स्नेहल के कुंवारे बदन की सैर -2

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फिर थोड़ी देर बातें करने के बाद गुड नाईट विश करके उसे अभी जल्दी सोने और सुबह जल्दी तैयार होने के लिए कहा। मैं अगले दिन के ख्वाब सजाते सजाते सो गया। अगले दिन मैं अपने एक दोस्त की कार लेकर सुबह से उसके रूम के सामने उसका इन्तजार करने लगा।

अब आगे… लेकिन मैंने उसे बताया नहीं था कि मैं उसका इन्तजार कर रहा हूँ क्यूंकि मैं नहीं चाहता था कि आज वो सजने संवरने में कोई कमी छोड़े और नौ बजकर दस मिनट को वो अपने रूम से बाहर आई। वॉव… बस यही एक शब्द मेरे मुँह से निकल पाया… आज तो वो कहर ढा रही थी।

उसने आज काले रंग का जालीदार टॉप और स्किन कलर की जींस और सज कर तो ऐसे आई थी जैसे दुल्हन। जैसे ही वो रास्ते पे आई, मैं कार से उतरकर उसे बड़ी आवाज में लगभग चिल्लाते हुए विश किया। इससे वो थोड़ी घबरा गई क्यूँकि उसे इसकी उम्मीद ही नहीं थी।

फिर उसे कार में बिठाकर नाश्ता कराने के लिए ले गया, उसके बाद कॉलेज और फिर रात को मेरी रूम में सरप्राइज पार्टी थी। पार्टी में मैंने उसकी सारी सहेलियों को बुलाया था, वो इन सब बातों से मुझसे बहुत खुश थी और तो और उसकी सारी सहेलियाँ भी उसके सामने मेरी तारीफ कर रही थी।

केक काटने के बाद पार्टी में डांस सेशन के वक्त वो मेरी पार्टनर बनी और हमने एक बढ़िया डांस का प्रदर्शन किया सभी ने खूब तालियाँ बजाई और फिर धीरे धीरे सभी स्नेहल को गिफ्ट्स देकर विदा लेने लगे।

सभी जाने के बाद स्नेहल मेरे पास आई और मुझे गले लगाकर थैंक्स कहा, उस वक्त उसकी आँखों में नमी थी उसने कहा- इससे पहले ना तो मैंने ऐसा जन्मदिन देखा है और ना ही किया है। और वो बहुत खुश थी।

तभी मैंने उसे रोककर कहा- मेरा गिफ्ट तो लो पहले, बाद में थैंक्स कहना। तो वो कहने लगी- अब और क्या देने वाले हो? मुझे तो ऐसे लगा कि आज का दिन मैं जन्नत में हूँ।

तभी मैंने उसे आँखें बंद करने के लिए कहा और एक गुलाब के फूलों का गुच्छा हाथ में लेकर उसे आँखें खोलने को कहा और फिर एक पैर पर बैठ कर उसे प्रोपोज किया।

तो उसने कहा- आज तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया है और मैं तुम्हें ना कहूँ भी तो क्यूँ… उसके लिए एक भी वजह नहीं है। आय लव यू टू राज।

बस इतना सुनते ही मैंने उसे जोर से गले लगा लिया और उसके गाल पर एक चुम्बन किया। जैसे ही मैंने उसे गाल पर चूमा, वो शरमा गई और अपनी हथेलियों में अपना चेहरा छिपाने लगी। मैंने उसे कहा- मैंने तुम्हें आज इतना कुछ दिया है और तुम हो कि कुछ भी देने को तैयार नहीं हो? इस पर उसने कहा- मुझे शरम आती है, लेकिन तुम्हें जो लेना है, लो… मैं किसी भी बात के लिए तुम्हें मना नहीं करूंगी।

फिर तो मैंने उस पर चुम्मियों की बारिश की कर दी और बेतहाशा उसके गालों पर चूमने लगा। फिर मैं उसके चेहरे को उपर उठाकर उसके होंठों पर होंठ रखकर उसके होठों का रस पीने लगा। यह सब कुछ स्नेहल भी एन्जॉय कर रही थी।

अब उसके हाथ भी मेरे बाल और पीठ सहलाने में लगे थे। मैं मौके की नजाकत को समझकर उसे अपने बेडरूम में ले गया और वहाँ उसे बेड पर लिटाकर उसकी बगल में लेट गया।

हम दोनों की प्यास बढ़ती ही जा रही थी जिसे मिटाने के लिए हम एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे। अब मैंने धीरे धीरे अपने हाथों की कारीगरी दिखाना शुरू कर दिया और मेरे हाथ धीरे धीरे उसके बदन का नाप लेने में जुट गये। मेरे हाथ उसके पूरे बदन को सहला रहे थे, होंठ उसके होंठों से चिपके हुए थे और धीरे धीरे मैं उसके ऊपर होने लगा। फिर मैंने उसके बालों को पूरी तरह से आजाद कर दिया और एक एक करके उसने जितनी ज्वेलरी पहनी थी, सब निकाल कर एक तरफ़ में रख दी।

अब मैं उसके होंठों को अपने होंठों से आजाद करके एक बार उसकी आँखों में आँखें डालकर देखने लगा। तो उसने कहा- ऐसे क्या देख रहे हो? और अचानक रुक क्यूँ गये?

