बहन का लौड़ा -19

This website is for sale. If you're interested, contact us. Email ID: storyrytr@gmail.com. Starting price: $2,000

अभी तक आपने पढ़ा..

सरजू- अरे ममता रानी.. ये मूत नहीं वीर्य था.. जिसे पीकर तू धन्य हो जाएगी.. आह्ह.. मज़ा आ गया… चल अब तेरी चूत चाट कर तुझे ठंडा करता हूँ उसके बाद तेरी सील तोड़ूँगा।

ममता को अब कुछ-कुछ होने लगा था.. सरजू उसकी कुँवारी चूत को बड़ी बेदर्दी से चाटने लगा। ममता- आह्ह.. आई.. सी सी अजी सुनिए तो आह्ह.. बस भी करो.. आह्ह.. नहीं आह्ह.. मुझे कुछ हो रहा है आह्ह। सरजू लगातार चूत चाट रहा था.. ममता की सिसकियां कमरे में गूंजने लगीं.. जल्द ही उसका बदन अकड़ने लगा और उसकी चूत ने रस छोड़ दिया.. जिसे सरजू पी गया।

ममता की बात सुनकर मीरा की चूत गीली हो गई थी और राधे का लौड़ा फुंफकारने लगा था.. मगर दोनों ही अपने ज़ज्बात को दबाए बैठे.. उसकी बातें सुन रहे थे।

अब आगे..

आधे एक घंटे तक सरजू और ममता एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे.. इस दौरान सरजू ने दो-चार पैग और लगा लिए अब वो नशे में झूलने लगा था.. ज़ुबान लड़खड़ाने लगी थी..

सरजू- ममता आज हमारी सुहागरात है अब तू मेरे लौड़े.. हिच्च.. को.. चूस कर खड़ा कर.. अब तेरी सील तोड़ने का बखत आ गया है.. हिच्च हिच्च..

ममता ने लौड़े को चूसना शुरू कर दिया जल्दी ही लौड़ा खड़ा भी हो गया, अब ममता की शर्म भी खुल गई थी, वो भी सरजू को बोलने लगी थी।

ममता- मेरे स्वामी.. आपने ये क्या कर दिया.. मेरे नीचे आग लग रही है.. आह्ह.. कुछ करो.. घुसा दो अपना ये.. आह्ह.. स्वामी.. जल्दी कुछ करो।

सरजू ने ममता के पैरों को फैलाया.. लौड़ा.. चुसाई के कारण थूक से सना हुआ था। सरजू ने लौड़े को चूत पर टिका कर धीरे से धक्का मारा लौड़ा फिसल गया। दो बार कोशिश करने के बाद सुपाड़ा ही चूत में घुस पाया था कि ममता दर्द से कराह उठी।

उसी पल सरजू ने ज़ोर से धक्का मारा.. और पूरा लौड़ा चूत में घुस गया। खून चूत से रिस कर बाहर आने लगा.. ममता ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी। मगर सरजू तो बस ‘घपाघप’ लौड़ा पेल रहा था। पांच मिनट में ही उसका लौड़ा अकड़ गया और ममता की सुखी चूत को गीला कर दिया।

सरजू- आह्ह.. मज़ा आ गया.. तेरी सील तोड़कर आह्ह.. बहुत थक गया हूँ.. अब तू गुसलखाने में जाकर चूत साफ कर ले.. मैं तो सो रहा हूँ.. बहुत थक गया हूँ मैं.. आह्ह.. उहह।

सरजू नशे में था.. जल्दी ही उसे नींद आ गई.. ममता बस बिस्तर पर पड़ी सिसकती रही। काफ़ी देर बाद ममता उठी.. बाथरूम जाकर उसने अपनी चूत साफ की और सरजू के पास ही सो गई।

राधे- अरे वाह.. ममता तेरी कहानी तो अच्छी है.. माना कि तेरे पति का छोटा है मगर तेरी चीखें निकलवा दीं उसने.. लेकिन सुहागरात की रात बस एक बार ही चोदा.. ये अच्छा नहीं किया तेरे पति ने।

