पति के दोस्त ने मातृत्व का सुख दिया

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दोस्तो, मेरा नाम तृप्ति है. मैं गुजरात की रहने वाली हूं. शादीशुदा हूं और अपने पति से बहुत खुश हूं. लेकिन मुझे वो मां बनने का सुख नहीं दे सकते हैं, इसलिए यह घटना घटी थी.

पहले आप सभी को मैं अपने बारे में बता दूँ कि मैं अभी 25 साल की हूं. मेरे पति के हिसाब से मैं बहुत सेक्सी हूं और मेरा फिगर 32-28-34 का है. ज्यादातर में साड़ी ही पहनती हूं, लेकिन कभी कभी विलायती पहनावे वाले कपड़े जैसे जींस शर्ट, लॉन्ग स्कर्ट, लॉन्ग वन पीस ड्रेस, भी पहन लेती हूं.

एक दिन पति का एक दोस्त कोई कारणवश हमारे शहर में ही शिफ्ट हुआ. उसके पास रहने को कोई घर भी नहीं था. बड़े शहर में एकदम से घर मिलना कितना मुश्किल होता है, ये तो आप जानते ही हो.

पति के दोस्त के बारे में बताऊं तो वो अमिताभ बच्चन से भी ऊंचा होगा … तक़रीबन छह फुट सात इंच की हाइट होगी उसकी … और उसकी छाती भी काफी लंबी चौड़ी थी, एकदम गठीला बदन था. उसके आते ही मैं उसकी तरफ आकर्षित हो गई, लेकिन मैं चाहती थी कि पहल वो ही करे.

मेरे पति रोजाना जल्दी जॉब पे चले जाते थे और उसके दोस्त मयूर देर से उठता था. मैं उसको जगाने जाती थी … तो उस वक्त एक बेबी डॉल टाइप की नाइटी पहन कर जाती थी. उसे जगाने के बहाने और उसको चाय और ब्रेकफास्ट देने जाती थी, तो उसके सामने पूरा झुक के अपने मम्मों का दीदार कराती थी. वो भी मेरे मस्त मम्मे देख कर मुस्कुरा देता था, लेकिन मैं उसकी भाभी थी, इसलिए शायद वो मेरे बारे में कुछ ग़लत नहीं सोचना चाहता था.

कुछ दिनों में हम दोनों की आँखों ने एक दूसरे की चाहत को समझ लिया था. वो मुझसे खुल कर मजाक करने लगा था और मुझे भी उसका मजाक करना बहुत पसंद आने लगा था.

हम दोनों एक दूसरे को बहाने से टच भी करने लगे थे. इसकी शुरुआत भी मैंने ही की थी. मैं उसको जब जगाने जाती तो उसको हिला कर उसे जगाती और वो भी मेरा हाथ पकड़ कर कह देता कि अभी और सोने का मन है … प्लीज़ मत जगाओ न! तो मैंने उसके हाथों में अपने उस हाथ को फंसा रहने देती और दूसरे हाथ से उसे बांह पर चिकोटी काट कर उठने का कहती.

एक दिन उसने सुबह सुबह अपनी चादर हटाई हुई थी और उसका लंड खड़ा हुआ था. वो इस वक्त एक ढीला सा बॉक्सर पहने था, जो सोने की वजह से एक तरफ से खुला सा था. मैंने ध्यान दिया कि उसने अन्दर फ्रेंची नहीं पहनी हुई थी. उसका मोटा लंड देख कर मेरी आह निकल गई और मैं उसके लंड को एकटक देखने लगी.

उसी दिन मैंने जाल बिछाया और उसको उठा कर चाय आदि देने के बाद बाथरूम में चली गई उधर उसके खड़े लंड के नाम से अपनी फुद्दी में उंगली की और हस्तमैथुन करके नहायी. नहाने के बाद मैं सिर्फ तौलिया लपेट कर मयूर के सामने आ गई और उसके साथ हंसी मजाक करने लगी.

