मेरी सुहागरात की चुदाई की यादें -1

दोस्तो, एक बार फिर आप सबके सामने आपका प्यारा शरद इलाहाबाद से एक नई कहानी के साथ हाजिर है। तो आप तैयार हैं ना इस नई कहानी को पढ़ने के लिये।

दोस्तो शादी…! शादी एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनकर ही आपके दिल में एक अजीब सी खुशी मिलती है और अरमान रूपी पक्षी अपने पंख फैला कर आसमान की सैर करने के लिये निकल पड़ता है क्योंकि एक लड़की आपके जीवन में और आपके दिल में एकाधिकार करने के लिये आ रही होती है और हम सब जो भी इस शादी के बंधन में बंधने जा रहे होते है, उसे बड़ी खुशी से अपने सारे अधिकार समर्पित कर देते है। और सबसे ज्यादा खुशी उस रात की होती है, जिसे हम सुहाग रात कहते है और उस पहली रात को सब जिन्दगी भर संजो कर रखते हैं।

तो दोस्तो, मैं भी अपनी सुहाग रात के बारे में आपको बताने जा रहा हूँ लेकिन इस कहानी में कुछ मिर्च मसाला और कल्पना के शब्द भी भरूँगा ताकि कहानी की रोचकता भी बनी रहे और आपको पढ़ने का भी मजा मिले, क्योंकि एक भारतीय होने के नाते मैं तो इतना जानता हूँ कि कोई भी युगल पहली रात अपनी मर्यादा को नहीं तोड़ता, चाहे वह क्यों न बहुत ही आधुनिक विचारों वाला हो या विचारों वाली हो।

मेरी भी शादी कानपुर की रहनी वाली एक अति सुन्दर लड़की जिसका नाम सुहाना है, के साथ तय हुई। सुहाना अपने माता-पिता की इकलौती लड़की थी, तो हमारी शादी बड़े ही धूमधाम से हुई। बरातियों ने और मेरे घर वालों ने बारात का खूब आनन्द लिया और खुशी-खुशी सभी रस्मों को निभाने के बाद हम लोग सुहाना को लेकर अपने घर की ओर चल दिये।

जिसने भी सुहाना को देखा, वो बस देखता ही रह गया। क्या औरत और क्या मर्द… सभी उसकी तारीफ के पुल बांधे जा रहे थे और कुछ तो ऐसे लोग थे कि ‘हूर को लंगूर मिल गया…’ कह कर मेरी खिंचाई कर रहे थे।

खैर घर पहुँच कर सभी रस्मों को निभाने के बाद मेरे जीवन की वो रात आई जिसका मुझे इंतजार था और शायद सुहाना को भी रहा होगा। किसी तरह औरतों और मर्दों के उपहास भरे तानों से बचते बचाते मैं अपने उस प्यारे कमरे में गया, जिसमें मेरा जीवन साथी मेरा इंतजार कर रहा था। अभी तक मैं अच्छा खासा था कि अचानक मेरे पैरों में कम्पन होने लगा, एक हल्की सी अन्तर्वेदना सी हो रही थी। आज से पहले कई लड़कियाँ मेरे सम्पर्क में आई और कभी भी मेरे साथ आज वाली स्थिति नहीं हुई थी, पर आज कुछ अलग था।

खैर किसी तरह जाकर मैं पलंग पर बैठ गया और सुहाना का हाथ अपने हाथों में लेकर उससे बात कर उसका भी नये घर के डर को निकालने की कोशिश कर रहा था। हम लोगों को बात करते करते काफी देर हो चुकी थी और सुहाना भी मुझसे धीरे धीरे खुल गई थी। अब मैं धीरे-धीरे उसके बदन को सहला रहा था और वो मेरे हाथ को सहला रही थी।

मैंने उससे धीरे से पूछा- तुम्हें क्या गिफ्ट चाहिये? तो वो बोली- जो आपको अच्छा लगे, आप दे दीजिए। ‘सोच लो…’ कहकर मैंने एक बहुत ही सेक्सी सी ब्रा-पैन्टी उसे दी।