उसकी आँखों में एक अजब सा नशा था जिसमें मैं खो जाना चाहता था और उसकी आँखें भी मदहोश हो गई थी, ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझसे कह रही हो ‘आओ, इनमें डूब जाओ।’ मुझसे और ज्यादा देर रुका नहीं गया और मैं बिना कुछ बोले फिर से उसके होंठ चूसने लगा, कभी मैं उसका निचला होंठ चूसता तो कभी ऊपर का, अब वो भी किस करने में मेरा पूरा सहयोग दे रही थी, वो भी बीच बीच में मेरे होंठ अपने मुँह में लेकर चूसने लग जाती।

अब धीरे धीरे मैंने उसके स्तनों की मालिश करना शुरू की, बड़े ही मस्त चूचे थे मेरी प्यारी स्नेहल के, संतरे के साइज़ के चूचे थे उसके। धीरे धीरे मेरे हाथों का उसके स्तनों पर दबाव बढ़ने लगा और उसके साथ ही उसके मुंह से निकलती सिसकारियों की आवाज भी तेज हो रही थी। वो मेरे बालों को लगातार खींच रही थी और अचानक एक जोर की सिसकारी के साथ वह ढीली पड़ गई, मैं समझ गया कि अधिक उत्तेजना के कारण यह झड़ गई है।

लेकिन फिर भी मैंने चूमाचाटी जारी रखी जिसकी वजह से स्नेहल बहुत जल्द फिर से एक बार प्रेम के सागर में गोते लगाने के लिए तैयार थी। अब मैंने देर ना करते हुए उसका जालीदार टॉप उतार दिया अंदर से भी उसने काले रंग की ब्रा ही पहनी थी, ब्रा में उसके चूचे क्या लग रहे थे, जैसे किसी ने दो कबूतरों को पिंजरे में बंद कर दिया हो और वो कबूतर बाहर आने के लिए तरस रहे थे।

मैं ब्रा के उपर से ही उन्हें मसलने लगा, एक हाथ से उन्हें मसलते मसलते दूसरे हाथ से उसके पेट पर और जींस की बटन पर घुमा रहा था। फिर जींस के उपर से ही मैंने एक बार उसकी योनि को छुआ तो वो तड़फ उठी। फिर मैंने उसकी नाभि के आसपास सहलाना शुरू किया और उसकी गर्दन और कान को चूमने लगा। वो और भी गर्म होने लगी, तभी मैंने थोड़ा सा उठकर उसकी जींस का बटन भी खोल दिया तो उसने कहा- मेरी जींस उतारने से पहले अपने भी तो कुछ कपड़े उतारो ना राज..

तब मुझे पता चला कि मैंने तो अपने कपड़े उतारे ही नहीं… मैंने पहले अपना शर्ट पैंट और बनियान भी निकाल दी जिसकी वजह से मेरी अंडरवियर में से मेरे लंड का उभार साफ नजर आ रहा था। फिर जैसे ही मैं उसकी जींस निकालने लगा तो मैंने देखा कि वो एकटक बिना पलक झपकाए मेरे लंड की तरफ ही देखे जा रही थी, तो मैंने भी उसका एक हाथ लेकर अपने लौड़े पर रख दिया और उसके हाथ से अपने लंड पर थोड़ा दबाव दे दिया। फिर वो भी मजे लेकर मेरे लौड़े को सहलाने लगी और मैंने भी उसकी कमर से उसे चूमना चालू कर दिया और धीरे धीरे जींस को नीचे खिसकाने लगा।

जींस के साथ साथ ही मेरी चुम्बनों की बौछार भी नीचे की तरफ बढ़ने लगी जिससे वो और जोर जोर से सीत्कारने लगी। उसकी जींस का बटन खोलने के बाद मैंने उसे थोड़ा सा नीचे सरकाकर उसकी नाभि में अपनी जीभ घुसेड़ दी तो वो अपने हाथों से मेरे सर को नीचे को दबाने लगी। फिर मैंने जींस को और थोड़ा नीचे सरकाकर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी योनि को चूमा और उसकी आँखों में देखा तो वो सिर्फ कातिलाना मुस्कुराहट दे रही थी।

अब जैसे ही मैंने जींस को थोड़ा और नीचे किया तो उसकी मक्खन जैसी मुलायम जाँघें मेरे सामने थी, उन्हें देखकर मैं तो पागल ही हो गया। हाथ लगाने पर ऐसा लग रहा था कि मानो वो हाथ से फिसल ही जाएँगी। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

ऐसे ही चुम्बनों की बौछार करते करते मैंने उसकी पूरी जींस निकाल कर साइड में रख दी और एक नजर उसके पूरे जिस्म पर दौड़ाई तो ऐसा प्रतीत हुआ कि मानो किसी कारीगर ने संगमरमर की एक मूर्ति बनाई हो जिसे बनाने में कारीगर ने अपनी पूरी जिन्दगी लगा दी हो… इतनी सुंदर लग रही थी वो!

फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसे कहा- स्नेहल, आज अगर मैं इससे आगे बढ़ूँ तो तुम्हें कोई शिकायत तो नहीं होगी ना? कहानी जारी रहेगी। आपको मेरी कहानी कैसी लगी, जरूर बताइयेगा, आप अपनी प्रतिक्रिया मुझे यहाँ भेज सकते हैं… [email protected]

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