बंगाली बिहारी दोनों ने मेरी बुर फाड़ी-3

रेणुका मैंने मम्मी से इंग्लिश में बात तो क़ी, पर सारी घटना के बारे में कुछ भी नहीं बताया। फिर मैंने रामदीन को यह कहते हुए फोन थमा दिया कि मम्मी उससे कुछ बात करेंगी। ‘हाँ मेमसाहिब.. आप फिकर क्यूँ करती हैं, मैं बिटिया का अच्छी तरह से ख्याल रखूँगा ! रात को उसे अच्छे से दूध पिला कर सुला दिया था !’ फिर फोन रख उसने मुझ से कहा- मम्मी कह रहीं थी क़ि मैं तेरा ठीक तरह से ‘ख्याल’ रखूं… तू स्कूल से आ जा, तब मैं फिर ठीक तरह से तेरा ‘ख्याल’ रखूँगा.. समझ गई? आज तो रात भर ‘ख्याल’ रखूँगा! शायद जब मैंने मम्मी से कुछ नहीं कहा तो उसकी हिम्मत बढ़ गई थी और वह निश्चिंत हो गया था कि मैं किसी को कुछ भी बताने वाली नहीं। ‘रामू चाचा तुम बहुत बदमाश हो.. रात में मुझे कौन सा दूध पिलाया था? मेरी अभी वह दूध पीने की उम्र थोड़े ही है!’ और यह कह कर स्कूल की बस पकड़ने घर से निकल गई। दोपहर को मैं स्कूल से लौटी तो सान्याल अंकल अपने घर के बाहर खड़ा मेरा इंतज़ार कर रहे थे। मुझे देखते ही बोल पड़े- पिंकी कल घोर में क्या हुआ.. वो साला रामदीन तुमको क्या बोला? मैं सोचने लगी कि अंकल को सब कुछ बता देना चाहिए या नहीं। फिर मुझे रामदीन पर गुस्सा आने लगा, उसी की वजह से मैं अभी से ही एक औरत बन गई थी। ‘क्या होता?.. कुछ ख़ास बात नहीं हुई… अंकल वो ही हुआ जो होना था.. रामदीन ने मुझे चोद डाला !’ ‘क्या बोला तुम. ! उसने तुम्हें चो..चोद डाला? उस नौकर की इतनी हिम्मत… उस साले का मैं पुलिस में डायरी लिखाएगा !’ ‘नहीं.. अंकल, ऐसा मत करना.. आप जब कल मेरी बिल खोद रहे थे, तब उसने फोटो खींच ली है!’ ‘लेकिन पिंकी.. तुम नहीं जानती, तेरे को बच्चा हो गया तो तुम क्या करेगी?’ उसने मुझे एक डर दिखाया जो कि लड़कियों की बहुत बड़ी मजबूरी है। यह बात सुन कर मैं बहुत घबरा गई थी। तब वो बदमाश सान्याल अंकल मेरी पीठ पर हाथ रख कर मुझे दिलासा देने लगे, फिर मेरी चूची धीरे-धीरे दबाने लगे और कह रहे थे- रामदीन ने तुझे चोदा है, यह तो बहुत अच्छा हुआ.. अब मैं भी तो तुझे चोद कर तेरी जवान चूत का मज़ा ले लूँ.. कई सालों से तुझे चोदने के सपने देख रहा हूँ ! अंकल की बात सुन कर मुझे पता चला कि रामदीन सही था। रामदीन शुरू में बहुत ही तरीके से मुझे चोदा था और जब उसे पता चल गया कि मैं आराम से उसका बड़ा और मोटा लंड अपनी चूत में लेने लग गई हूँ, तभी वह एक हब्शी बना था। सच पूछिए तो चोदते समय उसका मुझे कुतिया और रंडी कहना अच्छा लग रहा था। फिर अंकल मुझे घर में ले गए जो आज भी खाली था, पता नहीं बंगाली अंकल ने अपनी बीवी को कहीं भेज दिया होगा। खैर.