मयूर मेरी आधी चूचियों को तौलिये से देख रहा था. मैंने आँख मारी और कहा- ओ हैलो … किधर नजर है? वो सकपका गया और झेंप कर बोला- आप बहुत सेक्सी लग रही हो. मैंने उसकी तरफ वासना से देखा और कहा कि तुम भी बहुत हॉट हो मयूर.

बस इसके बाद हम दोनों का नजरिया बदल गया था. अब वो मुझे बड़ी हसरत भरी निगाह से देखने लगा था. सुबह मम्मों को दिखाने का अंदाज और भी ज्यादा बिंदास हो गया था. मैं उसके बगल में बैठ कर उसे जगाने लगी थी. वो भी मेरी कमर को छूते हुए मेरे साथ मस्ती करने लगा था.

मतलब हम दोनों अब बस शर्मो-हया के बाँध के टूटने का इन्तजार कर रहे थे.

एक दिन मेरे पति दो दिन के लिए आउट ऑफ़ सिटी गए हुए थे. उस दिन दोपहर को जब मैं खाना बना रही थी, तब मयूर किचन में आया और उसने मुझे पीछे से कस के पकड़ लिया. मैं एकदम से हड़ाबड़ा गई- ये तुम क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा. मयूर- अपनी भाभी को प्यार कर रहा हूं … और वैसे भी मेरे अलावा यहां पे कौन है, जो आपको और मुझे देखेगा. मैं- लेकिन ये सब गलत है. मयूर- भाभी को प्यार करना तो देवर का हक है. ऐसा बोल कर वो अपना लंड मेरी गांड पे फिराने लगा.

मैं भी धीरे धीरे गर्म हो रही थी. उसने मुझे गोदी में उठाया और अपने बेडरूम में ले गया. मैं उससे झूठ मूठ में कहे जा रही थी कि ये सब गलत है ऐसा मत करो. लेकिन मुझे भी उसके साथ सेक्स का मजा लेना था … इसलिए मैंने उसको कुछ भी नहीं कहा. वो भी समझ रहा था कि मैं उसके साथ सेक्स करना तो चाहती हूँ लेकिन नारी सुलभ विरोध कर रही हूँ.

उसने मुझे एक खिलौने जैसे अपनी गोद में उठाया हुआ था. मैं उसकी गोद में काफी सुकून महसूस कर रही थी. वो मुझे चूमे जा रहा था और उसका मर्दाना चेहरा मेरी चूचियों को मसले दे रहा था.

उसने कमरे में ले जाकर मुझे बेड पे लिटा दिया और खुद भी मेरे ऊपर आकर कुछ इस तरह से छा गया कि मैं पूरी की पूरी उसके नीचे ढक गई थो. वो मेरे होंठ को चूसने लगा और एक हाथ से मेरे मम्मों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा.

सच में उसकी बड़ी सी हथेली से मेरे मम्मे एकदम से मसले जा रहे थे. आह … उम्म म्म्म म्मम … बड़ी ही मस्त फीलिंग थी … मैं आपको उस अनुभव को शब्दों में बता ही नहीं सकती. मैं भी धीरे धीरे अपने झूठे विरोध को छोड़ कर उसका साथ देने लगी थी और उसके सीने पर हाथ फेरते हुए उसकी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिए. जल्दी ही मैंने उसकी शर्ट को उतार दिया.

शर्ट हटते ही उसका चौड़ा सीना मेरे सामने था. आह … क्या बॉडी थी उसकी … मैं कुछ भी सोचे समझे बिना, उसे चूमने लगी. हम दोनों सेक्स के मदहोश होने लगे थे. अगले कुछ ही पलों में उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए. अब बस मेरे तन पर सिर्फ ब्रा और पैंटी रह गए थे, मैंने भी उसके सारे कपड़े उतार दिए.

उसने बिस्तर के नीचे खड़े होकर अपना लंड मेरी तरफ दिखाते हुए हिलाया. क्या गजब का मूसल लंड था. उसके खड़े लंड की लम्बाई लगभग सात इंच की रही होगी. मैंने उसके लंड को देखा और फिर उसकी आंखों की तरफ देखा. उसने अपने लंड को हिलाते हुए अपने खुद के होंठों पर जीभ फिराई. मैं उसका इशारा समझ गई और मैंने मयूर के लंड को अपने हाथ से छुआ. जैसे ही मेरा स्पर्श उसके लंड पर हुआ, उसका लंड एकदम से फनफना उठा. मैंने उसके लंड को सहलाया और उसकी टोपी को आगे की चमड़ी से आजाद कर दिया.

