वो मेरे प्यार में पागल: कॉलेज गर्ल का सच्चा प्यार

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मेरे प्रिय पाठको, आप सबका धन्यवाद जो आपको मेरी पिछली हिन्दी सेक्स स्टोरीज मेरी बीवी की सहेली के साथ डर्टी सेक्स और बस के सफर में मिली कामुकता भरी एक अनजान भाभी

अच्छी लगी. मुझे कुछ लोगों के अभिप्राय भी मिले.

यह नई चुदाई स्टोरी मेरे कॉलेज लाईफ में घटी हुई सच्ची कहानी है, बहुत दिन से सोच रहा था कि शेयर करूँ, शायद मेरी यह कहानी उसी लड़की ने पढ़ ली तो वो मुझे जरूर काल करेगी.. देखते हैं.

मैंने 11वीं कक्षा में प्रवेश लिया, यूनिट टेस्ट शुरू हुए, तब के टाईम में सभी कक्षाओं के छात्रों की एग्जाम की सिटिंग उनके सरनेम के हिसाब क्रम बद्ध होकर बनती थी. मतलब आपके आगे या पीछे दूसरे सेक्शन के लड़के लड़कियां भी बैठ सकते थे.

मेरे पीछे एक लड़की का नंबर था, उसका नाम वैशाली नाम है. मैं पेपर लिखने बैठा, वो पीछे से कभी मेरे पैर को धक्के मारती तो कभी मेरी पीठ को हाथ लगाती. मुझे लगा कि ये गलती से लगता होगा.

एग्जाम के बाद मैंने एक जगह इंग्लिश की ट्यूशन जाना शुरू की. वहाँ पर भी वही लड़की आती थी. क्लास का टाईम सुबह साढ़े पांच बजे रहता था. वैसे तो सुबह के टाईम हम चार लड़के और 6 लड़कियां रहते थे. उस टाईम ट्यूशन के लिए नीचे बैठते थे. इस दौरान मैंने गौर किया कि ट्यूशन के टाईम मैं इधर उधर देखता तो वैशाली मेरी ही तरफ देखती रहती थी.

सुबह क्लास के चलते हम दोनों ही जल्दी आ जाते थे. वो मेरे पास खड़ी रहती और मुझे एकटक देखती रहती. मैंने एक बार उससे पूछा- तुम मुझे ऐसे क्यों देखती रहती हो? तो उसने झट से जवाब दिया- तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो. उसके इस जबाव से मेरा तो होश ही उड़ गए, मैं हक्का बक्का रह गया.

फिर प्रॅक्टीकल में तो उसने कहर ही कर दिया था. दो दो स्टूडेंट को मिल के प्रॅक्टीकल करना होता था, वो जान बूझ कर मेरे साथ ही रहती थी. उस टाईम वो मेरे किसी किसी अंग को जान बूझ कर छूती थी. प्रॅक्टीकल के दौरान वो अपने चुचे मेरे हाथ या पीठ पर घिसती रहती थी. उस टाईम में बहुत ही सीधा साधा स्टूडेंट था. ये सब बातें मुझे समझ में नहीं आ रही थीं.

ऐसे ही दिन गुजरते गए. वो मुझे चाहती थी, ये मुझे समझ में नहीं आ रहा था.

जैसे तैसे 11वीं का साल बीत गया और बारहवीं क्लास चालू हुई. उसी दौरान मेरे घर पर बहुत बड़ा हादसा हुआ, जिससे मैं पूरी तरह टूट गया था. पूरी ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई थी. मैं पढ़ाई बहुत ध्यान से करने लगा. वैशाली भी मुझे बहुत हेल्प कर रही थी.

फिर जो नहीं होना चाहिए था वहीं हुआ, मैं एक विषय में फेल हो गया. फिर मैंने एडमिशन पॉलिटेक्निक में ले लिया.

मैं अक्तूबर में बारहवीं के फेल विषय की परीक्षा देने गया तो वहाँ मैंने वैशाली को देखा. मैंने उससे बात की, तो वो भी उसी विषय में फेल हुई थी, जिसमें मैं फेल हुआ था. परीक्षा के दौरान उसने मुझे बहुत हेल्प की, जिससे मैं पास हो गया और वह दोबारा फेल हो गई थी.

