कामवाली बाई की चुदाई

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मेरी पिछली सेक्स कहानी कामवाली की कुंवारी बेटी की चुदाई में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने अपनी कामवाली शांति बाई की सेक्सी बेटी की चुदाई की.

स्वरा की चुदाई करते हुए तीन चार महीने हो गये थे.

तभी एक दिन शांति ने बम फोड़ा- साहब, स्वरा की शादी तय हो गई है, अगले महीने की 6 तारीख को शादी है. आपकी शिक्षा दीक्षा के कारण ही लड़के वालों ने उसे पसन्द किया है. लड़का सरकारी नौकरी में है. स्वरा ने भी अंग्रेजी झाड़कर रौब बना लिया था. साहब आपसे कुछ पैसों की मदद चाहिए होगी, हम धीरे धीरे उतार देंगे.

“देखो शांति, तुम्हारी इतनी तनख्वाह नहीं है कि तुम एडवांस भी एडजस्ट करो और बची तनख्वाह से घर चला पाओ. लेकिन तुम्हारी जरूरत भी वाजिब है, इसलिये पैसे तो मैं तुम्हें दे दूंगा लेकिन तुमको एक वादा करना होगा, हमको कभी कभी खुश कर दिया करना.”

“हम आपकी बात समझ रहे हैं, साहब. कभी हमारे हालात पर भी गौर करिये, हमारे पति को टीबी की बीमारी है, पिछले 6 साल से वो न तो कमा रहा है और न हमारे पास आता है. हम भरी जवानी में रात भर तड़पते हैं लेकिन इधर उधर कहीं मुंह मारने की नहीं सोची. आज आपने हमारी दुखती रग पर हाथ रख दिया है. हम आपके कदमों में पड़े हैं, साहब. आपकी खुशी में हमारी खुशी है, आपका स्पर्श हमारे लिए स्वर्ग की अनुभूति होगा, साहब.”

“ठीक है, तुम शादी की तैयारी करो, पैसे की चिंता मत करना.”

जरूरत पड़ने पर मैंने शांति को पैसे दिये.

शादी से चार दिन पहले शांति आई, हमें शादी में आमंत्रित किया और बताया कि शादी के बाद इतवार तक वो छुट्टी पर रहेगी और सोमवार से काम पर आयेगी. मैंने उसे कहा- एक बार अपनी बेटी स्वरा को मेरे पास भेजना. मैं उसे कुछ काम की बातें समझाऊँगा. असल में मैं उसकी शादी से पहले एक बार और चोद लेना चाहता था.

अगले दिन ही स्वरा मेरे पास आ गयी. मैंने उसे पूरी नंगी करके पहले तो नहलाया, फिर खूब मजा लेकर उसकी चूत चोदी. फिर मैंने उसे समझाया कि जब उसका पति उसे चोदने लगे तो उसे क्या करना है. मैंने उसे बताया कि जब उसका पति उसकी चूत में लंड डालने लगे तो अपनी जांघें भींच कर चूत को कस लेना और दर्द होने का नाटक करना. वो चुदाई के खेल में पारंगत हो चुकी थी तो वो मेरा इशारा समझ गयी.

हम लोग स्वरा की शादी में गये, उपहार दिया. मौका देखकर मैंने शांति को एक हजार रुपये दिये और कहा- ये पैसे तुम्हारे लिए हैं, सोमवार को काम पर आना तो सज संवर कर आना.

शादी के बाद सोमवार को शांति काम पर आई और अच्छे से सज संवर कर आई. जब शांति ने घर का काम निपटा लिया तो मैंने उससे कहा- दो कप चाय बना लो, हम लोग एक साथ चाय पियेंगे.

शांति चाय बना कर लाई तो मैंने उसे अपने बगल में सोफे पर बिठा कर चाय पी. चाय पीने के बाद मैंने शांति से कहा- शांति, मैं तुम्हारी मजबूरी का फायदा नहीं उठाना चाहता, अगर तुम राजी खुशी से मेरे साथ आना चाहो तो आओ.