उसके सुर्ख गुलाबी सुपारे पर एकदम से कांच जैसी चमक थी, जो कि उसके लंड के प्रीकम के कारण लंड को लिसलिसा बना चुकी थी. उसने अपने लंड को मेरे होंठों की तरफ किया तो मैं भी लंड चूसने का इशारा समझ कर खुद से लंड चूसने को आतुर हो उठी थी. चूंकि मैं अपने पति का लंड हमेशा चूसती रहती हूँ इसलिए लंड चूसने में मुझे कोई गुरेज नहीं था. मैं उसके लंबे 7 इंच के लंड पे टूट पड़ी और सुपारे पर जीभ फिराना शुरू करते हुए उसके बड़े और मोटे लंड को जोर जोर से चूसने लगी.

वो भी अपने लंड पर मेरे मुँह की गर्माहट पाकर मस्त हो उठा और आगे पीछे करते हुए लंड से मुँह की चुदाई करने लगा.

मैं भी अब बैठ कर उसके लंड से खेल रही थी तो उसको भी मेरे मम्मों से खेलने का मौका मिल गया था. मयूर ने मेरी ब्रा को एक झटके से अलग कर दिया और मेरे चूचे हवा में फुदकने लगे. मयूर मेरे मम्मों के साथ खेलने लगा. उसने अपनी बड़ी हथेलियों से मेरी चुचियों का लगभग भुर्ता बना दिया था. तकरीबन दस मिनट तक अपने लंड को मुख मैथुन का सुख दिलाने के बाद उसने मेरी पेंटी उतार कर मुझे पूरी नंगी कर दिया और मेरी टांगें खींच कर मेरी चूत को अपने मुँह के नजदीक कर लिया. वो मेरी फुद्दी को अपनी लम्बी और खुरदुरी जीभ से ऐसे चाटने लगा … जैसे वो किसी आम की कली का गूदा चाट रहा हो. मुझे भी इतना मजा आ रहा था कि मैं चुदास की मस्ती में ख़ुशी के मारे चिल्ला रही थी.

बाद में उसने मुझे सीधा लेट जाने को कहा. उसने अपने लंड पर और मेरी फुद्दी के छेद पे थूक लगाया. फिर वो अपने लंड को मेरी फुद्दी के आसपास सहलाने लगा. उसके इस तरह से लंड घिसने से मुझे बड़ी कामुकता और व्याकुलता का अहसास हुआ जा रहा था. मैं इस वक्त ऐसे महसूस कर रही थी कि कब इसका लंड मेरी फुद्दी की खुजली को मिटाने के लिए अन्दर घुस जाए.

मैं अपनी गांड उठा कर उसके लंड को अन्दर पेलने का इशारा किया, तो उसने मेरी फुद्दी के छेद पर लंड का सुपारा रखा और मेरी फुद्दी की फांकों में सुपारा रगड़ा. मुझे तो मानो तरन्नुम आ गई थी. हालांकि उसका टमाटर के आकार का सुपारा मेरी चूत को उत्तेजित कर रहा था, लेकिन बेचारी फुद्दी को इस वक्त अगले ही पल होने वाले दर्द का अहसास ही नहीं था.

फिर एक भूचाल सा आया और मयूर ने एक ही झटके में अपने लंड मेरी फुद्दी में अन्दर तक डाल दिया. मैं एकदम से चिल्ला उठी- आईई … मांआआआ … मर गई …

मेरी आंखें चौड़ी गई थीं. लम्बी चीख के कारण मेरा मुँह खुला का खुला रह गया था. सांस हलक में फंस गई थी. बहुत ही बड़ा लौड़ा था. उसने मेरी हालत देखी, तो वो रुक गया और मुझे चूमते हुए सहलाने लगा. कुछ पल यूं ही रुकने के बाद मेरी सांस लौटी और मैं जैसे ही दर्द से चिल्लाने को हुई, मयूर ने अपने होंठों का ढक्कन मेरे मुँह पर लगा दिया. उसके होठों ने मानो मेरे होठों को जकड़ सा लिया था. इस वक्त मैं पूरी तरह उसके शिकंजे में थी. कुछ देर के दर्द के बाद मुझे लंड अपना सा लगने लगा और मेरी गांड ने उठकर उसको इशारा किया.