. उन्होंने मुझे नंगी कर लिया और मेरे को कस कर चोदा। वे मेरे बाप की उम्र के थे और मेरे पिताजी के अच्छे दोस्त होने का दिखावा भी बहुत करते थे पर उनकी ग़ैरहाज़िरी में उनकी बेटी को एक रन्डी की तरह चोद भी रहे थे। फिर उसने मुझे एक गोली दी और कहा- इसको कहा लेना इससे मेरे बच्चा नहीं ठहरेगा। उसने मुझे समझाया- रामदीन अब मुझे तब तक चोदेगा, जब तक मेरे मम्मी-पापा नहीं आ जाते। इसलिए दवा लेनी ज़रूरी है। पर मैं समझ गई कि अंकल भी मुझे तब तक चोदेंगे और ये बदमाश अंकल कोई रिस्क लेना नहीं चाहते। फिर मैं वहाँ अंकल से चुदवा कर अपने घर पहुँची, जहाँ रामदीन दरवाजे के बाहर खड़ा मेरा इंतज़ार कर रहा था। ‘क्यों कुतिया अपने प्यारे अंकल से भी चुदवा आई ! अरे यह तो होना ही था.. अगर मैं कल उस वक़्त नहीं पहुँचता, तो वो हरामी तुझे कल ही चोद देता.. कोई बात नहीं ! जब एक रोटी हो और दो भूखे हों, तो बाँट कर खाने में ही अकलमंदी है। दोनों मिल कर तेरी चूत चोदेंगे.. ठीक है ना !’ ‘तुम्हें इससे क्या मतलब?’ यह सुनकर रामू चाचा ने मेरे बाल पकड़ लिए और मुझे बेडरूम में ले गया। ‘मैं तुझे अभी बताता हूँ.. मेरा इससे क्या मतलब है !’ उसने न तो मुझे खाने के लिए पूछा और धोती से अपना लंड निकाल कर मुझे दिखाते हुए कहा- चूस इसे.. रंडी चूस ! आज तेरी भूख इसी से मिटाऊँगा।’ ‘नहीं.. रामदीन चोदना है तो चोद ले.. लेकिन मुँह में नहीं लूँगी !’ मैंने लंड की ओर से मुँह फेरते हुए कहा। ‘अर..री कुतिया.. अपनी चूत को तो.. तू अभी अपने अंकल के लौड़े का रस पिला कर लाई है। अब मेरा रस भी सटक कर देख !’ यह कह कर उसने मेरे बाल पकड़ लिए और मुझे लंड की तरफ नीचे झुकाने लगा और मेरी चूची को बेरहमी से दबाते हुए बोला- चूस कुतिया.. चूस.. इसे अपने मुँह में ले… अभी कल तक तो तू मेरा अँगूठा कितने प्यार से चूसती थी.. अब तू लंड लेने लायक हो गई है, अब इसे चूस ! उसी तरह चूस.. जैसे बचपन में तू मेरा अँगूठा चूसती थी!’ मेरे पास और कोई चारा नहीं था और मैंने आँख बंद करके उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया। तब वह उत्तेजना के मारे मेरी चूची को और ज़ोर से दबाने लगा। ‘मेरी चूची को ऐसी बेदर्दी से क्यों दबाते हो.. मैं चूस तो रही हूँ ना?’ ‘तेरा दाँत मेरे लौड़े पर लग रहा था.. जब-जब तेरा दाँत मेरे लौड़े पर लगेगा, मैं तेरी चूची को मसल डालूँगा.. ध्यान से चूस !’ वह मुझे लौड़ा चुसाता रहा, जब तक उसका लंड मेरे मुँह में झड़ने नहीं लगा। तब मैंने उसके लंड को फ़ौरन अपने मुँह से निकाल दिया फ़िर भी कुछ तो मेरे मुंह में निकल ही गया था। रामदीन बोला- मेरे वीर्य को अपने मुँह में पीकर कैसा लगा? मैंने मुँह बिचकाते कहा- गंदा था.