“हम आपसे झूठ क्या बोलें, साहब. हम खुद जवानी की आग में जल रहे हैं. हम आपकी हिचक खुद ही दूर किये देते हैं.” इतना कहते हुए शांति ने अपनी साड़ी खोल दी और बालों में लगा क्लिप हटाकर अपनी जुल्फें बिखरा दीं.

अब गेंद मेरे पाले में थी. शांति का हाथ पकड़ कर मैं उसे बेडरूम में ले आया, शांति का पेटीकोट और ब्लाउज मैंने उतार दिया. ब्रा और पैन्टी में खड़ी शांति मुझे टीवी एक्ट्रेस रीमा लागू की छोटी बहन लग रही थी.

शांति के बदन का अच्छे से मुआयना करते हुए मैंने अपनी टीशर्ट व लोअर उतार दिया. अब शांति ब्रा और पैन्टी में थी व मैं सिर्फ अण्डरवियर पहने था. मैंने शांति का हाथ अपने लण्ड पर रखते हुए कहा- शांति, यह लण्ड तुम्हारा है, इसे अच्छे से प्यार करो, इंज्वॉय करो.

शांति घुटनों के बल बैठ गई. मेरा अण्डरवियर नीचे खिसका कर शांति ने मेरा लण्ड निकाल लिया और सहलाने लगी. थोड़ी देर तक सहलाने के बाद शांति मेरा लण्ड चूसने लगी.

मैंने शांति को बेड पर लिटा कर उसकी ब्रा और पैन्टी निकाल दी. ब्रा निकालते ही शांति के कबूतर आजाद हो गये. शांति की बड़ी बड़ी चूचियों अपने हाथों में लेकर मैं खेलने लगा. शांति को अपनी चूत पर हाथ फेरते देखकर मैं समझ गया कि भट्ठी गर्म हो चुकी है और भुट्टा भूना जा सकता है.

शांति की चूत पर अपनी जीभ फेर कर मैंने उसकी गर्मी महसूस कर ली.

लोहा गर्म था, बस चोट करने की जरूरत थी. शांति के चूतड़ों के नीचे दो तकिये रखकर मैंने उसकी चूत हवा में टांग दी. अपने लण्ड पर कोल्ड क्रीम लगाकर मैंने लण्ड का सुपारा शांति की चूत के मुखद्वार पर रख दिया. हल्का सा दबाव डालते ही पूरा लण्ड शांति की चूत में समा गया.

शांति की उम्र के हिसाब से उसकी चूत काफी टाइट थी, शायद बहुत दिनों से चुदी नहीं थी, यह कारण था. लण्ड अन्दर जाते ही, आह की आवाज निकाल कर सिसकारी भरते हुए शांति बोली- आपका लण्ड बहुत तगड़ा है, साहब.

“मेरा लण्ड बहुत तगड़ा है, मतलब? और कितने लण्ड खा चुकी हो?” “हम पर विश्वास करिये, साहब. हमारे पति के अलावा आप पहले आदमी हैं जो हमारे बदन में घुसे हैं. हां, एक और ने कोशिश की थी लेकिन कर नहीं पाया था.” “कौन था वो?”

शांति बताने लगी: हमारे गांव का रामू चाचा.

रामू चाचा गांव में चाट का ठेला लेकर घूमता था और चाची घर पर कपड़े सिलना सिखाती थी. हम चाची से सिलाई सीखने जाते थे, वहीं चाचा से मुलाकात हुई.

चाचा स्वभाव के बहुत अच्छे थे, गांव में ठेला लेकर आते तो हमें फ्री में चाट खिलाते. कई साल तक यह सिलसिला चलता रहा. जब हमारी शादी तय हो गई तो हमने चाची से कहा कि हमारी शादी तय हो गई है, अब हम सिलाई सीखने नहीं आयेंगे. चाची से यह बात चाचा को पता लगी.

