मेरा गुप्त जीवन- 165

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शाम सिंह जी नीचे उतर आये और मैं यह देख कर हैरान हो गया कि उनकी पैंट के बटन खुले हुए थे और उनका लंड पैंट से निकल कर बाहर लटक रहा था। सबसे ज़्यादा हैरानगी की बात तो यह थी कि रितु भाभी ज़रा भी घबराई नहीं थी और वो हल्के से मुस्करा रही थी।

मैं हैरानी से दोनों को देख रहा था, तभी शाम सिंह जी बोले- वाह सोमू राजा, क्या चुदाई करते हो? माशाल्लाह बहुत खूब! एक बार मेरे सामने भी रितु की चुदाई करो न प्लीज! मैं डर के मारे और पीछे होने लगा लेकिन तब देखा कि रितु भाभी अपनी साड़ी उतारने लगी और ब्लाउज उतार कर वो मेरे निकट आ गई और अपने पेटीकोट का नाड़ा मुझको थमाते हुए बोली- उतार दो सोमू ठाकुर, इसको भी उतार दो! इस साले को मज़ा ही नहीं आएगा जब तक यह मुझको तुमसे चुदते नहीं देख लेगा। साला अफीमची ठाकुर है, यह खुद तो कुछ कर नहीं सकता, दूसरों को करते देख कर इस को बड़ा आनन्द आता है… चोदो मुझको खुले आम चोदना सोमू यार!

मैं बुत बना बैठा रहा और विस्फरित नेत्रों से यह सब कुछ देख रहा था। तब शाम सिंह जैसे नींद से जगा हो, उठ कर रितु के पास गया और खींच के एक झापड़ उसके गालों पर मार दिया। यह देख कर मुझ को बड़ा ही क्रोध आया और मैं ने उठ कर शाम सिंह का हाथ पकड़ लिया और उस को जबरदस्ती अपनी सीट पर बिठा दिया।

रितु झट बोल पड़ी- सोमू, तुम रहने दो, हमारे बीच न पड़ो! ओए ठाकुर, तुम क्या चाहते हो अब? शाम सिंह गुस्से से बोला- तुमको चुदती हुई देखना चाहता हूँ? रितु भी गुस्से में बोली- तो क्या अभी तक ऊपर से देख नहीं रहे थे क्या? शाम सिंह हँसते हुए बोला- तुम तो जानती हो, गोली अंदर जाते ही मैं कई घंटे होश में नहीं होता। मैंने ऊपर से कुछ नहीं देखा।

अब रितु मुझ से अनुरोध करने लगी कि एक बार फिर मैं उसको चोद दूं। शाम सिंह बोला- सोमू, तुमको भी अपने सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे। मैं घूरते हुए शाम सिंह को देखने लगा लेकिन फिर रितु ने आँखों ही आँखों में मुझ से इल्तजा की और मैं रितु भाभी की खातिर मान गया।

सारे कपड़े उतारने के बाद भी मेरा लंड खड़ा नहीं हुआ, वो शायद मेरे अंदर शाम सिंह के प्रति घृणा और क्रोध के कारण था। रितु ने झुक कर मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगी।

पांच मिनट में ही मेरा लंड पुनः खड़ा हो गया, मैंने रितु भाभी को सीट के किनारे खड़ा किया और पीछे से उनकी चूत में लंड पेल दिया, पहले धीरे और फिर आहिस्ता से तेज़ी में लाते हुए मैं रितु भाभी को चोदने लगा। उधर शाम सिंह ने भी पैंट से अपना लौड़ा निकाल लिया था और धीरे धीरे मुठ मारने लगा था।

रितु भाभी के मोटे मम्मों को मैं पकड़ कर हल्के से मसल रहा था और उसके चूचुकों को उंगलियों में गोल गोल घुमा रहा था। जैसे ही मैंने चुदाई की स्पीड तेज़ की, शाम सिंह भी अपने बैठे हुए लौड़े के साथ तेज़ी करने लगा।

