क्या कमी है मुझमें?

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मेरा नाम राहुल है, उम्र 24 साल है।

बात उन दिनों की है, गर्मी का मौसम था, मैं दिल्ली में रह रहा था, हम दोस्तों ने एक कमरा ले रखा था, जहाँ हमने कमरा किराये पर लिया हुआ था, वहीं गली के सामने पर एक मकान था जिसमें एक परचून की दुकान थी।

जिन अकंल की वो दुकान थी, उनकी सुन्दर सी कन्या थी, जिसका नाम सोना था। उस मकान में सोना और सोना के पिताजी रहते थे। नाम क्या वो खुद भी सोना थी जिसे देखते ही लण्ड फुंफ़कार मारने लगता था। मेरे दोस्त सोनू-मोनू उस पर जान छिड़कते थे क्योंकि जब उसके पिताजी को कहीँ जाना होता था तो सोना अपनी दुकान पर बैठती थी, मेरे दोनों दोस्त उसकी दुकान पर खड़े रहते थे चाहे कुछ लेना हो या ना लेना हो ! क्योंकि सोना के वस्त्र पहनने का तरीका कुछ ऐसा था, बदन से बिल्कुल चिपके हुए कपड़े और उसके शरीर की बनावट कुछ ऐसी थी, रंग़ गोरा, लम्बाई 5 फुट 7 इन्च चूचे आगे को निकले हुए और गाण्ड पीछे को निकली हुई, जिसे देखते ही मन करता था कि लण्ड निकाल कर उसकी चूत में डाल दो, मगर अपनी ऐसी किस्मत कहाँ, इसलिये लण्ड जी खड़े होते और सो जाते मगर सोना को मेरी एक बात अच्छी लगती थी या यह समझ लो कि बुरी लगती थी, वो यह कि मैं सबसे बात करता था मगर ना तो मैं उससे बात करता था और ना उसे देखता था।

इसी बात को लेकर सोना और मेरी पहली बार बात हुई। मैं सोना की दुकान पर गया, दोपहर का समय था, गली में सन्नाटा छाया था, सब अपने अपने घरों में सो रहे थे, मैंने दुकान पर जाकर आवाज लगाई- सर दर्द की गोली दे दो !

तो अन्दर से आवाज आई- अन्दर आ जाओ !

मैं अन्दर गया तो आवाज बाथरूम से आ रही थी। तो मैंने बोला- सर में दर्द है, गोली दे दो !

उसने कहा- दो मिनट रुको, अभी नहा रही हूँ, नहा कर देती हूँ, तुम बैठ जाओ।

फिर थोड़ी देर बाद आवाज आई- राहुल, सामने तौलिया रखा है, जरा पकड़ा देना !

मैं आपको बताना भूल गया कि जिस बाथरूम में सोना नहा रही थी, उसका दरवाजा नहीं था सिर्फ एक कपड़े की चादर टांग रखी थी।

तो मैंने तौलिया उठाया और बाथरूम के बाहर जाकर बोला- यह लिजिये।

उसने बाहर हाथ निकाला, कहा- लाओ, पकड़ाओ !

मैंने जैसे ही उसके हाथ में तौलिया रखा, उसने मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर खींच लिया और मैं बाथरूम के अन्दर खिंचा चला गया। जिसे देखकर लण्ड जी खड़े होकर फुंफ़कार मारते थे वो मेरे सामने बिल्कुल नग्न अवस्था में खड़ी थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ यह क्या हो रहा था।

उसने मुझसे बोला- देख रहे हो? कुछ कमी है मेरे अन्दर?

मगर मैं तो ऐसे खड़ा था जैसे 11000 वोल्ट का करंट लग गया हो।

तो उसने फिर से बोला- आपसे बात कर रही हूँ !

मैं हड़बड़ा कर बोला- जी सोना जी !

उसने मेरी शर्ट का कॉलर पकड़ा और अपनी तरफ खींचते हुए बोली- मुझे यह बताओ कि क्या कमी है मेरे अन्दर?

मैंने कहा- कुछ भी नहीं !

