चूत की कहानी उसी की ज़ुबानी-1

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यह मेरी अपनी कहानी है. आज की तारीख में मैं एक दिन भी चुदवाए बिना नहीं रह सकती. मगर मैं कैसे इस तरह की बन गई, इसकी भी एक पूरी कहानी है जो मैं आज सब के सामने बिना कुछ भी छुपाए बताने जा रही हूँ. उस समय मेरी जवानी निखरनी शुरू ही हुई थी कि जब मैंने पहली बार अपनी बुर में 6″ से बड़ा और 2.5″ मोटा लंड डलवा लिया. वो भी अपने सगे मामा के लड़के का. उसकी कोई बहन नहीं है और मेरा कोई भाई. दोनों परिवार हम दोनों को सगे भाई बहन की तरह से मानते थे. हर राखी और भैया दूज वाले दिन वो मुझ से राखी बँधवाता और तिलक लगवाया करता था. वो कई बार हमारे घर पर आता था.

मगर जब उसने हाई स्कूल पास कर लिया तो वो आगे की पढ़ाई के लिए हमारे यहाँ ही आकर रहने लग गया क्योंकि कॉलेज हमारे घर से बहुत ही नज़दीक था और उसके घर से बहुत दूर. उस को अलग से एक कमरा दे दिया गया. वो उसी में रहा करता था और उस के कमरे में मैं नहीं जाती थी. इस तरह से दिन बीत रहे थे. जब भी मुझे पड़ाई में कोई भी प्राब्लम होती थी मैं उस से पूछ लेती थी.

कुछ दिनों बाद किसी कारण से कॉलेज को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया और मेरे मामा का लड़का अपने घर चला गया. उसके जाने के बाद उस कमरे को बंद कर दिया गया क्योंकि उसमें उसका सामान रखा हुआ था. जब कॉलेज फिर से खुला तो एक दिन पहले मुझे मेरी माँ ने कमरे की सफाई करने को कहा जो काम मैंने पूरा कर दिया. मगर काम करते हुए जब मैंने उस के पलंग के गद्दे के नीचे देखा तो वहाँ पर कुछ किताबें पड़ी दीखी. जैसे ही मैंने उनको साफ करने के लिए पकड़ा तो मैं देखती ही रह गई. वो पूरी अश्लील किताबें थी और बहुत सी तो नंगी फोटो वाली भी थी.

मैं उन्हें देखने लगी मगर अंदर से डर लग रहा था कि कहीं कोई आ ना जाए. मैं बड़ी होशियारी से दो तीन किताबें जिनमें फोटो वाली भी थी, छुपा कर अपने कमरे में ले आई. मैंने भी उनको अपने बिस्तर के नीचे छुपा कर रख दिया. फिर रात को आराम से पढ़नी और देखनी शुरू कर दी. जैसे जैसे मैं उन नंगी फोटो को देखती जाती थी, मेरे दिल की धड़कन बढ़ती जाती थी. किसी में कोई लड़की पूरी नंगी थी और किसी में कोई अपनी बुर को खोल कर दिखा रही थी. बहुत सी फोटो पूरी चुदाई की थी जिसमें एक लड़का अपना पूर खड़ा हुआ लंड लड़की की चूत में डाले हुए था.

ये सब देखकर मेरा शरीर काँपने लगा और कुंवारी नाजुक बुर में कुछ होने लगा. कुछ देर बाद मैंने किताब को पढ़ना शुरू किया तो मुझे ऐसा लग रहा था कि मुझे बुखार चढ़ने लग गया है और मेरे बूब्स जो अभी तक पूरी तरह से विकसित भी नहीं हुए थे, उनमें और बुर में पता नहीं क्या होने लगा.