और अब जब मैंने रितु भाभी के चूतड़ों को अपने हाथ में पकड़ कर ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी तो शाम सिंह ने भी जल्दी से अपने लौड़े पर हाथ मारने शुरू कर दिए और जैसे ही भाभी के छूटने के आसार सामने आने लगे, मैंने भी लंड पिलाई अत्यन्त तेज़ कर दी।

कुछ देर में ही भाभी ज़ोरदार अकड़न और कंपकंपी के साथ झड़ गई और जैसे ही भाभी का स्खलन हुआ, शाम सिंह ने भी अपने लंड को भाभी के मम्मों के ऊपर रख कर ज़ोरदार पानी जैसे रंग वाली पिचकारी छोड़ दी। भाभी ने गहरी नफरत से अपना मुंह दूसरी तरफ फेर लिया।

यह सब मुझसे देखा नहीं जा रहा था लेकिन मैं अपने गुस्से पर काबू कर के चुप बैठा रहा और रितु भाभी के उदासी से भरे हुए चेहरे को देखता रहा। ठाकुर शाम सिंह मेरे पास आया और मुझ से हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगने लगा और बोला- भैया मुझको माफ़ कर देना, कभी कभी नशे की हालत में मैं अपने पर काबू नहीं रख पाता। अब मैं फिर सोने जा रहा हूँ ऊपर की बर्थ पर… दिल्ली के आने से पहले मुझ जगा अवश्य देना। यह कह कर ठाकुर साहिब फिर ऊपर की बर्थ पर चढ़ कर सो गए।

रितु भाभी नंगी ही सर झुकाए बैठी हुई थी अपनी सीट पर… मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी नंगा ही उठ कर उनके साथ बैठ गया। भाभी थोड़ी देर सोचती रही और फिर मेरे मोटे लंड के साथ खेलने लगी और मैं भी उनके मम्मों को सहलाने लगा। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

थोड़ी देर बाद रितु भाभी ने मेरा हाथ अपनी चूत पर रख दिया जो उस वक्त भी खूब गीली हो रही थी। मैं सीट पर बैठ गया और भाभी को अपनी गोद में बिठा कर चोदने लगा। भाभी ने दोनों हाथ मेरी गर्दन में डाल रखे थे और अपने मम्मों को मेरी छाती से जोड़ रखा था जिससे वो एकदम वहाँ गायब हो गए लगते थे।

भाभी बड़ी कामुक हो रही थी, वो काफी तेज़ी से मुझको झूले की तरह आगे पीछे होते हुए चोद रही थी। जब भाभी का पानी फिर एक बार छूटा तो उसने मस्त तरीके से मुझको चूमा और मेरे होटों को हल्के से काट लिया और उसमें से निकलते हुए खून को भी वो चाट गई।

अब मैं अपनी सीट पर आया, अपने कपड़े पहन लिए और अपने बेड पर लेट गया। देखा कि भाभी भी पूरी तरह से कपड़े पहन कर अपने बिस्तर पर लेट गई थी।

सुबह करीब 7 बजे जब नींद खुली तो गाड़ी दिल्ली पहुँचने वाली ही थी। अपना होल्डाल बांधते हुए मैं तैयार हो गया और तभी शाम सिंह जी ने पूछा- क्यों भैया जी, आप कहाँ जायेंगे दिल्ली में?

मैंने जेब से एड्रेस का कागज़ निकाला और बोला- करोल बाग जाना है मुझको… आप लोग किस तरफ जा रहे हैं? शाम सिंह जो बोले- अरे हम ने भी करोल बाग़ ही जाना है! वहाँ किसके यहाँ जाना है तुमको? मैंने एड्रेस का कागज़ फिर पढ़ते हुए कहा- ठाकुर सूर्यवंशी के यहाँ जाना है मुझको!