मैंने फिर पालिटेक्निक के गणित की ट्यूशन लगाई. यहाँ पे मुझे समझ में आया कि आपकी तकदीर वापिस मौका देती है, आपको उसे समझना है. जहाँ पर मेरी ट्यूशन थी, वहीं वैशाली भी ट्यूशन के लिए आती थी और एक गली छोड़ कर उसका घर था. हमारी बातें वापिस शुरू हो गईं.

एक दिन मैं ट्यूशन के लिए आया तो देखा क्लास को लॉक लगा है, तभी वहीं से वैशाली जा रही थी. वो बोली- अरे सर तो काम से बाहर गाँव गए हैं. तभी बारिश शुरू हो गई.. फिर उसने मुझसे कहा- चलो ना मेरा घर पास में ही है. मैंने तुरंत “हाँ” कर दी. उसके घर पर पहुंचे तो घर पर ताला लगा था. मैंने पूछा- वैशाली क्या तेरे घऱ पर कोई नहीं है? तो बोली- हाँ सब लोग शादी के लिए गाँव गए हैं, मैं अकेली हूँ. मैंने उससे बोला- ठीक है, मैं चलता हूँ. उसने जवाब दिया- मैं तुझे क्या खा जाऊंगी.. चलो अन्दर चाय पी लो.. फिर चले जाना.

हम लोग घर के अन्दर आ गए. उसने दरवाजा लगा लिया. पानी का ग्लास ले कर आई और पूछा- क्या लोगे दूध या चाय? पता नहीं क्यों.. लेकिन एकदम मेरे मुँह से निकल गया ‘दूध..’

वो मेरी तरफ देखने लगी. मुझे लगा इसको अच्छा नहीं लगा. वो पास आई और झट से उसने टॉप निकाल दिया और ब्रा खोल के चुची मेरे मुँह के सामने करके बोली- लो ताजा दूध पी लो.. ये सब देख कर मैं तो एकदम से शॉक हो गया था. फिर उसने मेरे सर को अपनी चुची पे रखा और बोली- जल्दी करो.. पियो ना इसे.. इस पल के लिए मैंने तीन साल इंतजार किया है.

मैं वैशाली की चुची जोर जोर चूसने लगा. वो मस्ती से बोलती जा रही थी- आह.. चूस लो.. काट लो इसे जान.. और जोर से चूसो इसे.. आहहह.. वो मेरा मुँह जोर से अपने चुचे पर दबाने लगी. मैंने उसके दोनों चुचे बारी बारी चूसे.

वैशाली बहुत ही गरम हो चुकी थी, उसने मेरी पैन्ट निकाली और मेरा लंड हाथ में लेकर जोर जोर से हिलाने लगी. फिर नीचे बैठ कर मुँह में लेकर लंड चूसने लगी. मैं तो जैसे सातवें आसमान में ही था. करीब दस मिनट बाद मैंने उससे कहा- हट जाओ… मेरा निकलने वाला है. लेकिन वो हटी ही नहीं और आखिरी बूंद मेरे लंड से निचोड़ कर सारा वीर्य पी गई. फिर उठ के वो मेरे साथ किसिंग करने लगी. उसने मेरे वीर्य का टेस्ट भी मुझे कराया था, जो मैंने लाईफ में पहली बार लिया था.

फिर वैशाली उठ कर चाय बनाने के लिए किचन में चली गई. उसने अब भी अपना टॉप नहीं पहना था. मैं भी उसके साथ किचन में गया. मेरी पैन्ट निकल चुकी थी तो मैं नीचे से नंगा ही था और वो ऊपर से नंगी थी. हम लोग बातें करने लगे. उसने बताया- मैं 11वीं कक्षा से तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.. मैंने तुम्हें कितनी बार लाईन दी, लेकिन तुम थे कि कुछ समझ ही नहीं रहे थे. मैंने उससे माफी मांगी.

वो बोली- तुमने मुझे जो तड़पाया है इसका तुम्हें हरजाना देना पड़ेगा. मैंने बोला- ठीक है बोलो तुम्हें क्या चाहिए? तो वैशाली बोली- तुम मुझे इस तरह खुश करो कि मैं जिंदगी भर ये दिन भूलना भी चाहूँ तो नहीं भूल सकूँ.

मैं समझ गया कि मुझे क्या करना है. मैंने उसकी सलवार निकाल दी.. फिर पैन्टी निकाल दी. उसको किचन की पट्टी पर बैठने के लिए बोला. बाजू में ही शहद की बोतल रखी थी, मैंने वो खोली और शहद उसकी बुर और चुचों पर डाल दी.