मयूर का लंड अभी बाहर था. उसने मेरे होंठ दाब कर अगला तेज झटका मारा और पूरा लंड मेर फुद्दी की जड़ से टकरा गया. मुझे फिर से दर्द हुआ, पर कुछ देर बाद सब कुछ सामान्य हो चला था.

अब वो मुझे जैसा चोदना चाहता था, वैसे ही मैं उसके साथ करती गई. उसने काफी देर तक भिन्न भिन्न आसानों में मेरी फुद्दी का भोसड़ा बनाने की पूरी क्रियाविधि को अंजाम दिया. उसने मुझे तकरीबन बीस मिनट तक चोदा. इस बीच में दो बार झड़ चुकी थी.

फिर मयूर मुझसे कहने लगा कि मैं झड़ने वाला हूं. मैंने भी उससे अपनी अधूरी इच्छा पूरी करने के लिए कहा कि हां मयूर आज तुम मेरी फुद्दी में ही अपना बीज निकाल दो … मुझे माँ बना दो. यह सुनकर मयूर और भी तेजी से लंड को फुद्दी में अन्दर बाहर करने लगा. मैं भी गांड उठा कर उसका साथ देने लगी थी, मैं हांफने लगी थी. तभी उसने एक तेज आह … भरते हुए अपने लंड का गर्म लावा मेरी फुद्दी के अन्दर ही छोड़ दिया. उसका थोड़ा सा रस अपनी मंजिल की ओर गया और बाकी का बाहर निकल गया.

बाहर निकला हुआ रस में उंगली से लेकर जीभ से चाटने लगी. वो मुझे चूमे जा रहा था. उसका लंड दो मिनट बाद सिकुड़ा और मेरी फुद्दी से बाहर आ गया वो उठ गया, लेकिन मैं नहीं उठी, अपनी चूत पसारे फैली पड़ी रही.

उसने मेरी तरफ देखा, तो मैंने अपने पेट पर हाथ फेर कर इशारा किया. वो समझ गया कि मैं लंड रस को गर्भाधान के लिए जज्ब कर रही हूँ.

कुछ देर बाद हम दोनों ने कपड़े पहने. मयूर ने मुझे एक प्यारी सी और लंबी सी किस की और मुझे अपनी बाहों में भर लिया. वो कहने लगा- मुझसे कभी दूर मत होना जान.

फिर मैंने खाना बनाया और हम दोनों ने एक ही प्लेट में खाना खाया. दोनों साथ में कमरे में आ गए और उसने मुझे दूसरी बार चोदा. इस बार मैं माहवारी से नहीं हुई थी. मुझे बड़ा सुकून हो रहा था. कुछ हफ्ते बाद मुझे सुबह से ही अजीब लग रहा था और एक बार वोमिट भी हुई तो मैंने प्रेग्नेंसी का रिपोर्ट करवाई, तो वो पॉजिटिव आई. ये बात सबसे पहले मैंने मयूर को बताई. आखिर मैं उसके लंड से चुदने की वजह से ही तो मां बन सकी थी. बाद में मैंने मेरे पति को भी बताया तो वे भी बहुत खुश हो गए.

अब जब भी मेरे पति नहीं होते, मैं और मयूर सेक्स का मजा लेते और साथ में टाइम स्पेंड भी करते. इस तरह में मयूर की वजह से मां बन सकी.

तो दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताना कमेंट करना. अच्छी लगी हो तो लाईक भी करना और कोई सुझाव हो तो वो भी मुझे खुल कर बताना. आप सभी पाठकों को मेरा धन्यवाद. मेरा ईमेल है [email protected]

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