शाम सिंह जी अब हँसते हुए बोले- वाह सोमू भैया, हमने भी वहीँ जाना है, आपकी क्या रिश्तेदारी है उनसे? मैं बोला- वो मेरे चाचा जी हैं! और आपकी क्या रिश्तेदारी है उनसे? शाम सिंह जी बोले- हमारे भी दूर के रिश्ते में मामा लगते हैं।

रितु भी हँसते हुए बोली- बहुत अच्छे, कुछ दिन और सोमू के साथ गुज़ारने को मिल जाएंगे। मामा जी के घर में मुझको सब जानते हैं और तुम मेरे साथ ही रहना… ठीक है? मैं भी मुस्कराते हुए बोला- ठीक है भाभी, आप ही मेरी रक्षा करना नई जगह और नए घर में!

स्टेशन से बाहर निकल कर हमने एक ही टैक्सी कर ली और करोलबाग पहुँच गए। वहाँ हमारा भव्य स्वागत हुआ, चाचा जी ने मुझको गले लगाया और सबसे कहा- देखो यह भुवनेश्वर का लड़का है। क्या कद काठी है, यह लगता है असली सूर्यवंशी ठाकुर! फ़िर मुझसे कहा- तुम्हारे पिताजी की चिठ्ठी मिल गई थी, अच्छा किया जो तुम आ गए, बड़ी ख़ुशी हुई तुम से मिल कर!

फ़िर जोर से आवाज लगा कर- अरे लड़को, ले जाओ इन सबको और ऊपर ठहरा दो! अच्छी तरह देख भाल करना इन सबकी! मेरा और शाम जी का सामान लड़के उठा कर ऊपर कमरे में ले गए, वहाँ दो पलंग बिछे थे, एक में मेरा सामान रख दिया और दुसरे में शाम सिंह जी का! रितु भाभी तो आते जाते कई बार मेरे चूतड़ों पर हाथ लगा गई थी। खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आ कर लेट गया और जल्दी ही मेरी आँख लग गई।

थोड़ी देर बाद मुझको महसूस हुआ कि मेरे साथ कोई लेटा है, मैंने एक आँख खोल कर देखने की कोशिश की तो देखा कि मेरी दोनों तरफ साड़ी पहनी हुई औरतें हैं जिनके साड़ी पेटीकोट ऊपर को उठे हुए थे और उन दोनों के हाथ मेरे खड़े लौड़े के साथ खेल में मग्न थे। मैंने थोड़ा उठ कर देखा तो मेरे एक तरफ रितु भाभी थी और दूसरी तरफ कोई अंजान औरत थी।

मेरी पैंट के बटन खुले हुए थे और मेरा लंड हवा में हिनहिना रहा था, दूसरी औरत बड़ी ही मस्ती से मेरे लंड के साथ खेल रही थी। मैंने अपने लंड को हाथ लगाया तो वो एकदम गीला हो रहा था जैसे अभी चूत से निकला हो।

अब मुझको समझ आया कि मेरा तो चोदन इन दोनों औरतों ने दिन में ही कर दिया था। मैंने अब अपनी दूसरी तरफ रितु भाभी को देखा जो अपनी साड़ी उठाये मेरे साथ सोई थी और जब मैंने उसकी चूत को हाथ लगाया तो वो भी बहुत पनिया रही थी।

इधर वाली भाभी बोली- सॉरी लल्ला, तुमको जगाया नहीं क्यूंकि तुम बहुत गहरी नींद में सोये थे। मैं थोड़े गुस्से में बोला- आप कौन? भाभी मुस्करा कर बोली- मैं तुम्हारी रानी भाभी हूँ, तुम्हारे छोटे वाले भैया की बीवी। क्या मस्त लड़के हो सोमू तुम तो ! क्या मैंने तुम को चोदा है और तुम को ज़रा भी पता नहीं चला?? वैसे जैसे ही रितु ने बताया कि तुमने पिक्चर में डांसर का काम किया है और खूब सेक्सी डांस किया है तब से हम सब तुम्हारी फैंस बन गई हैं।