अब मैं उसकी चुत चाटने लगा.. ये सब उसके लिए भी नया था. वैशाली गरम हो चुकी थी. वो अपनी गांड उठाकर मेरा साथ देने लगी.. बस 5 मिनट बाद उसका शरीर अकड़ गया, वो बोली- आह.. मैं जा रही हूँ.. आह.. जान.. मैंने ये जिंदगी में पहली बार.. महसूस किया है.. आहह.. आह.. मैं मर गई… मैं समझ गया कि वैशाली का पानी छूटने वाला है. मैंने अपना मुँह उसके चुत पर दबा कर रखा.. और पूरा का पूरा रस पी गया. वो बहुत जोर-जोर साँसें ले रही थी.

थोड़ी देर बार वैशाली सामान्य हो गई. वो इतनी खुश हो गई कि मेरे पूरे शरीर पर किस करने लगी. फिर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. तभी वैशाली बोली- प्रकाश, इससे पहले तुमने किसी से सेक्स किया है? मैं बोला- नहीं.. “फिर तुम ये सब कैसे जानते हो?” तो मैंने उसे अन्तर्वासना साईट के बारे में बताया कि उधर की चुदाई की कहानी पढ़ पढ़ कर ये सब सीख गया हूँ. वो बोली- मुझे भी दिखाओ वो साईट..

मैंने उसे मेरे मोबाईल में साईट ओपन की और कहानियां पढ़ने के लिए दीं. वो जैसे जैसे कहानी पढ़ रही थी, वैसे ही उसके चेहरे के हाव भाव बदल रहे थे. वो बार बार चुत में हाथ डाल रही थी. मैंने उससे बोला- यार, चाय तैयार हुई कि नहीं.. बोली- रुक ना.. तुझे दूध पिलाया ना अभी, जरा रुक जा.

थोड़ी देर बाद उसने उबली हुई चाय कप में डाली.. और बोली- तू चाय पी, मुझे एक काम करना है. ये बोल कर वो नीचे बैठ गई और मेरा लंड जोर जोर से चूसने लगी. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि ये क्या कर रही है. वो इस तरह चूस रही थी कि कोई लंड चुसाई में माहिर औरत भी क्या लंड चूसेगी. वो जोर जोर से लंड चूसे जा रही थी.

मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने उसको बोला- वैशाली मैं झड़ रहा हूँ. तो उसने उसका चाय का कप लिया और मेरे लंड के सामने लगाकर पूरा वीर्य चाय में डलवा लिया. मैंने उससे पूछा- ये क्या कर दिया वैशाली.. चाय फेंक दे. वो बोली- तुझे क्या मालूम कि मर्द के वीर्य में क्या क्या प्रोटीन और विटामिन रहते हैं.. तू शांत हो कर बैठ. ये असली मलाई वाली चाय है. फिर उसने चम्मच लेकर मेरा वीर्य चाय में घोल दिया और मजे से चाय पीने लगी. चाय पीते हुए दोनों एक दूसरे के शरीर से खेल रहे थे. मेरा लंड खड़ा हो चुका था.

मैंने उससे कहा- चलो असली खेल खेलते हैं. मैंने उसे किचन में ही टेबल पर लिटाया तो वैशाली बोली- यहाँ नहीं.. ये मेरा पहली बार है, तो बेडरूम में चलो.

बेडरूम में उसने नीचे चादर बिछाई और लेट गई. मैंने चुत पे लंड रखा और बोला- अगर दुखेगा तो बोलना. फिर मैं धीरे धीरे चुत में लंड डालने लगा.. तभी उसने मुझसे कहा- मैं अगर चिल्लाई तो मेरा मुँह बंद कर देना लेकिन रुकना नहीं. मैंने उससे बोला- तेल की शीशी दे दे.

मैंने थोड़ा तेल मेरे लंड पे लगाया और उसकी बुर पर लगाया और धीरे धीरे चुत में लंड पेलना शुरू कर रहा था. उसके चेहरे तरफ देखा तो शायद उसे बहुत ही ज्यादा तकलीफ हो रही थी लेकिन वो कुछ भी बोल नहीं थी. उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे. मैं थोड़ा रुका और किस करने लगा.. और उसके चुचे जोर जोर से दबाने लगा. फिर थोड़ी देर बाद आहिस्ता आहिस्ता पूरा लंड चुत में पेल दिया. वैशाली को पता भी नहीं चला कि पूरा लंड चला गया है.

