आ गई और उनके मुंह से एक बहुत ही कामुक ‘आहा…’ निकल गई।

मौसी अब उछल उछल कर मेरे लण्ड पर आगे पीछे हो रही थी और मेरे साथ चुदाई का पूरा आनन्द ले रही थी। फिर वो हालत आ गई कि मौसी पूर्ण गति से आगे पीछे होने लगी और चंद मिनटों में ही वो तीव्र स्खलित हो गई।

मैंने जस्सी को इशारा किया कि मौसी को कुछ भी बोलने से रोकना नहीं तो फिर मैं उनको चोद नहीं पाऊंगा।

अब मैंने मौसी के गोल और चौड़े चूतड़ों को उठा कर उनको सीधा लिटा दिया और उनकी जांघों में बैठ कर पूरी ताकत से मैं चोदने लगा। मेरे दोनों हाथ मौसी के चूतड़ों के नीचे रखे हुए थे और मौसी की चूत एकदम मेरे लौड़े की सीध में आ गई थी और मेरी तेज़ रफ़्तार चुदाई से मौसी की चूत में स्थित उनकी गर्भदानी पर मेरा लण्ड बार बार टकरा रहा था।

अब मैं मौसी के लबों पर चूमते हुए और कभी उनके मम्मों के चूचुकों को चूसते हुए मौसी को बार बार छूटने की कगार पर लाकर फिर चुदाई स्पीड को कंट्रोल करके फिर वापस भेज देता था।

अब मौसी को अतीव आनन्द की अनुभूति हो रही थी और वो मेरी चुदाई के कारण 3-4 बार छुट चुकी थी और उनके चेहरे से पूर्ण तृप्ति झलक रही थी। फिर भी मैं कई आसन बदल बदल कर मौसी का चोदन कर रहा था ताकि उनको मेरे खिलाफ कोई शिकायत ना रहे।

कोई आधे घंटे की चुदाई के बाद मौसी बोली- बस करो सोमू लल्ला… अब और नहीं सहन होता तेरे प्यारे लण्ड का यह रौद्र रूप।

मैं चुदाई करते हुए रुक गया और जस्सी की तरफ देखने लगा, उसने भी इशारा किया कि लगे रहो जब तक मौसी हाथ नहीं जोड़ती।

अब मैंने मौसी को अपनी गोद में बिठा लिया, उनकी दोनों जांघें अपनी कमर के चारों और फैला दी और अपने अकड़े हुए लौड़े को पूरी ताकत से मौसी की चूत के अंदर बाहर करने लगा।

इस पोज़ में मौसी के मम्मे मेरी छाती में समाये हुए थे और उनकी गोल गुदाज जांघें मेरी कमर का हार बनी हुई थी। मेरे लण्ड की फुल स्पीड से चूत में से सफ़ेद झाग की तरह का तरल पदार्थ निकल कर मेरे लण्ड को एकदम सफ़ेद बना रहा था।

जस्सी ने मौसी को दिखा कर चूत पर छाया वो सफ़ेद फोम नुमा पदार्थ एक कपड़े से साफ़ कर दिया। अब मौसी अपनी टांगें सिकोड़ने लगी और मुझको हाथों से परे करने लगी और बुदबुदा कर कहने लगी- बस करो सोमू सांड, मेरी चूत का तो हलवा बना दिया है तुमने… अब तो चलने में भी मुश्किल होगी।

जस्सी के कहने पर मैंने मौसी को छोड़ दिया और अपने खड़े लण्ड को लेकर जस्सी के चारों तरफ घूमने लगा।

लेकिन जस्सी ने कहा- सोमू रुको कुछ देर! मैं अपनी बाकी की दो सहेलियों को बुला लाती हूँ। तुम उनका भी काम कर दो प्लीज। क्यों मौसी, रिया और चांदनी को भी बुला लाती हूँ अगर आप इजाज़त दें तो? यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मौसी ने अपना सर हाँ में हिला दिया और जस्सी अपने कपड़े पहन कर कमरे से बाहर चली गई।

जैसे ही मैं मुड़ा मौसी ने अपने पास आने के लिए इशारा किया।

जब मैं उनके पास पहुँचा तो मौसी ने लेटे हुए ही मेरे खड़े लण्ड को अपने हाथ में पकड़ लिया और वो मुझसे पूछने लगी- सोमू, सच बताना, तुम्हारा लण्ड मेरे सामने बार बार क्यों बैठ रहा था? क्या मेरी उम्र के कारण या फिर कोई और कारण था?

मैं कुछ देर सोचता रहा और फिर बोला- मौसी, आपकी उम्र के कारण मेरा लण्ड नहीं बैठ रहा था बल्कि आपकी धाकड़ आवाज़ से डर के कारण मेरा लण्ड बैठ रहा था। आपकी आवाज़ बड़ी रोबीली है ना तो उसके डर के मारे मेरा लण्ड लाल आपके सामने सर नहीं उठा पा रहा था, बेचारा सर झुकाए ही आपके हज़ूर में बैठा रहा।

मौसी हल्के से मुस्करा दी और बड़े ही प्यारे अंदाज़ में बोली- क्यों बे साले, तू भी धाकड़ मौसी से डर गया रे? जैसे तेरे मौसा जी डरते हैं? अब समझ आया कि तेरे मौसा जी भी मेरे डर से मुझको चोद नहीं पाते है शायद? अब मुझको अपना रवैया बदलना पड़ेगा। तुम्हारे मौसा जी को प्यार से ही मैं पा सकती हूँ, रोब से या फिर गुस्से से नहीं। थैंक यू सोमू राजा, तुमने मेरी आँखें खोल दी।

हम बातें कर ही रहे थे कि जसबीर हलके से भिड़े दरवाज़े को खोल कर अपनी सहेलियों के साथ अंदर आ गई। जसबीर के साथ आई लड़कियाँ वही थी जो मेरे सामने बैठी थी खाना खाते हुए और जो मुझसे पैरों से छेड़ छाड़ कर रही थी।

कहानी जारी रहेगी। [email protected]।com

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