धोबी घाट पर माँ और मैं -18

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दोस्तो, नए और आखिरी भाग में आपका स्वागत है, यह भाग आपको सबसे ज्यादा कामुक बनाएगा। अभी तक मुझे काफी मेल आये पर ज्यादा मेल भाभी और आन्टी के थे।

अब तक आपने पढ़ा: माँ के मुँह से इतनी बड़ी गाली सुन कर मैं थोड़ा हड़बड़ा गया था, मगर माँ ने मुझे इसका भी मौका नहीं दिया और मेरे होंठों को अपने होंठों में भर कर खूब जोर जोर से चूसने लगी। मैं भी माँ से पूरी तरह से लिपट गया और खूब जोर जोर से उसकी चूचियों को मसलने लगा और निप्पल खींचने लगा, माँ ने सिसकारियाँ लेते हुए मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा- चूचियाँ मसलने से भी ज्यादा जल्दी मैं गन्दी बातों से गर्म हो जाऊँगी, मेरे साथ गन्दी गन्दी बातें कर ना बेटा।’

मैं उसकी चूचियों से खेलता हुआ बोला- तुम्ही करो माँ, मुझसे नहीं हो रहा है। ‘साले माँ की चूत चोदेगा जरूर, मगर उसके साथ इसकी बात नहीं करेगा, चुदाई के काम के वक्त चुदाई की बातें करने में क्या बुराई है बे चूतिये?’

अब आगे:

‘हाँ हाँ माँ, चोदना तो मुझे है ही, इसके बिना कैसे रह रहा हूँ, सिर्फ मुझे ही पता है पर तुम्हारी ये गालियाँ देने की आदत ने मेरा सारा मजा खराब कर दिया।’ ‘हाँ मेरे चोदू बेटा, तूने चाटना बंद कर दिया और ये फ़ालतू बातें करने लगा अब मेरा भी मन मर गया। चलो, सो जाते हैं। आज के लिए इतना ही सही। कल घाट पर जाना है अगर बारिश नहीं हुई तो ! पर यह जिस्म की गर्मी अभी भी बाकी है और नींद सता रही है, एक काम कर बेटा, जरा और चाट दे मेरी चूत, चटवाते चटवाते सो जाती हूँ।’

अब माँ की चूत की खुशबू से मैं और रोमांचित हो रहा था पर रात भी बहुत हो गई थी इसीलिए नींद लगने लगी। माँ तो जैसे अपने कामआनन्द में बेहोश या समझो सो चुकी थी, मैं भी रोमांचित होने की वजह से माँ से लिपट कर सो गया।

सुबह पहले माँ की नींद खुली, माँ ने मुझे भी उठाया, मेरी एक टांग और एक हाथ माँ के ऊपर थे। माँ ने मुझे बड़े प्यार से जगाया और कहा- चल बेटा, काम पर जाना है।

मैं उठा तो मेरा फनफनाता नाग मेरी चड्डी से लंबा खड़ा हुआ दिखाई दे रहा था, माँ उसे देख कर मंद मंद गालों में हँसी और उसके चेहरे पर चमक आ गई। माँ बाहर झाड़ू लेकर आँगन में जाने लगी झाड़ू लगाने पर बाहर तो कल रात से मस्त हल्की हल्की बारिश चालू ही थी। माँ के दरवाजा खोलते ही ठंडी हवा और कुछ बारिश के हल्के फव्वारे माँ के बदन पर आये, मानो बारिश और हवा भी माँ को छूना चाहती हो। और इस कारण पूरे घर में एकदम ताजा हवा और मस्ती छा गई और काम की भूख और बढ़ गई।

अब मेरा पेट में दर्द होने लगा, मैं आप घर की मोरी में संडास के लिए निकल गया। वहाँ माँ घर में झाड़ू लगाने लगी। मोरी में जाते ही में हल्की नींद में था और ठंडी हवा की वजह से अपनी ही वासना की और माँ के चूत का भूत बना हुआ था तो कड़ी लगाना भूल गया।