उसने पूछा- क्या पुरा लंड मेरी चुत में गया? मैं बोला- कब का.. तो बोलती है- यार तू तो सेक्स में माहिर हो गया है.. तुम्हें सब मालूम है. तो मैं बोला- ये सब अन्तर्वासना साईट का नतीजा है.

फिर मैं जोर जोर से उसकी चुत मारने लगा. वो भी गांड उठाकर मेरा साथ दे रही थी. बस 5 मिनट बाद वैशाली का शरीर अकड़ गया. वो बोली- प्रकाश मुझे कुछ हो रहा है.. जैसे मैं पेशाब कर दूँगी.. वैशाली अपनी बुर का पानी छोड़ कर शांत हो गई.

सामान्य होने के बाद मैंने उससे पूछा- तेरा पहली बार है ना ये.. तो चुत की झिल्ली नहीं टूटी… मतलब तेरी बुर से खून नहीं आया. तो वो गुस्सा हो गई और बोली- ये सब तेरी वजह से हुआ है.. तेरी याद में मैं दो साल से बुर में मोमबत्ती डाल रही हूँ. मेरी एक सहेली, जिसकी शादी जल्दी हो गई थी, मिली थी तो उसने सुहागरात की पूरी कहानी मुझे बताई तब से मेरी बुर में कुछ होने लगा था. जब भी तेरी याद आती थी, तब कामुकता वश मेरी बुर में पानी आ जाता था. फिर कुछ दिन बाद में मेरी बुर में उंगली डालती थी, लेकिन मेरी आग शांत नहीं होती थी. “फिर तूने क्या किया?” “फिर मैं कुछ अलग ट्राय करने लगी. एक दिन दिल बहुत मचल रहा था कि क्या करूँ समझ में नहीं आ रहा था. तभी मुझे मोमबत्ती दिखाई पड़ी. मैंने धीरे धीरे बुर में डालना शुरू कर दिया. जैसे मोमबत्ती अन्दर डालती तो मैं और तड़पती. तो मैं जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगी. फिर मैंने कुछ बिना कुछ सोचे समझे मोमबत्ती पूरी अन्दर घुसेड़ दी.. तभी मेरी बुर से खुन आना शुरू हुआ. मैं समझ गई कि मेरी झिल्ली अब टूट चुकी है. इसलिए मैंने बोला कि ये सब तेरी वजह से ही हुआ है.”

ये सुनने के बाद मैं तो ताव में आ गया और दम से उसकी चुत मारने लगा. फिर वैशाली बोली- प्लीज़ प्रकाश, मैं आ रही हूँ. वो झड़ गई लेकिन कुछ मिनट बाद जब मेरा छूटने वाला था. मैंने उससे पूछा- मैं आ रहा हूँ.. कहाँ डालूँ.. बोल जल्दी? बोली- तेरा पानी मैं मेरी बुर में महसूस करना चाहती हूँ.. तू अन्दर ही डाल दे. मैंने उससे पूछा- कुछ गलत हो गया तो? वो बोली- चिंता मत करो, फिलहाल सेफ टाइम है.

फिर मैंने पूरा वीर्य उसकी चुत में डाल दिया और उसके ऊपर ही लेट गया. कुछ देर बात मेरी मोबाईल की रिंग बजी. मेरे घर से कॉल था. बाहर बारिश जोरों से चालू थी. मैंने घर वालों को बता दिया कि मैं मेरे दोस्त के घर पे हूँ.. जैसे ही बारिश खत्म होती है, मैं आ जाऊंगा.. आप चिंता मत करो.

फिर हम दोनों बाथरूम गए.. एक दूसरे को साफ किया. मैं वैशाली के पूरे शरीर पर साबुन लगा रहा था तो मेरा लंड आकार ले चुका था. मैंने उससे पूछा- तुम तैयार हो क्या? तो वो बोली- ये पूछने की बात है क्या!

मैंने उसको आगे झुकने के लिए बोला और पीछे से उसकी चुत मारने लगा. चुदाई होने लगी. उस बीच में वो दो बार पानी छोड़ चुकी थी. फिर मैंने उससे बोला- मैं आ रहा हूँ. तो बोली- रुक.. मेरे मुँह में डाल, तेरा वीर्य बहुत कीमती है.

वो मेरा पूरा वीर्य पी गई. मुझे जोर की पेशाब लगी थी.. तो मुझसे रहा नहीं गया… और थोड़ा पेशाब भी उसके मुँह में चला गया. वो भी पेशाब पी गई. उसको थोड़ा अलग टेस्ट लगा तो बोली- ये अलग टेस्ट कैसे आया?