. नमकीन-नमकीन.. मुँह खराब हो गया ! ‘कोई बात नहीं, पहले चुदाई भी तो अच्छी नहीं लगी थी फिर अच्छी लगने लगी, यह भी अच्छा लगने लगेगा !’ उसके बाद उसने मुझे खाना दिया और रात होने तक फिर कोई नई बात नहीं हुई। घर में रामदीन और बाहर में सान्याल अंकल जब तक मेरे मम्मी-पापा नहीं आ गए दोनों जन मुझे चोदते रहे। मम्मी-पापा के आने के बाद सब कुछ सामान्य हो गया, पर मैं सारी घटना के बारे में बिल्कुल खामोश रही। अब मुझे चुदाई का चस्का पड़ चुका था। मैं कई बार अपनी चूत को खुद ही सहलाती। एक दिन रामदीन ने यह देख लिया और वह मेरे पास आकर बोला- बिटिया, क्या चुदाई का बहुत दिल कर रहा है? अंकल के पास जा। मैंने देख लिया है वो अकेला है। मेरे भाग में तो नहीं, पर तेरा तड़पना मेरे से देखा नहीं जाता। एक चुदाई हो जाएगी तो तुझे भी अच्छा लगेगा। ‘मम्मी से क्या कहूँ?’ तब उसने कहा- मैं कहता हूँ.. तू जा.. मैं तेरी माँ को समझा दूँगा। और मैं जैसे ही बाहर जाने को हुई, मम्मी ने देख लिया और मेरी आँख में झाँक जैसे पूछ रही थीं कि कहाँ जा रही हूँ, मैंने रामदीन की और देखा और वह मम्मी से बोला- मेमसाहिब, हम बिटिया से बोला है थोड़ा अंकल के साथ खेल आए। दिमाग़ ताज़ा हो जाएगा तो अच्छी तरह पढ़ाई कर पाएगी। फिर मैं निकल गई और कई दिन बाद अंकल से अच्छी तरह चुदवा घर वापस आ गई। शाम को मेरे मम्मी-पापा एक डिनर पार्टी में चले गए तो रामदीन को तो जैसे मन की मुराद मिल गई। वह रात एक कटोरी में तेल ले मेरे कमरे में आया। उसे देखते ही मैंने पूछा- रामदीन तुम तेल क्यों लाए हो?’ ‘कुतिया.. जब मैं तेरे छोटे से छेद में अपना मोटा लौड़ा डालूँगा, तो दर्द को कुछ कम करने के लिए तेल लगाऊँगा !’ ‘मेरी चूत के छोटे से छेद में ! अरे तूने तो मेरे छोटे से छेद को चोद-चोद कर, क्या कहा था तूने पहली बार.. हाँ, इंडिया गेट बना दिया है.. अब उसमें क्या दर्द होगा?’ ‘रंडी.. तू समझी नहीं.. मैं तेरी चूत के छेद की बात नहीं.. तेरी गाण्ड के छेद की बात कर रहा हूँ ! साली की इस उम्र में भी कितनी गान्ड फूल गई है.. तुम साले पैसे वाले क्या खाते हो, जो अभी से ही औरत सी गान्ड हो गई है !’ रामदीन के बात मेरी समझ में आते ही मैं बोल पड़ी- नहीं.. रामदीन, तू मेरी गाण्ड नहीं मारेगा। मैं दर्द के मारे मर जाऊँगी !’ ‘अरे कुतिया.. इसी लिए तो तेल लेकर आया हूँ.. चल कपड़े उतार कर पलंग पर कुतिया की तरह खड़ी हो ज़ा !’ मैं भी इस नए मज़े के लिए कुछ उत्सुक थी और पलंग पर हाथ रख कर हवा में गाण्ड उठा दी। पहले रामू चाचा ने मेरी गाण्ड ठीक से तेल से चुपड़ दिया और फिर गाण्ड के छेद पर तेल ठीक से मला और अपनी उंगली उसमें घुसाने लगा। जब उसकी उंगली मेरी गाण्ड में ठीक से अन्दर-बाहर होने लगी तो उसने वहाँ अपना लंड टिका दिया और कुछ देर रगड़ एक धक्का भीतर दिया। मैं दर्द से बिलबिला उठी- आयययईई.
. ओह मम्मी मैं मर गई ! रामदीन.. तुमने मेरी फाड़ डाली ! पर उसने मेरे चिल्लाने पर कोई ध्यान नहीं दिया और कुछ देर बाद उंगली की ही तरह वह लंड से भी मेरी गाण्ड मारने लगा। ‘बिटुआ मज़ा आ गया… तेरी गाण्ड तो बहुत तंग है.. ऐसा लगा मैं तेरी कोरी चूत फिर से चोद रहा हूँ!’ ‘मुझे बहुत दर्द हुआ और बिल्कुल अच्छा नहीं लगा !’ मैंने रुआंसे स्वर में कहा। ‘कोई बात नहीं… दो चार बार गाण्ड मारूँगा तो वो भी तेरी चूत की तरह खुल जाएगी और तुझे मज़ा आने लगेगा।’ फिर उसने मेरी चूत भी चोदी और 11 बजे के करीब मम्मी-पापा आ गए। फिर तो यह सिलसिला चल पड़ा। जब भी मम्मी-पापा घर पर नहीं होते, रामदीन मुझे चोदता और मेरी गाण्ड मारता। जब माँ घर पर होती, तो मैं अंकल के पास कैरम खेलने का बहाना करके वहाँ चली जाती और अंकल से मज़ा लूटती। आप लोगों को मैंने अपनी यह सच्ची कहानी सुना दी है। मुझे नहीं मालूम कि आप लोगों को कैसी लगी। फिर भी मेरी आपसे यही इल्तजा है कि आप ईमेल जरूर कीजिए। [email protected]

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