ब्रा-पैन्टी हाथ में लेकर वो शर्माने लगी। ‘इसमें तुमको देखना चाहता हूँ।’

वो मेरी तरफ टकटकी लगा कर देखने लगी पर अपनी जगह से नहीं उठी। मैंने पूछा- क्या हुआ? तो बोली- शर्म आ रही है। मैंने हँसते हुए कहा- आज की रात ही होती इसलिये है कि जितनी शर्म हम दोनों के बीच है, वो सब दूर हो जाये। ‘अच्छा लो…’ कहकर मैंने अपने पूरे कपड़े चड्डी बनियान को छोड़कर उतार दिया और बोला- लो मैं भी टू पीस में आ गया हूँ और अब तुम भी टू पीस में आ जाओ।

उसको उस पैन्टी ब्रा में देखने की सोच कर मेरे लंड में तनाव आ रहा था, जिसके कारण वो सख्त होकर खड़ा हो गया और सुहाना की नजर मेरे लंड पर पड़ने लगी और चोरी चोरी वाले अंदाज में वो मेरे लंड को देखती, उसको इस तरह से मेरे लंड को देखना मुझे और भी रोमांचित कर रहा था। मैंने उससे पूछा- क्यों, क्या देख रही हो? सुहाना सकपका गई, ‘कुछ नहीं…’ कह कर उसने दूसरी तरफ मुँह कर लिया।

मैंने तुरन्त ही अपने बचे हुए कपड़े उतारे और ‘सुहाना!’ कहकर अपनी ओर आकर्षित किया और जैसे ही उसकी नजर मेरे तने हुए लंड पर पड़ी! ‘हाय दईया…’ कहकर उसने अपने खुले हुए मुँह पर हाथ रख लिया और अपनी आँखें बन्द कर ली। मुझे उसकी हर हरकत का मजा आ रहा था।

तभी मैंने उसे छेड़ने के लिये बोला- क्या हुआ, जिसको तुम चोरी चोरी देख रही थी, अब वो तुम्हारी नजर के सामने है, खुल कर देखो।

अभी भी वो अपने दोनों हाथों से अपने चेहरे को छुपा रही थी, मैंने उसके हाथ को अपने हाथ में लिया और धीरे से अपने लंड पर रख दिया। ‘हाय, यह तो बड़ा गर्म है!’ हाथ को हटाते हुए बोली। ‘तो क्या हुआ, इसको ठंडा करने के लिये तो तुम हो। अभी भी तुमने अपने कपड़े नहीं उतारे और मैं एकदम नंगा हूँ, यह अच्छी बात नहीं है। अच्छा लो, एक गिफ्ट मैं तुम्हें और देता हूँ!’ कहकर मैंने उसे सोने की बाली भी दे दी। सुहाना मेरी तरफ देखते हुए बोली- आप तो मुझे गिफ्ट दे रहे हैं और मेरे पास देने के लिये कुछ भी नहीं है।

‘क्या बात करती हो?’ मैंने उसे अपनी तरफ खींचा, मैं सीधा लेटा हुआ था, और वो मेरे सीने से लग गई और अपनी नजर मेरी तरफ करते हुए बोली- ऐसा क्या है जो मैं आपको गिफ्ट दूँ? ‘बस एक चीज का वादा करो!’ ‘कैसा वादा?’ वो बोली। मैंने कहा- हम जब भी बेडरूम में मिलें, हम दोनों के बीच कोई झिझक न हो और यही मेरा गिफ्ट होगा।