तो मैंने उससे माफी मांगी और बोला- सारी यार मेरे से कंट्रोल नहीं हुआ.. तेरे मुँह में मेरा पेशाब चला गया.

तो उसने मुझे जोर का झापड़ मारा और इसके बाद मुझसे सॉरी बोलते हुए कहा- तू देख मैं क्या कर सकती हूँ.. मैं तेरे से प्यार करती हूँ. तू जो करेगा मुझे मंजूर है. अब तक मेरे लंड से पूरी पेशाब उसके शरीर पर पड़ रही थी. वो जोर से मेरे गले से लगकर रोने लगी.

मैंने उसे जैसे तैसे समझाया और शांत किया. उसे बाथरूम के रखे स्टूल पर बिठाया और मैं नीचे बैठकर उसकी चुत चाटने लगा. वो गरम होने लगी. बीच बीच में मैं अपनी जीभ उसकी गांड के छेद पर भी फिरा देता, तो वो एकदम सिहर उठती. अचानक उसका शरीर अकड़ने लगा और उसने पानी छोड़ दिया.

फिर भी मैं वैशाली की चुत चाटते जा रहा था. ये शायद उसको समझ में नहीं आ रहा था. मैंने चुत चाटते समय दो उंगलियां चुत में डालकर अन्दर बाहर करने लगा, जिससे उसके मुँह से आवाज आने लगी- आह.. आह.. जोर से.. तभी उसका शरीर वापिस अकड़ने लगा.. लेकिन उसका पानी जब निकला तो उसके साथ उसकी पेशाब भी जोर से निकल गई.. और मैं उसकी पेशाब को जितना हो सकता था, पी गया.

वैशाली के सांसें जोर जोर से चल रही थीं. मेरे मुँह में उसका पेशाब था, तभी उसने मुझे ऊपर खींचा और मुँह से मुँह लगा कर किस करने लगी, उसने मेरे मुँह से खुद का पेशाब पी लिया.. और किस करती रही. मैंने उसके चेहरे को देखा तो उसकी आंखों से पानी आ रहा था. थोड़ी देर बाद नार्मल होने के बाद मैंने पूछा- आंखों से पानी क्यों आ रहा था. वो कुछ नहीं बोली बस लिपटी रही.

हम दोनों बाथरूम के बाहर आ गए.. और दोनों ने एक दूसरे का शरीर तौलिए से पोंछा. वो बोली- प्रकाश तेरा जवाब नहीं यार.. पता नहीं तू कैसे समझ लेता कि मुझे क्या चाहिए. मेरी फ्रेंड ने मुझे सेक्स के बारे में बहुत कुछ बताया था. सुबह से मैं तेरे से यही उम्मीद कर रही थी कि तू कुछ ऐसा ही करे. मेरे मन में क्या है, ये सब तुझे 3 साल पहले नहीं समझ आता था क्या? फिर मैं बोला- यार तीन साल पहले वाली बात क्यों याद दिला रही है, लेकिन अभी तेरी शरीर भर गया है… मतलब तीन साल पहले तेरी चुची कुछ 26-28 साईज की थीं.. लेकिन अभी तो 34 हो गई हैं.

वो प्यार से मुझे मेरे हाथ पर मार रही थी.. और थोड़ी देर तक गले लगकर मेरे गोद में बैठी रही.

अब शाम के छह बज चुके थे. पता ही नहीं चला कि कब इतना टाईम हो गया. फिर मैं घर निकल आया.

इसके बाद ऐसे ही हम दोनों बाहर मिलते रहे. जब भी जगह का इंतजाम हो जाता तो हम सेक्स कर लेते.

हम दोनों के बारे में उसके घर वालों को पता चल चुका था. वो ब्राह्मण और मैं मराठा हूँ, उसके घर वालों को ये मंजूर नहीं था. उसकी शादी कहीं और तय हो गई. शादी के पहले वो मुझे मिली और बहुत रोई. फिर कुछ समय बाद उसकी शादी हो गई.

एक बार उसको मैंने उसको गाँव में देखा था… उसके साथ छोटा बच्चा था.. तो मैंने उससे बात नहीं की, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से उसे कोई तकलीफ हो.

आपको ये प्यार भरी चुदाई स्टोरी कैसी लगी, कृपया अपना अभिप्राय दीजिए. [email protected] आपका प्रकाश

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