मैं बोला- भाभी क्या आप को डर नहीं लगा कि मैं उठ कर शोर मचा दूंगा? रानी भाभी मुस्कराते हुए बोली- नहीं रे, रितु ने बता दिया था कि तुम बड़े शरीफ लड़के हो और तुम कतई बुरा नहीं मानोगे। क्यों ठीक है ना? मैं थोड़ा मुस्करा दिया और अब ध्यान से रानी भाभी को देखने लगा, चेहरा तो खूबसूरत था ही, साथ में खूब मोटे स्तन और सफ़ेद पेट और सॉलिड गोल चूतड़ों को देख कर मेरा लौड़ा रानी भाभी की चूत में प्रवेश करने के लिए बेताब हो रहा था।

मैंने रानी भाभी को सीधा लिटा दिया और उनकी जांघों को चौड़ा करके मैं उनके ऊपर छा गया और अपने सॉलिड लंड को उबलती हुई चूत में डाल दिया। चूत इतनी ज़्यादा पानी की वजह से फिसलनी हो रही थी कि एक ही धक्के में लंड पूरा अंदर चला गया और भाभी ने अपनी टांगें सिकोड़ कर मेरी कमर के इर्द गिर्द लपेट दी और खूब मज़े से चुदवाने लगी।

भाभी की उम्र यही कोई 22-23 की होगी लेकिन ज़्यादा ना चुदे होने के कारण वो मस्ती भरी टाइट चूत की मालकिन थी। अब मैं भाभी के लबों को चूमते हुए कभी धीरे और कभी तेज़ चुदाई में लग गया। मेरे होंठ भाभी के सॉलिड मम्मों को भी चूस रहे थे और उसकी चूत की लंड पर पकड़ को भी महसूस कर रहे थे।

जब मैंने भाभी के चूतड़ों के नीचे अपने हाथ रख कर लंड से धक्के मारने शुरू किये तो मेरा लंड चूत की तह तक जा रहा था और भाभी हर धक्के से उत्तेजित होकर अपनी कमर को ऊपर उठा कर लंड का स्वागत कर रही थी। इस पोजीशन की चुदाई गर्भ स्थापन के लिए अति उत्तम होती है लेकिन भाभी ने इस काम के लिए कोई आग्रह नहीं किया था तो मैं उन को बगैर अपना छुटाए चोदता रहा।

थोड़ी देर की धुआंदार चुदाई के बाद भाभी पूरी तरह से स्खलित हो गई और अपने मम्मों को मेरी छाती से जोड़ कर मुझ से पूरी तरह से चिपक गई। मैं अभी भाभी के ऊपर से उतरा भी नहीं था कि कमरे का दरवाज़ा खटका और मैं जल्दी से दूसरे पलंग पर जा कर लेट गया और सोने का नाटक करने लगा।

रानी भाभी ने अपनी और रितु भाभी की साड़ी ठीक कर के दरवाज़ा खोल दिया। एक बड़ी ही शौख़ और चंचल लड़की अंदर घुस आई और गुस्से से बोली- रानी भाभी लेट रही हो, और वहाँ अम्मा तुम को ढूंढ ढूंढ कर थक गई हैं। रानी भाभी झट से उस लड़की के साथ बाहर निकल गई।

थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम में घुसा और कुछ गर्मी लगने लगी तो सोचा नहा ही लेते हैं। तौलिया वहाँ पड़ा ही था सो निश्चिंत होकर मैं नहाने लगा। शावर के नीचे नहाने में मुझको बड़ा आनन्द आता था, मैं आँखें बंद कर के नहा रहा था कि अचानक मेरे कानों में किसी के मूतने की आवाज़ आई।

आँखें खोली तो देख कर हैरान रह गया कि वही शौख लड़की पॉट पर बैठी मूत रही थी और उसके बालों भरी चूत से गोल्डन धारा बड़ी तीव्र गति से बह रही थी।

कहानी जारी रहेगी। [email protected]

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