अगले दिन मामा का लड़का आ गया और मुझे यह डर सता रहा था कि अगर उसे पता लग गया कि उसकी किताबें कम हैं या किसी ने चुरा ली हैं तो? इसलिए मैं उनको जल्दी से जल्दी वापिस रखना चाहती थी. मैं मौका देखकर उसके कमरे में रखने गई. मगर मेरी किस्मत जैसे ही मैं रख रही थी, वो कमरे में अचानक आ गया और मुझे देखने लगा.

इससे पहले कि मैं कुछ भी बोल पाती, उसने मुझसे पूछा- क्या ढूँढ रही हो? मैंने कहा- कुछ भी नहीं. तब वो बोला- झूठ ना बोलो, मुझे पता है कि तुमने पहले भी मेरी बुक्स उठाई हैं मगर मैं किसी से कुछ नहीं कह सकता था क्योंकि अगर किसी को कुछ पता लग जाता तो मैं किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं रहता. खैर तुम्हें अगर अच्छी लगी हैं तो यहाँ पर रखी हैं. उसने एक जगह दिखा कर मुझे बताया- तुम जब चाहो ले जाओ और फिर छुपा कर रख देना. हाँ इतना ख्याल रखना कि किसी को पता ना लगने पाए वरना बहुत मुश्किल हो जाएगी.

इस तरह से उसने मुझे गंदी गंदी सेक्सी बुक्स और पिक्चर वाली मैगजीन्ज़ देनी शुरू कर दी. इसका नतीजा यह निकला कि मैं बहुत गर्म होने लगी. अब लंड चूत, चुदाई आदि शब्द मेरे लिए आम हो गये थे. अब तो दिल करने लगा कि लंड मेरी भी बुर में जाए. मगर यह काम इतना आसान नहीं था क्योंकि मेरी किसी से भी दोस्ती नहीं थी.

अब मेरे मामा का लड़का, जिसका नाम धीरज था, मुझ पर बहुत ज़्यादा नज़र रखने लगा. शायद उसे अब मेरी बुर नज़र आती थी. उसने एक दिन मुझ से कहा- ये सब बेकार की मॅगज़ीन हैं, अगर कुछ मस्त देखना है तो मैं तुम्हें दिखा सकता हूँ कंप्यूटर पर.

एक बात और कि जिस कमरे में वो रहा करता था, वो मेरे कमरे के साथ वाला है और उसका एक दरवाजा मेरे रूम से लगा हुआ भी है मगर उसको हमेशा बंद करके रखा हुआ था जिससे कोई भी इधर उधर नहीं आ जा सकता था. दो दिनों बाद वो मुझसे बोला- रात को अपने कमरे का दरवाजा खुला रखना, जब सब सो जायेंगे तब मैं आकर तुमको मस्त माल दिखाऊँगा. मैंने कहा- ठीक है! और रात को अपने कमरे की तरफ से दरवाजा खुला छोड़ दिया ताकि वो जब चाहे खोल कर अंदर आ जाए.

रात तो लगभग साढ़े दस बजे उसने दरवाजा खोला और अपने लॅपटॉप के साथ मेरे कमरे में आ गया. आकर उसने अपना लॅपटॉप खोला और एक पिक्चर दिखाने लगा, उसमें चुदाई का पूरा नंगा डॅन्स था. जिसे देख कर मेरे आँखे लाल होने लगी. यह देख कर वो बोला- देख लिया ना … अब सो जाओ, कल बात करेंगे. इतना कह कर वो मुझको पूरी तरह से गर्म करके अपने कमरे में चला गया. पूरी रात भर में बुर में उंगली करके तड़फती रही.

अगले दिन उसने कुछ नहीं कहा. फिर उसके अगले दिन मुझसे बोला- क्यों और कुछ भी देखना चाहती हो? मैंने कहा- उस दिन तुम भाग क्यों गये थे? तब वो बोला- मेरा चला जाना ही ठीक था वरना कुछ और हो जाता. आज रात को भी अपना दरवाजा खुला छोड़ना, मैं एक नई फिल्म दिखाऊँगा.