“फिर तुम मुझे देखते नहीं और देखते भी हो तो देखकर अनदेखा कर देते हो? पूरे मोहल्ले ऐसा एक लड़का बता दो जो मुझ पर लाईन ना मारता हो, जो मेरा दीवाना ना हो, मगर सोना सिर्फ तुम्हारी दिवानी है !”

मैं उसे देखता ही रह गया, वो मुझसे चिपकती ही जा रही थी, मैंने उसे कहा- चलो छोड़ो, झूठ अच्छा बोलती हो !

“नहीं, मैं झूठ नहीं बोल रही !” इतना कहते ही उसने गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंट मेरे होंटों पर रख दिये।

फिर ना तो मैंने कोई सवाल किया, ना उसने कोई जवाब दिया।

वो मुझे चूम रही थी, मैं उसे चूम रहा था। फिर जैसे चूमाचाटी अभियान खत्म हुआ तो मैंने उसके वक्ष को देखा तो उसकी चूचियों के दाने बिलकुल अकड़ कर खड़े हो गए थे।

मैंने एक भी पल बिना गंवाए एक हाथ से एक चूची को मसलना शुरु किया, दूसरी के दाने को होंठों के बीच में लेकर चूसने लगा।

मैं अचानक डर गया और रुक गया क्योंकि वो बुरी तरह कराह रही थी।

वो मुझ से बोली- क्या हुआ राहुल? रुक क्यों गये?

मैंने उसे कहा- तुम्हें दर्द हो रहा है !

तब उसने मुझे बोला- यह तो मीठा दर्द है, इसका तो अपना ही मजा है !

फिर क्या था, मैं जैसे ही उसकी तरफ बढ़ा, उससे पहले उसने नीचे झुक कर मेरा लण्ड पकड़ लिया। तब तक मेरा लण्ड पुरी तरहा खड़ा हो चुका था। उसने मुझे बोला- राहुल, इसे तो झेलना मुश्किल काम है !

मुझे लगा अच्छा खासा मौका हाथ से निकल रहा है।

फिर मैंने नीचे झुककर एक पैर सामने रखी बाल्टी पर रखवाया और नीचे बैठ कर चूत कि देखा तो देखता ही रह गया, उसकी चूत से चिपचिपा पानी सा निकल रहा था मैंने उससे तैलिया लिया और उसकी चूत को साफ किया। फिर मैंने उसे कहा- सोना कोई आएगा तो नहीं?

तो उसने कहा- मुझे तो याद ही नहीं रहा कि दुकान खुली है ! अगर कोई आ जाता तो?

मैंने ऐसे ही ऊपरी मन से बोला- चलो मैं जा रहा हूँ।

तो उसने मुझे बताया- पापा तो कल आएँगे !

मैं सोच ही रहा था, उससे पहले उसने कहा- दोपहर में कोई नहीं आता ! यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने कहा- मर्जी है तुम्हारी !

फिर क्या था, सोना ने एक पतला गाऊन पहन लिया और दुकान बंद कर दी। गाऊन उसके जिस्म से चिपका हुआ था जिसे देखकर मेरी हालत खराब हो रही थी, मैंने पीछे से जाकर सोना को गोद में उठा लिया तो सोना ने मुझे बोला- मेरे जानी, थोड़ा सब्र करो !

पर मगर मैंने उसकी एक ना सुनी, उसे कमरे में ले जाकर बिस्तर पर पटक दिया और उसका गाऊन उतार दिया। वो भी मुझसे कपड़े उतारने के लिये बोलने लगी।

मैंने कपड़े उतार दिये मगर अण्डरवियर नहीं उतारा क्योंकि मुझे पता था जाल में फंसी मछली को आराम से काबू करना पड़ेगा।

फिर मैं भूखे शेर की तरह टूट पड़ा सोना पर, चूमाचाटी करने लगा, मैंने उसका पूरा शरीर, ऊपर से लेकर नीचे तक, चाटा मगर जब मैंने उसके नीचे की तरफ से उसकी चूत चाटना शुरु किया तो उसने एक हाथ से अपनी चूची को मसलना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ अपनी चूत के दाने को मसल रही थी।

फिर थोड़ी देर बाद उसने मेरा सर अपनी चूत पर रोक कर रखा और कहने लगी- मेरे राजा, अब मैदान में आजा !