वहाँ माँ का झाड़ू लगाना हुआ और मेरा यह हगना ख़त्म हुआ। मैं अपनी गांड धोने के लिए झुकने वाला था तभी माँ मोरी में आई और मुझे देख कर थोड़ा अचंभित हुई इस हालत में, और थोड़ी मुस्कुराई भी… माँ कहने लगी- यह क्या कर रहा है तू हग भी करेगा अब मेरे सामने? और हंसती हुई मेरे सामने पीठ करके मूतने बैठी। मैं माँ की मस्त गोरी गोरी गांड देखने लगा, मेरी गांड धोना भूल ही गया, सिर्फ एकटक माँ की ओर देखने लगा। माँ मस्त सुर-सुर करके मूतती रही। सुरसुराहट और माँ की गोरी गांड में मेरा लंड फिर जोरों से खड़ा हो गया।

माँ का मूतना होते ही माँ मेरा लंड देख कर इठलाते हुए और कामुक हंसते हुए बोली- हाय माँ, क्या करूँ इस छोरे का इसका लंड बैठने का नाम ही नहीं लेता। और हम दोनों एक दूसरे को देख कर हंसने लगे। माँ ने कहा- बेटा याद है न, कैसे बचपन में मैं तेरी गांड धोया करती थी। आज भी मैं ही धोती हूँ तेरी गांड को।

मैं यह सुन कर हैरान हो गया पर खुश भी बहुत हुआ। माँ मेरे सामने खड़ी हो गई और मैं नीचे झुककर अपना सर माँ की जांघों में लगा दिया और मेरी गांड उचका दी। माँ मस्त पानी डाल कर अपनी बीच वाली उंगली से मेरी गांड धो रही थी। मैं और माँ इस वाक़ये से काफी खुश थे।

अभी तो वैसे सुबह के 5 ही बजे थे। माँ के मेरी गांड धोते ही मैं सीधा खड़ा हुआ तो माँ ने मेरे खड़े लंड को देखा और कहा- इसका इलाज आज करना ही पड़ेगा नहीं तो तू मेरी चूत के पीछे पागल हो जायेगा। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

माँ ने मेरे कपड़े उतारे, अब मैं पूरा नंगा खड़ा था। नंगा होते ही मैं माँ के मस्त बड़े पपीते जेसे स्तन दबाने लगा। अब माँ ने भी अपनी साड़ी निकाली और ब्लाउज भी उतारा। आप माँ के स्तन मेरे मुख के पास लटक रहे थे, मैं उन्हें दबाये जा रहा था। अब माँ का पेटीकोट बाकी था, माँ एक हाथ से अपनी चूत रगड़ रही थी। मैंने पेटीकोट उतारने का प्रयास किया पर माँ ने मुझे रोक दिया और रुकने को कहा।

मैंने कहा- माँ अब बस करो मुझे सताना और तड़पाना, मैं जबर्दस्ती चोद दूंगा तुम्हें! माँ बोली- अरे हाँ मेरे लाल, मुझे पता है कि तू मेरी चूत देखने और मारने को बेताबी से तड़प रहा है पर अब मेरा भी पेट दर्द कर रहा है और मैं भी हग लूँ जरा, उसके बाद करते हैं नहाते नहाते!