शाम को जब चाचा ठेला लेकर आये तो उन्होंने कहा कि कल एक बार आ जाना फिर भले मत आना.

हम समझे कि चाची कुछ समझाना चाहती होंगी इसलिये हम दूसरे दिन चाची से मिलने चले गये. हमने दरवाजा खटखटाया तो चाचा ने दरवाजा खोला, हम भीतर चले गये तो चाचा भी वहीं अन्दर वाले कमरे में आ गये, इधर उधर चाची के न दिखने पर हमने पूछा कि चाची कहाँ है तो चाचा बोले कि दवा लेने गई है, अभी आती होगी. आओ तब तक हमारा हिसाब चुका दो.

“आपका हिसाब? कौन सा हिसाब चाचा?” “इतने साल तुमको चाट खिलाये हैं, कभी एक पैसा नहीं मांगा. अब जा रही हो जाते जाते कुछ हमारे मन की करती जाओ.” “बताओ चाचा, जो बताओ कर दें.”

“बस एक बार अपनी चूची चुसवा दो.” “ये क्या कह रहे हो चाचा?”

“वही कह रहा हूँ, जो तुम सुन रही हो. चार दिन बाद चली जाओगी और उस आदमी के सामने बिछ जाओगी जिससे तुम्हारा कोई परिचय नहीं है. हमारे साथ तो तुम्हारा पुराना नाता है और फिर एक बार चूची चुसवा लेने से तुम्हारा कुछ घिस थोड़े जायेगा.”

हकीकत है कि चाचा ने कई साल तक हमें बिना किसी स्वार्थ के खिलाया था. इसलिये हम चाचा को मना भी नहीं कर पा रहे थे.

तभी चाचा हमारे करीब आये और वहां रखी कुर्सी पर बैठ गये. चाचा पट्टेदार जांघिया और चाची के हाथ की सिली हुई जेबदार बनियान पहने थे.

चाचा ने अपनी बनियान उतार दी और हमें अपने पास खींचकर हमारा कुर्ता ऊपर उठा दिया. हमारी ब्रा ऊपर खिसकाकर चाचा ने हमारी चूचियां निकाल लीं और चूसने लगे, हमें भी अच्छा लगने लगा था.

तभी चाचा ने हमारा कुर्ता निकाल दिया और हमारी चूचियां चूसते हुए हमारी नंगी पीठ पर हाथ फेरने लगे. हम नजर नीचे किये हुए चुपचाप खड़े थे. चूंकि हम नजरें नीचे किये हुए थे इसलिए हमारी नजर चाचा के जांघिये में होने वाली हरकत पर पड़ गई.

चाचा हमारी चूचियां चूस रहे थे और अपना लण्ड सहला रहे थे. चाचा ने एक बार अपने जांघिये में हाथ डालकर अपने लण्ड को हिलाया भी. चाचा का जांघिया तम्बू की तरह तन गया तो चाचा हमारे चूतड़ों को मलने लगे. चूतड़ों पर चाचा का स्पर्श पाकर हमारे बदन में चींटियां रेंगने लगीं.

तभी चाचा ने हमारी सलवार निकाल दी और हमें अपनी गोद में बिठा लिया.

चाचा का लण्ड हमारी गांड में चुभ रहा था लेकिन हमें अच्छा लग रहा था. चाचा ने हमारे जांघिये में हाथ डालकर हमारी चूत को छुआ तो हम पगला गये. चाचा हमें भगवान लग रहे थे जो हमें इतना सुख दे रहे थे.

हमें अपने सीने से सटाकर हमारी चूचियां अपने सीने के बालों पर रगड़ते हुए हमारे होंठ चूसने लगे. हमारी चूत कुलबुलाने लगी थी.