रात तो वो फिर मेरे कमरे में आया और मुझे उसने बॉलीवुड की लगभग सभी हिरोईनों ही नंगी पिक्चर्स दिखाई. यह नहीं कहा जा सकता कि वो असली थी या मोर्फ की हुई. फिर उसने एक मशहूर हिरोईन की चुदाई किसी के साथ होते हुए दिखलाई. यह सब देख कर मैं पूरी गर्म होने लगी.

तब उसने मेरे होंठों को चूमा और बुर पर हाथ रख कर बोला- कुछ हो रहा है यहाँ पर? मैंने कहा- हाँ! तो उसने मेरी चड्डी के अंदर हाथ डालकर कहा- यह तो पूरी गीली हो चुकी है और रो रही है अपने यार को मिलने के लिए. फिर बोला- आज नहीं, कल एक और पिक्चर दिखला कर फिर इसको मिलवा दूँगा इसके यार से … तब तक और गर्म हो जाएगी और अपने यार से मिलते हुए रोएगी कम और खुश ज़्यादा होगी. मेरा भाई फिर मुझसे बोला- इसका यार देखोगी? और उसने अपनी पैन्ट उतार कर अपना खड़ा हु आ लंड जो लगभग 6 इंच लंबा था, दिखाया और बोला- इसको हाथ में पकड़ो और अपने हाथ से इसकी चमड़ी नीचे करके ऊपर नीचे करो. मैंने वैसे ही किया.

फिर भाई बोला- देखो, इसको मुँह में लेकर चूसो जैसे तुमने पिक्चर्स में देखा है. मैंने झट भाई का लंड मुंह में ले लिया क्योंकि मेरी बुर में आग लगी हुई थी तो मुझे कुछ बुरा नहीं लगा, मैं तो बस अपने भाई की बात मान रही थी. भाई बोला- जोर से … हाँ और करो … और जोर से!

फिर कुछ देर बाद भाई का लंड पूरी तरह से अकड़ गया और उसने एक धार छोड़ दी. मैंने झट से लंड मुँह से बाहर किया और बोली- इसने पेशाब कर दिया है. वो बोला- ध्यान से देखो, इसने अपना माखन निकाला है, इसको पी लो और अपनी सेहत बनाओ. इस तरह से मेरे ममेरे भाई ने मुझे लंड चूसने का चस्का लगवाया.

उसने मेरी बुर चूसी और अपना लंड चुसवाया मगर उसने अपना लंड मेरी बुर में डालने की कोई कोशिश नहीं की. कुछ देर तक चूस कर और चुसवा कर अपने कमरे में चला गया और जाते हुए बोला- जब बुआ और अंकल घर नहीं होंगे, तभी चुदाई का काम शुरू करेंगे. वरना कोई मुसीबत हो सकती है.

इस तरह से कुछ ही दिन बीते थे कि मेरे माता पिता को एक दिन के लिए कहीं जाना था. वो मुझे और धीरज को समझा कर कि घर का ख्याल रखना और चले गये. अब पूरा मैदान खाली था हमारे को अपना खेल खेलने के लिए.

अभी माता पिता को घर से गये आधा घंटा भी नहीं बीता था कि धीरज ने मुझे पूरी तरह से नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया. उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो कर शिकार करने को तैयार था. धीरज पूरा खेला हुआ और बुर चोदने का खिलाड़ी था, उसे पता था कि मेरी बुर में जैसे ही लंड घुसेगा, वो फटेगी और खून भी निकलेगा और मेरी चीखें भी निकल सकती हैं. अब उसे कोई चिंता नहीं थी कि अगर मेरी चीखें भी निकलें … क्योंकि बंद घर में सिवा उसके और कोई सुनने वाला नहीं होगा.

वो अपने साथ एक क्रीम की शीशी लिए हुए था, उसने उसमें से बहुत सी क्रीम निकाल कर मेरी बुर के अंदर अपनी उंगली डाल कर अच्छी तरह से लगा दी. उसके बाद उसने अपने लंड पर भी कुछ क्रीम लगा ली जिससे बुर और लंड पूरी तरह से चिकने हो गये.