मैंने मौके की नजाकत को देखते हुए देर करना ठीक ना समझा और फिर जैसे ही लण्ड बाहर निकाला, सोना ने आँखें बंद कर ली। मुझे मालूम था कि लण्ड चूत पर रखते ही आँखें ही नहीं सारे छेद खुल जायेंगे।

मैंने उसे पैर फ़ैलाने को कहा तो उसने पैर खोल लिये। मैंने उसकी चूत पर लण्ड को रगड़ा तो उसने मुझे कसकर पकड़ लिया। मैं भी यही चाहता था, उसे खबर नहीं थी उसकी चूत की चौपाल बनने वाली है, मैंने चूत के मुख पर लण्ड रगड़ कर चूत का मुख गीला और चिपचिपा कर लिया। फिर मैंने पूरे जोर से धक्का मारा, लण्ड का टोपा चूत के मुख में फंसकर रह गया और सोना की चीख निकल गई।

मैं उसके ऊपर ही लेटा चूमाचाटी करता रहा, थोड़ी देर बाद वो नीचे से उछल उछल कर लण्ड चूत के अन्दर लेने की कोशिश करने लगी तो मुझे पता चल गया कि उसे मजा आने लगा है।

मैंने जोर से धक्का मारा, फिर क्या था लण्ड चूत की दीवार को छिलता हुआ आधा अन्दर समा गया, उसने चीखना-चिल्लाना शुरु कर दिया। मैंने बिना रुके दूसरा धक्का मारा तो सोना की आँखों में आँसू आ गये।

मैंने उसे समझाया- पहली बार ऐसा ही होता है !

कुछ देर में वो सामान्य हो गई फिर तो कभी वो मेरे ऊपर, कभी मैं उसके ऊपर !

काफी देर तक हमारा कार्यक्रम चलता रहा, वो मेरे ऊपर होती तो उछल उछल कर लण्ड चूत के अन्दर लेती और पूरा लण्ड जड़ तक अन्दर जाता।

फिर उसकी गति धीमी पड़ने लगी, मैं समझ गया कि उसका काम होने वाला है। मैंने अपनी गति बढ़ा दी।

जैसे ही वो झड़ने लगी, उसने मुझे कस कर जकड़ लिया, मैंने पूरी जान लगा कर धक्के लगाने शुरु कर दिए। उसके बाद उसने चिल्लाना शुरु कर दिया- राजा बस ! अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है !

उसकी आवाजें सुनकर मैं भी आपे से बाहर हो गया, 20-25 धक्के और मारे तो मैं भी जड़ने वाला था, मैंने लण्ड बाहर खींच लिया, देखा कि लण्ड खून में सना हुआ था।

मैंने मुठ मारना शुरु किया, जब मैं झड़ रहा था तब सोना आँखें बंद करके लेटी हुई थी। जैसे ही उसने आँखें खोली तो उसने मेरा लण्ड देखा।

तो उसने कहा- यह क्या लण्ड है या लण्ड का बाप? मुझे यकीन नहीं हो रहा कि यह मेरी चूत में घुसा होगा !

फिर वो कभी अपनी चूत को, कभी मेरे लण्ड को देख रही थी। उसके बाद वो और मैं साथ में नहाये और कुछ देर चूमाचाटी की, मेरा फिर से लण्ड खड़ा हो गया, मैंने उसे बोला- एक बार और हो जाये?

उसने कहा- राहुल, आज नहीं, कल मौका मिलेगा तो बुला लूँगी।

उसके बाद हमें जब मौका मिलता तो हम मौका देखकर चौका मार देते।

एक दिन की बात है, मैं सोना को चोद रहा था, उसकी बुआ ने हमें रंगे-हाथ पकड़ लिया। मैं अलग खड़ा था, उसकी बुआ मुझे ऊपर से नीचे की तरफ रही थी क्योंकि सोना और मैंने कुछ नहीं पहन रखा था।

उसके बाद क्या हुआ जानने के पढ़िये मेरी अगली कहानी !

मेरी पहली कहानी आपको कैसी लगी?

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