ममता- जाने दो बड़ी बीबी जी.. अब आपको क्या बताऊँ.. पहली रात को मैं कुँवारी थी.. पहली बार चुदवाया तो दर्द होगा ही.. उस रात के बाद कोई एक महीने तक वो रोज मुझे चोदता रहा.. मेरी चुदाई की तड़प बढ़ती ही जा रही थी। सच कहूँ बीबी जी.. वो तो 5 मिनट में ठंडा हो जाता.. मेरी सुलगती चूत को मुझे उंगली से ठंडा करना पड़ता.. अब तो कई महीने हो गए.. वो नशे में धुत होकर आता है और गिर कर सो जाता है। मेरे तो करम ही फूट गए। मैं उसको सोते हुए नंगा करके खुद से चुदवा लेती हूँ मगर मज़ा नहीं आता.. उसका लौड़ा बड़ी मुश्किल से चूस कर खड़ा करती हूँ.. जब उसके ऊपर बैठ कर एक-दो बार ऊपर-नीचे होती हूँ.. साला भड़वा.. उतने में ही पानी छोड़ देता है.. मैं अधूरी की अधूरी रह जाती हूँ।

राधे- ओह सॉरी.. ममता.. मैं कुछ कर सकूँ तो मुझे बताना.. मैं जरूर तुम्हारी मदद करूँगी।

ममता- बीबी जी मुझे बच्चा चाहिए.. वो मेरे पति तो दे नहीं सकते.. पड़ोस वाली सुनीता कहती है किसी और मर्द से सम्बन्ध बना ले.. चुदाई का सुख भी मिल जाएगा और गोद भी हरी हो जाएगी।

मीरा- तो तुमने क्या सोचा?

ममता- नहीं बीबी जी.. ऐसे ही किसी से चुदवाना ठीक नहीं.. जो आगे चलकर मेरे जीवन में जहर घोल दे.. हाँ कोई ऐसा आदमी मिल जाए जिसके पास तगड़ा लौड़ा हो.. और मुझे पक्का विश्वास दिलाए कि मुझे बच्चा देकर वो कभी मुझे परेशान नहीं करेगा। तब मैं ख़ुशी से उसको अपनी चूत दे दूँगी। ये सब कहते-कहते ममता की आँखों में आँसू आ गए।

राधे- तुम्हारा दिल दुखाने का मेरा बिल्कुल इरादा नहीं था ममता.. मगर तुम चिंता मत करो.. बहुत जल्दी तुम्हारी गोदी में बच्चा होगा। ममता- कैसे होगा बीबी जी? मीरा- होगा.. ममता जरूर होगा.. दीदी तुमको बच्चा देगी।

ममता की समझ में कुछ नहीं आया.. वो बस दोनों को टुकुर-टुकुर देखती रही।

राधे ने मीरा की कही बात को संभालते हुए कहा- अरे इसका मतलब है.. मैं ऐसे आदमी को जानती हूँ.. जो तुम्हें बच्चा देगा.. समझी.. अब जाओ अपना काम करो.. मुझे थोड़ा आराम करना है। ममता- बीबी जी.. अगर सच में ऐसा हो जाए.. तो मैं आपका अहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगी।

ममता के बाहर जाते ही राधे ने मीरा को आँख दिखाई- तुम पागल हो क्या.. सीधे-सीधे मेरा नाम ले दिया।

मीरा- तो क्या हुआ.. बेचारी कितनी दुखी है.. तुम उसको बच्चा दे दोगे.. तो क्या बिगड़ जाएगा। राधे- अरे मेरी भोली मीरा.. उसकी नजरों में राधा एक लड़की है.. अब उसको थोड़ी पता है मेरे बारे में। मीरा- ये तो मैंने सोचा ही नहीं.. पापा को पता चल गया तो वो मर ही जाएँगे।