मैं बोला- माँ, तुम भी मेरे सामने हगने बैठो, और मैं मेरे बाबा के दाढ़ी करने के फावड़े से तुम्हारी चूत के बाल निकालता हूँ। माँ ने कामुक तरीके से हंस कर ‘हम्म हम्म…’ में जवाब दिया।

माँ तुरन्त अपना पेटीकोट निकाल कर हगने बैठी और मैं सब देखता ही रहा। माँ धीरे धीरे मूतने लगी, इस बार उसने सिर्फ थोड़ा सा ही मूता। मैं तो कब से माँ की चूत देखने के लिए तरस रहा था, मेरे पैर जैसे जमीन पर चिपक गए, माँ की झांटों से भरी चूत देख कर।

माँ हगते हुए मेरा लंड और मेरा मुख देख रही थी, फिर बोली- बेटा, जल्दी अपने बाप का हजामत का फावड़ा ले कर आ, मेरी झांटें निकाल दे। मैं तुरन्त वहाँ से नंगा भागा घर में और रेजर लेकर आया।

माँ अभी भी हग रही थी। मैं फावड़ा और नहाने का साबुन लेकर हगती हुई माँ के सामने बैठा। माँ की चूत तो अभी से पानी छोड़ रही थी। मैंने कहा- माँ, यह इतना पानी कैसे? इतना कैसे मूत रही हो आज? क्या रोज हगते समय इतना मूतती हो? माँ बोली- नहीं रे पगले, आज जिंदगी में पहली बार मैं अपनी झांटें साफ़ कर रही हूँ। इस वजह से यह कमीनी चूत पानी छोड़ रही है।

मैंने हंसते हुए नहाने के साबुन को माँ की चूत पर लगाया और वहाँ झाग बनाने लगा। कुछ देर बाद मैंने फावड़ा चला कर पूरी झांटें साफ की और चूत को पानी से धोया। धोते धोते मैं माँ की चूत को हल्का हल्का मसल रहा था, माँ गर्म हो रही थी, बोली- अरे कमीने, हरामी भोंसड़ी के, जरा रुक तो सही, क्या हगते हुए ही चोदेगा मुझे? जरा गांड तो धोने दे मुझे मेरी!

मुझे पता था कि माँ गर्म होती है तब गालियाँ देती हैं। मैं हंसते हुए अलग हुआ और माँ से कहा- लाओ माँ, मैं धो देता हूँ तुम्हारी गांड भी !कामुक हंसी हंसते हुए मेरी तरफ झुकी पर मेरा हाथ माँ की गांड तक नहीं पहुँच रहा था पर इस बार माँ ने तो और चौका दिया मुझे। वो जब झुकी तो मेरे लंड की मादक खुशबू से और गर्म हो गई और मेरा लंड चूसने लगी, मैं भी और गर्म हो गया और माँ के स्तन दबाने लगा।

मैं तो मानी सातवें आसमान में था। पर माँ ने अब लंड चूसना बंद किया और मुझे कहा- अरे मेरे लाल, मेरी गन्दी हगती हुई गांड के साथ ही आगे का काम करेगा क्या? मैं घोड़ी बन जाती हूँ, तू पीछे से जा और गांड धो मेरी। मैं पीछे गया और पानी डालकर माँ की गांड अपने हाथ से धोने लगा।

‘कितनी चिकनी गांड है माँ तुम्हारी! वाह मजा आ गया, और यह देखो तुम्हारी गांड का छेद कितना मस्त है, गोरी गोरी गांड की एक काली सुरंग।’ धोते धोते मैं माँ की चूत भी देख और धो रहा था पीछे से। माँ हंसती हुई चिल्लाई- हुआ या नहीं मेरी गांड धोना, जल्दी कर।

अब मैं मेरे खड़े लंड के साथ माँ के सामने खड़ा था और माँ ने मुझे अपने नंगे गोरे बदन से चिपका लिया। हम मस्ती से एक दूसरे को सहला रहे थे। माँ के स्तन काफी बड़े लग रहे थे और सख्त भी, मेरा लंड तो जैसे माँ की जांघों में घुसे जा रहा था।

माँ तुरन्त नीचे बैठी और अपने दोनों पैर पसार कर मेरे सामने बैठी अपनी चूत दिखा रही थी। मैं भी नीचे बैठा, माँ बोली- ले बेटा, तेरे खजाने का पिटारा तेरे लिए। मैं तो देखता ही रहा माँ की चूत को, जहाँ से मैं निकला था।