वो बिना कुछ बोले, अपने गहने उतारने लगी, और बेड से उतर कर एक-एक कर के अपने पूरे कपड़े उतार दिये, मेरे द्वारा दिये हुए ब्रा-पैन्टी को पहन लिया और पलंग पर खड़ी होकर बोली- जानू, यह इस बात का सबूत है कि आज के बाद मैं और आप जब भी इस कमरे में होंगे तो केवल जैसा आप चाहेगें वैसा ही होगा। ‘नहीं ऐसी बात नहीं है, तुम्हारा भी पूरा हक होगा कि तुम क्या चाहती हो!’ मैंने कहा। ‘तो जानू ठीक है, हम एक दूसरे की हर बात इस कमरे में खुल कर मानेंगे।’

उस अंधेरे कमरे में जिसमें केवल एक जीरो वाट का बल्ब जल रहा था, तो भी मेरी सुहाना का जिस्म ऐसा था कि उस अंधेरे कमरे में रोशनी जैसी लग रही थी, इतना उजला और दूध जैसा था उसका जिस्म! सुहाना मेरे को क्रास करके खड़ी हो गई और अपने कमर पर हाथ रख कर बोली- जानू, अब बताओ तुम मुझे जैसा देखना चाहते थे उसी तरह दिख रही हूँ ना?

मैंने मुस्कुराते हुए अपने हाथ को उसकी तरफ बढ़ाया, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, सुहाना के सहारे से मैं उठ कर बैठ गया और उसकी कमर को अपनी बाहों में लेकर बोला- सुहाना, तुम बिल्कुल काम की देवी लग रही हो, तुम्हारे इस उजले बदन से ही इस कमरे का अँधेरा दूर हो गया। वो खिलखिला कर हँस पड़ी। मैंने कहा- क्यूँ क्या हुआ? ‘कुछ नहीं, आप भी फिल्मी हीरो की तरह मेरी तारीफ कर रहे हैं?’

मैं भी मुस्कुरा दिया और मेरी उँगली उसकी पैन्टी की इलास्टिक में फंस गई और धीरे से उसकी पैन्टी को उतारने लगा। उसने भी मेरी मदद की और अपनी पैन्टी को अपने से अलग किया और फिर खड़ी हो गई, मैंने अपना सिर उसके पेट से लगा दिया और वो मेरे बालों को सहलाने लगी।

धीरे धीरे मैं उसके योनि द्वार, जहाँ पर हल्के-हल्के रोयें थे, मैंने अपने होठों से चुम्बन की बारिश शुरू कर दी और अपनी नाक उसके योनि द्वार पर लगा दी, क्योंकि उसके योनि द्वार से आने वाली खुशबू बहुत ही मादक थी और मैं उसको लगातार सूंघे जा रहा था। सुहाना कसमसा रही थी लेकिन वादे के अनुसार मेरा साथ दे रही थी और ‘आह हू…’ की आवाज निकाल रही थी। मैं कभी उसकी इस जांघ को चूमता तो कभी उस जाँघ को… और मेरी शरारती उँगली उसकी गांड में अपना काम लगाये हुई थी। थोड़ी ही देर में उसने पानी छोड़ दिया जो मेरे होंठों को रसास्वादन करा गया।

तभी सुहाना बोली- जानू, यह क्या किया आपने? मेरे मूत को पी गये? मैंने उसे अपने पास बैठाया- नहीं जानू ये मूत नहीं है, यह तुम्हारा रज है जो सेक्स करते समय आदमी और औरत दोनों के अत्यधिक चरमोत्सर्ग पर पहुँचने से निकलता है।

मैंने पूछा- तुम्हें कैसा अहसास हुआ? ‘मैं उसके बारे में बता तो नहीं सकती, लेकिन आज जिस तरह से मुझे आपकी इस हरकत ने सुख दिया है, मैं इसकी कल्पना भी नहीं कर सकती।’ बातें करते-करते वो मेरे सीने के बालों को अपनी उँगली से घुमा रही थी और मैं उसके सर के बालों को। कहानी जारी रहेगी। [email protected]

पोर्न कहानी का दूसरा भाग : मेरी सुहागरात की चुदाई की यादें -2

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