राधे- हाँ मेरी रानी.. अब समझी ना.. बात को ममता का भी कुछ सोचता हूँ इसकी बातों ने गर्म कर दिया.. उसको बोलो कि आज उसकी छुट्टी.. जाओ उसके बाद हम अपनी रासलीला करेंगे।

मीरा भी गर्म थी.. उसने ममता से कहा- दोपहर का खाना बनाकर तुम चली जाना.. रात को हम बाहर खाएँगे।

ममता भी जल्दी जाने की ख़ुशी में जल्दी से सब काम निपटा कर फ्री हो गई। बारह बजे तक उसने खाना बना दिया राधे और मीरा ने खाना खा लिया।

मीरा- अच्छा ममता.. बर्तन धोकर तुम चली जाना.. मुझे नींद आ रही है.. मैं तो सोती हूँ। राधे- तुम सो जाओ.. मैं थोड़ा बाहर जाकर आती हूँ।

ममता बर्तन धोने में लग गई.. राधे बाहर चला गया और मीरा कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गई। कोई 20 मिनट बाद ममता ने मीरा को कहा- मैं जा रही हूँ। ममता जब बाहर निकल रही थी.. राधे घर में आ रहा था। उसने ममता से कहा- जल्दी ही वो उसके लिए कुछ करेगी।

ममता खुश होकर चली गई।

राधे जब कमरे में गया तो मीरा नाईटी पहने हुए बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थी, वो राधे बिना कोई आवाज़ किए सीधा बाथरूम में चला गया।

हाय दोस्तो.. क्या यार, कहानी में इतने खोए हुए हो.. मुझे याद भी नहीं करते.. अरे मेरी बात जाने दो.. नीरज को तो याद कर लो.. उसका क्या हाल है.. चलो देख लेते हैं। राधे को बाथरूम में लंड हिलाते रहने दो.. हम वापस पीछे चलते हैं.. जब नीरज ने रोमा को घर ड्रॉप किया था।

रोमा को ड्रॉप करने के बाद नीरज बहुत खुश था। करीब 15 मिनट बाद ही उसने रोमा को कॉल कर दिया।

नीरज- हैलो..! रोमा- हाय.. अरे अभी तो मुझे छोड़ कर गए हो.. क्या हुआ जनाब.. क्या भूल गए? नीरज- भूला कुछ नहीं हूँ.. तुम्हें थैंक्स बोलना चाहता हूँ और एक जरूरी बात भी करनी है।

रोमा- अरे किस बात का थैंक्स.. मैंने तो बस आपको सच बताया है और जरूरी बात क्या है? नीरज- क्या शाम को मुझसे मिल सकती हो.. प्लीज़ गलत मत समझना.. तुमसे कोई जरूरी बात करनी है। रोमा- क्या बात है.. फ़ोन पर बता दो ना.. शाम को मेरा आना जरा मुश्किल है।

नीरज- कोई बात नहीं.. फिर जब तुम मिलोगी.. तब बता दूँगा। रोमा के मन में हलचल पैदा हो गई आख़िर क्या बात होगी।

रोमा- अच्छा ठीक है.. ऐसा करती हूँ.. कल आप 10 बजे स्कूल से थोड़ा दूर जो पीसीओ है ना.. वहाँ आ जाना.. मैं वहीं मिलने आ जाऊँगी। नीरज- लेकिन उस टाइम तो तुम स्कूल में रहोगी ना?

रोमा- नहीं.. कल मैं स्कूल नहीं जाऊँगी.. मेरे मौसाजी के यहाँ उनकी बेटी की सगाई है.. हम सब वहाँ जाएँगे.. तो रास्ते में वहीं आपसे मिल लूँगी। नीरज- ओके.. तो मैं पक्का वहाँ आ जाऊँगा।

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।

This website is for sale. If you're interested, contact us. Email ID: storyrytr@gmail.com. Starting price: $2,000