तभी चाचा उठे और हमें गोद में उठाकर पलंग पर ले गये. हमें पलंग पर लिटाकर चाचा ने अपना जांघिया निकाल दिया और अपने लण्ड पर हाथ फेर कर लण्ड की खाल आगे पीछे करने लगे. चाचा अपने लण्ड की खाल पीछे करते तो उनका लाल रंग का सुपारा दिख जाता.

पलंग के पास खड़े होकर चाचा ने अपना लण्ड हमें चूसने को कहा तो हम चूसने लगे. चाचा का लण्ड कड़क हो चुका था. चाचा का लण्ड चूसते हुए हम उसकी खाल आगे पीछे कर रहे थे और चाचा हमारी चूत पर हाथ फेर रहे थे.

तभी चाचा ने हमारे जांघिये का नाड़ा खींच दिया. चाचा का लण्ड हमारी चूत में जाने को बेकरार था और हम चुदवाने के लिए बावले हुए जा रहे थे.

चक्रव्यूह का आखिरी दरवाजा हमारा जांघिया था, चाचा ने उसका नाड़ा भी खींच दिया था. चाचा ने अपना लण्ड हमारे मुंह से निकाला और हमारी टांगों के बीच आकर हमारा जांघिया नीचे खींचा, हमने अपनी आँखें बंद कर लीं.

चाचा ने हमारा जांघिया नीचे खींचा लेकिन जांघिया नीचे खिसका नहीं क्योंकि चाचा ने नाड़ा खींचते समय उल्टी डोरी खींच दी थी जिससे नाड़ा खुलने के बजाय पक्की गांठ लग गई थी. चाचा गांठ खोलने में जुट गये, जब ऊंगलियों से नाड़े की गांठ नहीं खुली तो चाचा अपने दांतों से कोशिश करने लगे. चाचा के नाक व मुंह से निकल रही गर्म सांस हमारी नाभि और चूत के आसपास फैलने लगी.

जब चाचा दांतों से भी गांठ नहीं खोल पाये तो हमारे जांघिये को एक साइड में खिसका कर चाचा ने अपने लण्ड का सुपारा जांघिये के अन्दर डाला. जांघिया काफी टाइट था इसलिये लण्ड और चूत का मिलन नहीं हो पा रहा था. चाचा फुर्ती से उठे और कैंची ले आये, हमारा नाड़ा काट दिया.

नाड़ा कटते ही चाचा ने हमारा जांघिया निकाल फेंका और हमारी टांगें फैला दीं. हमारी चूत पर हाथ फेर कर चाचा ने अपना लण्ड सम्भाला, लण्ड को हिलाकर खाल को आगे पीछे करके टाइट किया और हमारी चूत के मुंह पर रख दिया.

हमारी कमर पकड़ कर चाचा ने धक्का मारा लेकिन लण्ड अन्दर नहीं गया. चाचा ने लण्ड को दोबारा सेट करके धक्का मारा तो लण्ड फिसल गया.

चाचा फिर से पलंग से कूदे और तेल की शीशी लेकर आ गये. चाचा ने अपनी हथेली में तेल लेकर लण्ड पर चुपड़ा और हमारी चूत के होंठ फैला कर हमारी कमर पकड़ ली. हमने आँखें बंद कर लीं. इससे पहले कि चाचा धक्का मारते, उनके लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी.

शांति की कहानी सुनकर मैं यह तय नहीं कर पाया कि उस दिन बदनसीब कौन था, शांति या रामू चाचा?

अपने चूतड़ उचकाते हुए शांति ने लण्ड का मजा लेते हुए कहा- चुदाई में इतना मजा आता है, मैंने आज महसूस किया है.

शांति की चुदाई के दौरान उसकी चूचियों से खेलते हुए मैंने उसके निप्पल कचोटे तो चिंहुक गई.

अब तो शांति रोज घर का काम निपटाने के बाद बेडरूम में आ जाती है और तरह तरह के आसनों का प्रयोग करके मुझे मजा देती है.

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