मगर धीरज अभी भी जल्दी में नहीं था, उसने मेरे होंठों और मम्मों को बुरी तरह से चूमना चाटना और दबाना शुरू कर दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि मेरी बुर पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और वो लंड को अपने में ले लेना चाहती थी. आख़िर वो घड़ी भी आ गई और धीरज ने अपना लंड मेरी बुर पर रखा और मेरे मुँह पर अपना मुँह रख कर और मेरे मम्मों को जोर से दबा कर एक कस कर लंड का बुर पर धक्का मारा जिससे लंड का टोपा मेरी कुंवारी बुर में घुस गया और मैं दर्द से बिलबिलाने लग गई. धीरज ने एक और ज़ोरदार धक्का मारा और लंड आधा बुर में था. अब मैं चिल्लाने लगी- निकालो इसको … मैं नहीं सह सकती. मगर धीरज पर कुछ असर नहीं हुआ और वो धक्के मारता रहा तब तक जब तक कि उसने अपना पूरा लंड मेरी बुर में ना घुसा दिया. मैंने अपने एक हाथ से उसका लंड बाहर निकालने की कोशिश की मगर जैसे ही मेरा हाथ मेरी बुर के पास लगा तो हाथ की उंगलियाँ गीली हो गई. मैंने देखा कि वो खून से लथपथ थी.

यह देखकर मैं रोने लगी. तब धीरज ने कहा- तुम कोई चिंता ना करो, अभी तुम्हें पूरा मज़ा मिलना शुरू हो जाएगा, फिर तुम खुद ही लंड को माँगोगी. पूरा लंड मेरी बुर में डाल कर उसने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया. अब मैं उसकी गोद मैं उसकी तरफ मुँह करके अपनी बुर में उसका लंड डलवाए हुए थी. उसने कोई धक्का भी नहीं मारा और ना ही अपने लंड को अंदर बाहर करने की कोई कोशिश की. बस वो मुझे चूमता रहा और मेरे मम्मों को कस के रस निकलता रहा उन्हें ज़ोर ज़ोर से दबा दबा कर!

कुछ देर इस तरह से करके उसने मेरा सारा ध्यान दर्द से हटवा दिया और मैं खुद ही अपने चूतड़ हिलाने लग गई. बस फिर क्या था, उसने ताबड़तोड़ धक्के मारने शुरू कर दिया मुझे लिटा कर और मैं चुदती रही तब तक जब तक उसने अपने लंड को पूरी तरह से ढीला नहीं कर लिया. जब मैं पूरी तरह से चुद गई तो मैं अपने कपड़े पहनने लगी तो उसने कहा- नहीं अभी नहीं, तुम बस जा कर बुर को धोकर वापिस आ जाओ, अभी फिर से यही खेल खेलना है.

इस तरह से उसने मेरी बुर को दुबारा से चाटना शुरू कर दिया और बहुत देर तक चाटता रहा और तब मैं पूरी तरह से गर्म ह कर अपनी बुर को उसके मुँह के आगे ऊपर नीचे करने लग गई. यह देखकर उसने अपना लंड, जो पूरी तरह से खड़ा हुआ हुआ था, मेरी फटी बुर में फिर से डाला. इस बार भी बहुत दर्द हुआ मगर उतना नहीं और मुझे कुछ अच्छा भी लगने लगा. इसका कारण यह था की मैं दिमागी तौर से पूरी सेक्सी बन चुकी थी गंदी किताबें और नंगी फोटो देख देख कर. इस तरह से उसने मुझे उस रात तीन बार चोद कर पूरी चुदक्कड़ और लंड की दीवानी बना दिया.

उसके बाद तो यह खेल जब भी मौका मिलता खेला जाता रहा.

कहानी जारी रहेगी. लेखिका पूनम चोपड़ा की इमेल नहीं दी जा रही है.

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