अब माँ की चूत काफी सुंदर लग रही थी, मस्त गोरी गोरी और लाल लाल चूत, जब वहाँ झांटें थी तो कुछ ख़ास नहीं देख सकता था चूत को। अब मैं चूत की गंध से और कामुक होगया था, मैंने माँ की चूत चाटना चालू कर दी। माँ कामुक आवाजें निकालने लगी- उईई ह्म्म्म्म आआ आओम्म्म म्म्म्मम्म… चाट मेरे लाल, चाट अपनी माँ की चूत को चाट, ऐसा ही मजा दूंगी तुझे रोज। मेरी जिंदगी बीत गई पर तेरे बाप ने मेरी चूत कभी नहीं चाटी। अम्म्म्म ऊऊओ ओओ आआआ चाट बेटा चाट अईई…

मैं मस्त माँ के स्तन दबा रहा था और मजा कर रहा था। माँ की चूत का स्वाद मस्त मादक चिकना खारा और लेसदार था। मैं पूरा पानी पीते जा रहा था। अब एक मस्त बड़ा घूँट पानी निकला माँ की चूत से और मेरा मुँह पूरा भर गया उसके पानी से… माँ हाँफने लगी और मैं उठ कर माँ के पास गया और उसके सामने अपना लंड लेकर खड़ा हो गया।

माँ ने कहा- मेरे बेटे का गधे जैसा लंड कितना मस्त है, ला मैं चूसती हूँ इसे। और माँ मेरे लंड के साथ खेलने लगी और हिलाने लगी, कुछ देर में मेरा लंड चूसने लगी। फिर मैंने माँ को वही पर चौड़े करने को कहा। मैं माँ के पैरों में जांघो में बैठा, मेरा लंड माँ ने हाथ में लेकर अपनी चूत पर रखा और मुझे झटका मारने के लिए कहा। मैंने एक झटके में पूरा लंड माँ की चूत में घुसा दिया। माँ जोर से चिल्ला उठी और उसकी आँखों से आंसू आने लगे।

मैं डर गया और झटके मारना बंद किये। माँ कुछ देर वैसी ही पड़ी रही दर्द में, फिर मुझे कहा- अरे, मेरी जान लेगा क्या? जरा रहम के साथ कर ना ये सब धीरे धीरे! मैं हल्का हल्का झटका लगाता रहा एक एक… माँ को अच्छा लगने लगा, फिर माँ बोली- थोड़ा जोर से कर अब! मैंने गति बढ़ा दी और चोदने लगा।

माँ मदतमस्त होकर चिल्ला रही थी- आअ ईईईइ ऊऊऊ म्म्म्मम्म… चोद अपनी माँ को चोद हरामी चोद भड़वे! फाड़ दे मेरी चूत को आआम्मीईईई… ऊऊम्मम्म।

अब चोदते हुई मुझे 15 मिनट हुए थे, मैं झड़ने वाला था, मैंने कहा- माँ, मैं आने वाला हूँ। माँ ने कहा- बेटा, आज बहुत सालों बाद इतनी मस्त चुद रही हूँ, मेरी प्यासी चूत को तेरा पानी पिला। मैं भी आने वाली हूँ… और जोर से ठोक मेरी… आआआम्मम्मीईई ईवव्वस्स स्सस्स म्म्मम्म…

मैंने कुछ झटकों के बाद अपना पानी माँ की चूत में झाड़ दिया। माँ और मैं हांफ़ते हांफ़ते वहीं मोरी में कुछ देर पड़े रहे और बाद में नहाने के बाद चाय नाश्ता करके दिन भर चुदाई की। मित्रो कैसे लगा कहानी का यह वाला भाग? आप जरूर मुझे मेल करें। कहानी काल्पनिक है, यह याद रहे। कहानी समाप्त हो चुकी है, आगे मिलते हैं नई कहानी के साथ! [email protected]

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